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Udham Singh Nagar News: जीएसटी चोरी मामला पीएम कार्यालय पहुंचा
Mon, 13 Mar 2023 11:49 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 13 Mar 2023 11:49 PM IST
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जसपुर। जीएसटी चोरी प्रकरण पर यूपी के एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की। उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर निवासी ने पीएमओ के माई गिरिवेंस शिकायत प्रकोष्ठ के माध्यम से केंद्र सरकार को बताया कि उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं मंडल के जसपुर, काशीपुर आदि क्षेत्रों में कुछ लोग जीएसटी विभाग में फर्जी फर्म पंजीकृत कराकर गलत ढंग से आईटीसी का लाभ ले रहे हैं। पंजीकृत लकड़ी की फेंक फर्म से बिल और पर्चे काटे जाते हैं लेकिन माल की वास्तविक आपूर्ति नही की जा रही है।
यूपी के जनपद बिजनौर, रामपुर और मुरादाबाद आदि क्षेत्र के लकड़ी व्यापारी कुमाऊं मंडल के जसपुर, काशीपुर के राज्य कर विभाग और सीजीएसटी में फर्म पंजीकृत कराकर केवल बिल और पर्चे काट रहे हैं जबकि यूपी के जनपद बिजनौर, रामपुर और मुरादाबाद के स्थानीय किसानों से लकड़ी खरीद की जा रही है। इन्हीं बिलों के माध्यम से बिजनौर, रामपुर के किसानों से माल की आपूर्ति लेकर यमुनानगर को सप्लाई किया जा रहा है। जीएसटी के प्रावधानों में अपंजीकृत व्यक्ति टैक्स गुड की रसीद या खरीद पर क्रेता व्यापारी की ओर से आरसीएम आधार पर टैक्स जमा कर उसका लाभ आृईटीसी से लिया जाता है या या समस्त लाभ की बिक्री पर जो टैक्स बना हो उसे नकद जमा किया जाता है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नही हो रहा है। इन लोगोें की ओर से सिंडिकेट बनाकर जान बूझकर सेंट्रल ज्यूडिक्शन में फेंक फर्म के माध्यम से ई वे बिल जारी कर आईटीसी का लाभ लिया जा रहा है। जिससे विभाग और राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
इनसेट-
अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल
जसपुर। यूपी के व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कुमाऊं मंडल के जसपुर, काशीपुर, रुद्रपुर के राज्य कर विभाग के खंड अधिकारियों की ओर से लकड़ी की फर्म द्वारा बड़े स्तर पर आईटीसी क्लेम लेने की जानकारी जानबूझकर एसआईबी विंग को रेफर नही की। एसआईबी विंग ने भी ऐसी फर्म के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की। संबंधित जनपदों के सचल दलों की स्थिति भी संदेहास्पद है। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल संभव नही हो सकता। अधिकारियों ने अपनी नौकरी बचाने के लिए छापे की कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रकरण के आठ दिन बाद भी विभाग ने किसी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नही कराई। न ही बिलर और उनकी फर्जी फर्म के नाम उजागर किए। इससे प्रतीत होता है कि विभाग दोषी अधिकारियों और शातिरों को बचाने में लगा है।
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इनसेट-
प्रकरण में यह बनी हैं चुनौतियां
जसपुर। छापे की कार्रवाई से सहमे सही व्यापारियों का खोया विश्वास, व्यापार के लिए नए रजिस्ट्रेशन, जीएसटी चोरी की रिकवरी, जीएसटी चोरों पर मुकदमा, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, बेगुनाह गरीब, मजदूर और दिव्यांग के नाम से बनी फर्जी फर्म स्वामी का कसूर तय किया जाना प्रकरण में चुनौती बना है।
