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Udham Singh Nagar News: केमिकल के नाम पर ठगे पांच लाख रुपये
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काशीपुर। फर्जी पहचान बनाकर साइबर ठगों ने एक प्रतिष्ठित मिल के साथ हाइड्रोजन पेरोक्साइड केमिकल की सप्लाई के नाम पर पांच लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने नवी मुंबई स्थित प्रशांत केमिकल के पते का इस्तेमाल किया। ठगी का अहसास होने पर मिल के प्रबंध निदेशक ने मामले में शिकायत की है।
रामनगर रोड स्थित बनवारी पेपर मिल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जसबीर सिंह गोराया ने पुलिस को शिकायत की। इसमें बताया कि पेपर निर्माण में प्रयुक्त होने वाले हाइड्रोजन पेरोक्साइड केमिकल के लिए मिल प्रबंधन ने इंडिया मार्ट पोर्टल पर इसकी तलाश की थी।
पोर्टल पर उनकी बातचीत नवी मुंबई के पनवेल स्थित प्रशांत केमिकल के नाम से जुड़े एक व्यक्ति से हुई। 22 सितंबर 2025 को हुई बातचीत में 30 टन केमिकल का सौदा 25 रुपये प्रति किलो की दर पर तय किया गया।
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सौदे के तहत मिल प्रबंधन ने 25 और 26 सितंबर को आरटीजीएस के माध्यम से संबंधित व्यक्ति के दिए गए बैंक खाते में चार लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद एक अक्तूबर को मांग करने पर एक लाख रुपये की अतिरिक्त राशि और भेज दी।
आरोप है कि रुपये प्राप्त करने के बाद आरोपित ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया। केमिकल की डिलीवरी भी नहीं भेजी। जब मिल प्रतिनिधि नवी मुंबई स्थित प्रशांत केमिकल के दिए पते पर पहुंचे तो वहां पता चला कि जिस बैंक खाते में पैसे भेजे गए थे, वह उसके फर्म का नहीं है और न ही वह मोबाइल नंबर उनके किसी कर्मचारी का है।
फर्म ने किसी भी प्रकार के लेनदेन से इन्कार कर दिया। उन्हें अहसास हुआ कि किसी अज्ञात साइबर अपराधी ने फर्जी पहचान बताकर मिल के साथ धोखाधड़ी की है। पीड़ित पक्ष ने इस मामले की शिकायत साइबर क्राइम पोर्टल पर भी दर्ज करा दी है।
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रामनगर रोड स्थित बनवारी पेपर मिल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जसबीर सिंह गोराया ने पुलिस को शिकायत की। इसमें बताया कि पेपर निर्माण में प्रयुक्त होने वाले हाइड्रोजन पेरोक्साइड केमिकल के लिए मिल प्रबंधन ने इंडिया मार्ट पोर्टल पर इसकी तलाश की थी।
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पोर्टल पर उनकी बातचीत नवी मुंबई के पनवेल स्थित प्रशांत केमिकल के नाम से जुड़े एक व्यक्ति से हुई। 22 सितंबर 2025 को हुई बातचीत में 30 टन केमिकल का सौदा 25 रुपये प्रति किलो की दर पर तय किया गया।
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सौदे के तहत मिल प्रबंधन ने 25 और 26 सितंबर को आरटीजीएस के माध्यम से संबंधित व्यक्ति के दिए गए बैंक खाते में चार लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद एक अक्तूबर को मांग करने पर एक लाख रुपये की अतिरिक्त राशि और भेज दी।
आरोप है कि रुपये प्राप्त करने के बाद आरोपित ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया। केमिकल की डिलीवरी भी नहीं भेजी। जब मिल प्रतिनिधि नवी मुंबई स्थित प्रशांत केमिकल के दिए पते पर पहुंचे तो वहां पता चला कि जिस बैंक खाते में पैसे भेजे गए थे, वह उसके फर्म का नहीं है और न ही वह मोबाइल नंबर उनके किसी कर्मचारी का है।
फर्म ने किसी भी प्रकार के लेनदेन से इन्कार कर दिया। उन्हें अहसास हुआ कि किसी अज्ञात साइबर अपराधी ने फर्जी पहचान बताकर मिल के साथ धोखाधड़ी की है। पीड़ित पक्ष ने इस मामले की शिकायत साइबर क्राइम पोर्टल पर भी दर्ज करा दी है।