{"_id":"61146505ae384103e5ce816bccc94b71","slug":"gas-electricity-became-met-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गैस मिले तो बने बिजली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गैस मिले तो बने बिजली
Updated Tue, 11 Aug 2015 11:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गैस आधारित पावर प्लांटों को अगर केेंद्र सरकार से गैस मिल जाए तो यहां पर इतनी बिजली पैदा होगी कि पूरा उत्तराखंड उसे खर्च नहीं कर पाएगा और अतिरिक्त बिजली बेचकर पावर प्लांट पैसे भी कमाएंगे।
विज्ञापन
मगर दुर्भाग्य यह है कि काशीपुर में स्थापित पावर प्लांटों को अभी उचित दर पर गैस नहीं मिल पा रही है।
उत्तराखंड में कई छोटे-बड़े जल विद्युत पावर प्लांट हैं। जो ऊर्जा प्रदेश के नाम से पहचाने जाने वाले उत्तराखंड को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर नहीं बना सके हैं।
विज्ञापन
इसलिए निजी क्षेत्र की कंपनियां यहां पर गैस आधारित पावर प्लांट लाईं और उन्होंने काशीपुर में गैस आधारित पावर प्लांट स्थापित किया। वर्ष 2010 के आसपास यहां पर सरावंती, गामा, बीटा गैस आधारित पावर प्लांट की नींव रखी गई। सूत्रों के मुताबिक गैस आधारित सरावंती पावर प्लांट में करीब 1800 करोड़ का निवेश किया गया है।
विज्ञापन
इस प्लांट को दो फेस के तहत चलाया जाना है, इनमें से एक फेस तो करीब तीन साल पहले ही बनकर तैयार हो गया है और उसमें लगे सारे मशीनी उपकरण आदि चार्ज भी हैं।
गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) ने गैस की पाइपलाइन भी सरावंती पावर प्लांट तक पहुंचा दी है। यह पावर प्लांट अगर पूरी तरह से चलता है तो करीब 450 मेगावाट बिजली पैदा होगी। इसी तरह से महुआखेड़ागंज में गैस आधारित गामा और बीटा पावर प्लांट की नींव रखी गई है।
इन दोनों पावर प्रोजेक्टों में करीब 900-900 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इनसे करीब 250-250 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाना है। यह भी पावर प्रोजेक्ट करीब-करीब पूरे हो चुके हैं।
बस इन दोनों पावर प्लांटों तक गेल द्वारा गैस पाइप लाइन का पहुंचाया जाना शेष रह गया है, जबकि खाईखेड़ा गांव में स्थापित सरावंती पावर प्लांट तक गेल ने गैस की पाइप लाइन को पहुंचा दिया है।
मगर इस पाइप लाइन में अभी जो गैस दौड़ रही है, वह काफी मंहगी है। सूत्रों के मुताबिक अभी गेल किसी निजी कंपनी से गैस खरीद करके उसे आगे की फैक्ट्रियों को दे रहा है।
जिस दिन गेल को भारत सरकार के साझा उपक्रमों से गैस मिलने लगेगी, उस दिन ये सस्ती पड़ेगी। तब सरावंती, गामा, बीटा जैसे गैस आधारित पावर प्लांट बिजली का उत्पादन करेंगे।