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Udham Singh Nagar News: वसा निकालकर पनीर में मिलाया जा रहा वनस्पती घी और रिफाइंड
Fri, 05 May 2023 11:30 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 05 May 2023 11:30 PM IST
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रुद्रपुर। मिलावटखोर अधिक कमाई के चक्कर में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। खाद्य पदार्थों की जांच के लिए जिले में जून में चलाए गए दो अभियानों में पनीर के चार नमूने फेल और तीन अधोमानक मिले हैं। फेल चार नमूनों में पनीर में वास्तविक वसा के स्थान पर वनस्पती घी और रिफाइंड मिला है। इस मिलावटी पनीर से हार्ट अटैक के साथ ही किडनी, लीवर, बीपी और शुगर की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मिलावट खोरों पर सीजेएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने से पहले उन्हें गाजियाबाद और कोलकाता की राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशालाओं में नमूनों की दोबारा जांच कराने का मौका दिया है।
खाद्य संरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने 11 अप्रैल से 15 और 20 से 22 जून जिले में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए विशेष चेकिंग अभियान चलाया था। इस दौरान कुल पनीर, दूध, मसाले, मावे व तेल के 45 नमूने लिए थे। इनमें दूध के चार नमूनों में से तीन और मावे के छह में एक नमूना अधोमानक पाया गया था। मसाले का एक नमूना भी अधोमानक मिला है। पनीर के सात में चार नमूने पूरी तरह फेल और तीन अधोमानक पाए गए हैं। राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषणशाला के अनुसार, जांच रिपोर्ट फेल पाया गया पनीर स्वास्थ्य के लिए मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। इससे होने वाली गंभीर बीमारियों से मनुष्य की मौत भी हो सकती है।
पनीर बनाने के दौरान तीनगुनी कमाई करते हैं मिलावट खोर
रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर जिले में प्रतिमाह यूपी के बरेली, रामपुर, स्वार, मुरादाबाद आदि जगहों से प्रतिमाह हजारों क्विंटल पनीर पहुंच जा रहा है। इसके अलावा कुछ निजी डेयरी संचालक भी दूध से पनीर बना रहे हैं। राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषणशाला के उपायुक्त आरएस कठायत बताते हैं कि दूध से पनीर बनाने से पहले मिलावटखोर पहले निकालकर घी और मक्खन बनाकर बेचते हैं। इसके बाद मिलावटखोर दूध के सफेद हिस्से (सपरेटा) में फॉरेन फेट यानी वनस्पती घी और रिफाइंड मिलाकर क्रीम और वास्तविक वसा की पूर्ति करने का प्रयास करते हैं। यानी मिलावट खोर दूध से तीन गुना फायदा उठाते हैं। पहले वह क्रीम से दूध व मक्खन बनाकर बेचते हैं। इसके बाद सस्ते व घटिया तेल व डालडा की मिलावट कर पनीर बनाते हैं। इसके बाद बचे हुए गुणवत्ता विहीन दूध को भी बेच देते हैं।
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जिले में सबसे अधिक मिलावट पनीर और दूध में हो रही है। अप्रैल में चलाए गए दो विशेष सैंपलिंग अभियानों की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। पनीर में वास्तविक वसा के स्थान पर फॉरेन फेट मिलें हैं, जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए घातक हैं। मिलावटखोरों के विरुद्ध सीजेएम कोर्ट में केस दर्ज कराया जाएगा। लेकिन इससे पहले खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिक अधिनियम के तहत मिलावटखोरों को गाजियाबाद और कोलकाता की राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशालाओं में पनीर के नमूनों की दोबारा जांच कराने का मौका दिया गया है। - ललित मोहन पांडेय, जिला खाद्य संरक्षा अधिकारी।
मौसम खराब होने से मोबाइल खाद्य विश्लेषणशाला वाहन को नहीं भेजा चारधाम
