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गुरुनानक देव से मिला सरलता, नम्रता, करुणा और सेवा का सबक: गुरमीत

Wed, 07 Jun 2023 01:27 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Wed, 07 Jun 2023 01:27 AM IST
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Got the lesson of simplicity, humility from Guru Nanak Dev
राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह को सरोपा देकर सम्मानित करते गुरुद्वारा प्रबंधक
नानकमत्ता। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने श्री नानकमत्ता साहिब स्थित गुरुद्वारे में मत्था टेककर देश वासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होने कहा कि सच्चे बादशाह गुरूनानक देव जी ने हमको सरलता, नम्रता, करुणा, सेवा आदि का सबक सिखाया है। वे एक बेहतर मार्गदर्शक रहे हैं। गुरुनानक देव जी महाराज के आदर्शों और सिद्धांतों को जीवन में उतारने की जरूरत है।
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मंगलवार को राज्यपाल सिंह सिखों के ऐतिहासिक धाम गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब पहुंचे। जहां गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार हरबंस सिंह चुघ और किसान आयोग के उपाध्यक्ष सरदार राजपाल सिंह ने गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। इसके बाद राज्यपाल ने गुरुद्वारे श्री हरमिंदर साहिब दरबार में मत्था टेका और प्रदेश में सुख शांति की अरदास की। प्रबंधक समिति के अध्यक्ष हरबंस सिंह चुघ ने उन्हें स्मृति चिह्न और सरोपा भेंट किया। राज्यपाल ने गुरुद्वारा साहिब में दर्शन के बाद ऐतिहासिक पीपल साहिब के दर्शन किए और पीपल (पवित्र पंजा) साहिब के इतिहास को जाना। वहां गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के महासचिव अमरजीत सिंह, सचिव हरभजन सिंह, डायरेक्टर कुलदीप सिंह पन्नू, जोगेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, चरणजीत सिंह, गुरवंत सिंह, गुरदयाल सिंह, निर्मल सिंह हंसपाल, अमरजीत सिंह बेदी आदि थे।
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गुरुद्वारों में विवाह को पूर्ण विधिक मान्यता देने के लिए आनंद मैरिज एक्ट हो लागू
गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष ने दिया राज्यपाल को ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नानकमत्ता। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष डॉ. हरबंस सिंह चुघ ने राज्यपाल गुरमीत सिंह को ज्ञापन देकर गुरुद्वारा साहिब में विवाह को पूर्ण विधिक मान्यता देने के लिए अन्य प्रदेश की तरह यहां भी आनंद मैरिज एक्ट 1909 लागू कराने की मांग की। डॉ. चुघ ने कहा कि सिख धर्म में श्री गुरुग्रंथ साहिब जी के फेरे की पद्धति से विवाह समारोह होते हैं और सिख धर्म में निर्विवाद रूप से सौ फीसदी इसी पद्धति की सामाजिक मान्यता है। तत्कालीन भारत सरकार की ओर से आनंद मैरिज एक्ट 1909 अधिनियम लाया गया था। जून 2012 में संसद की ओर से आनंद विवाह अधिनियम 1909 पर सभी राज्यों को नियम तैयार कर इसे लागू कराने का निर्णय लिया गया था। कई राज्यों ने नियमों की संरचना करते हुए इसे लागू कर दिया है। हाईकोर्ट ने भी 23 मार्च 2021 को उत्तराखंड को भी इस विषय में विचार करने के निर्देश पारित किए हैं। 20 दिसंबर 2022 में आयोजित कमेटी की बैठक में यूपी और उत्तराखंड राज्य आनंद मैरिज एक्ट 1909 के प्रावधान लागू कराने के लिए राज्य सरकारों से अनुरोध करने का निर्णय लिया था। उन्होंने राज्यपाल से उत्तराखंड में भी गुरुद्वारों में हो रहे विवाहों को पूर्ण विधिक मान्यता देने के लिए यहां भी आनंद मैरिज एक्ट 1909 लागू कराने की मांग की।
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