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अधिकारियों के बारे में जब तक पुख्ता सबूत नही मिलेंगे तब तक कुछ नहीं कह सकते। यदि कोई संलिप्त पाया जाता है तो निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी। हमारे पास जानकारी होती तो अब तक सस्पेंड हो चुके होते। बिलर के खिलाफ इस तरह के केस में आईपीसी के तहत कार्रवाई करने के पुलिस के पास पूरे अधिकार हैं। जीएसटी और इनकम टैक्स का अपना दायरा है जो अपने क्षेत्राधिकार के तहत काम करती है। हमारे विभाग के एक्ट में गिरफ्तारी के प्रावधान हैं। हम उसी के तहत बिलर के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
-डॉ. अहमद इकबाल, सेल टैक्स कमिश्नर उत्तराखंड।
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यूपी के जनपद बिजनौर, रामपुर और मुरादाबाद आदि क्षेत्र के लकड़ी व्यापारी कुमाऊं मंडल के जसपुर, काशीपुर के राज्य कर विभाग और सीजीएसटी में फर्म पंजीकृत कराकर केवल बिल और पर्चे काट रहे हैं जबकि यूपी के जनपद बिजनौर, रामपुर और मुरादाबाद के स्थानीय किसानों से लकड़ी खरीद की जा रही है। इन्हीं बिलों के माध्यम से बिजनौर, रामपुर के किसानों से माल की आपूर्ति लेकर यमुनानगर को सप्लाई किया जा रहा है। जीएसटी के प्रावधानों में अपंजीकृत व्यक्ति टैक्स गुड की रसीद या खरीद पर क्रेता व्यापारी की ओर से आरसीएम आधार पर टैक्स जमा कर उसका लाभ आृईटीसी से लिया जाता है या या समस्त लाभ की बिक्री पर जो टैक्स बना हो उसे नकद जमा किया जाता है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नही हो रहा है। इन लोगोें की ओर से सिंडिकेट बनाकर जान बूझकर सेंट्रल ज्यूडिक्शन में फेंक फर्म के माध्यम से ई वे बिल जारी कर आईटीसी का लाभ लिया जा रहा है। जिससे विभाग और राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल
जसपुर। यूपी के व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कुमाऊं मंडल के जसपुर, काशीपुर, रुद्रपुर के राज्य कर विभाग के खंड अधिकारियों की ओर से लकड़ी की फर्म द्वारा बड़े स्तर पर आईटीसी क्लेम लेने की जानकारी जानबूझकर एसआईबी विंग को रेफर नही की। एसआईबी विंग ने भी ऐसी फर्म के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की। संबंधित जनपदों के सचल दलों की स्थिति भी संदेहास्पद है। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल संभव नही हो सकता। अधिकारियों ने अपनी नौकरी बचाने के लिए छापे की कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रकरण के आठ दिन बाद भी विभाग ने किसी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नही कराई। न ही बिलर और उनकी फर्जी फर्म के नाम उजागर किए। इससे प्रतीत होता है कि विभाग दोषी अधिकारियों और शातिरों को बचाने में लगा है।
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प्रकरण में यह बनी हैं चुनौतियां
जसपुर। छापे की कार्रवाई से सहमे सही व्यापारियों का खोया विश्वास, व्यापार के लिए नए रजिस्ट्रेशन, जीएसटी चोरी की रिकवरी, जीएसटी चोरों पर मुकदमा, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, बेगुनाह गरीब, मजदूर और दिव्यांग के नाम से बनी फर्जी फर्म स्वामी का कसूर तय किया जाना प्रकरण में चुनौती बना है।
अधिकारियों के बारे में जब तक पुख्ता सबूत नही मिलेंगे तब तक कुछ नहीं कह सकते। यदि कोई संलिप्त पाया जाता है तो निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी। हमारे पास जानकारी होती तो अब तक सस्पेंड हो चुके होते। बिलर के खिलाफ इस तरह के केस में आईपीसी के तहत कार्रवाई करने के पुलिस के पास पूरे अधिकार हैं। जीएसटी और इनकम टैक्स का अपना दायरा है जो अपने क्षेत्राधिकार के तहत काम करती है। हमारे विभाग के एक्ट में गिरफ्तारी के प्रावधान हैं। हम उसी के तहत बिलर के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
-डॉ. अहमद इकबाल, सेल टैक्स कमिश्नर उत्तराखंड।