रुद्रपुर। मौसम खराब होने के कारण उत्तराखंड की रुद्रपुर स्थित राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषणाला से मोबाइल खाद्य विश्लेषणशाला वाहन को अभी चारधाम यात्रा के पड़ावों में सैंपलिंग के लिए नहीं भेजा गया है। सोमवार को मोबाइल खाद्य विश्लेषणशाला वाहन को गढ़वाल मंडल के लिए रवाना किए जाने की संभावना है। बता दें कि इस वर्ष पहली उत्तराखंड में चार यात्रा के पड़ावों में भी खाद्य नमूनों की जांच होनी है।
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खाद्य संरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने 11 अप्रैल से 15 और 20 से 22 जून जिले में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए विशेष चेकिंग अभियान चलाया था। इस दौरान कुल पनीर, दूध, मसाले, मावे व तेल के 45 नमूने लिए थे। इनमें दूध के चार नमूनों में से तीन और मावे के छह में एक नमूना अधोमानक पाया गया था। मसाले का एक नमूना भी अधोमानक मिला है। पनीर के सात में चार नमूने पूरी तरह फेल और तीन अधोमानक पाए गए हैं। राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषणशाला के अनुसार, जांच रिपोर्ट फेल पाया गया पनीर स्वास्थ्य के लिए मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। इससे होने वाली गंभीर बीमारियों से मनुष्य की मौत भी हो सकती है।
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पनीर बनाने के दौरान तीनगुनी कमाई करते हैं मिलावट खोर
रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर जिले में प्रतिमाह यूपी के बरेली, रामपुर, स्वार, मुरादाबाद आदि जगहों से प्रतिमाह हजारों क्विंटल पनीर पहुंच जा रहा है। इसके अलावा कुछ निजी डेयरी संचालक भी दूध से पनीर बना रहे हैं। राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषणशाला के उपायुक्त आरएस कठायत बताते हैं कि दूध से पनीर बनाने से पहले मिलावटखोर पहले निकालकर घी और मक्खन बनाकर बेचते हैं। इसके बाद मिलावटखोर दूध के सफेद हिस्से (सपरेटा) में फॉरेन फेट यानी वनस्पती घी और रिफाइंड मिलाकर क्रीम और वास्तविक वसा की पूर्ति करने का प्रयास करते हैं। यानी मिलावट खोर दूध से तीन गुना फायदा उठाते हैं। पहले वह क्रीम से दूध व मक्खन बनाकर बेचते हैं। इसके बाद सस्ते व घटिया तेल व डालडा की मिलावट कर पनीर बनाते हैं। इसके बाद बचे हुए गुणवत्ता विहीन दूध को भी बेच देते हैं।
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जिले में सबसे अधिक मिलावट पनीर और दूध में हो रही है। अप्रैल में चलाए गए दो विशेष सैंपलिंग अभियानों की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। पनीर में वास्तविक वसा के स्थान पर फॉरेन फेट मिलें हैं, जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए घातक हैं। मिलावटखोरों के विरुद्ध सीजेएम कोर्ट में केस दर्ज कराया जाएगा। लेकिन इससे पहले खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिक अधिनियम के तहत मिलावटखोरों को गाजियाबाद और कोलकाता की राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशालाओं में पनीर के नमूनों की दोबारा जांच कराने का मौका दिया गया है। - ललित मोहन पांडेय, जिला खाद्य संरक्षा अधिकारी।
मौसम खराब होने से मोबाइल खाद्य विश्लेषणशाला वाहन को नहीं भेजा चारधाम
रुद्रपुर। मौसम खराब होने के कारण उत्तराखंड की रुद्रपुर स्थित राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषणाला से मोबाइल खाद्य विश्लेषणशाला वाहन को अभी चारधाम यात्रा के पड़ावों में सैंपलिंग के लिए नहीं भेजा गया है। सोमवार को मोबाइल खाद्य विश्लेषणशाला वाहन को गढ़वाल मंडल के लिए रवाना किए जाने की संभावना है। बता दें कि इस वर्ष पहली उत्तराखंड में चार यात्रा के पड़ावों में भी खाद्य नमूनों की जांच होनी है।