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मेडिकल कॉलेज के निर्माण में देरी से 2024 में भी शुरू नहीं हो पाएगा पहला बैच
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रुद्रपुर में निर्माणाधीन राजकीय मेडिकल कॉलेज।
- फोटो : RUDRAPUR
रुद्रपुर। तराई के पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज के निर्माण का कार्य एक बार फिर रुक गया है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी ईपीएल कंपनी (इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट लिमिटेड) से हटाकर उत्तराखंड पेयजल संसाधन एवं निर्माण इकाई को सौंपने के एक माह बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग को आशंका है कि यदि इसी धीमी गति से निर्माण कार्य जारी रहा तो एमबीबीएस की 100 सीटों का पहला बैच वर्ष 2024 में भी शुरू नहीं हो सकेगा।
रुद्रपुर राजकीय मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में 11 अक्तूबर से ओपीडी शुरू हो चुकी हैं। वर्तमान में यहां चार विभागों की ओपीडी चल रही है लेकिन मेडिकल कॉलेज के दूसरे हिस्से यानी छात्रावास, प्रशासनिक भवन, अकादमिक भवन आदि का निर्माण ठप पड़ा हुआ है। एआरटीओ कार्यालय के निकट निर्माणाधीन इन भवनों के पिलरों की सरिया काटने को लेकर करीब एक माह पहले हुए विवाद के बाद कार्यदायी संस्था को बदल दिया गया था लेकिन नई कार्यदायी संस्था अभी तक कार्य शुरू नहीं कर सकी है।
पेयजल निर्माण इकाई के परियोजना प्रबंधक एके जोशी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज छात्रावास का निर्माण कार्य जल्द ही रफ्तार पकड़ेगा। कई महीनों से ठप पड़े निर्माण कार्यों को अब पेयजल संसाधन एवं निर्माण इकाई पूरा करेगी। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज के भवनों के निर्माण के लिए ईपीएल कंपनी से फाइलें हस्तांतरित की जा रही हैं। शीघ्र ही इस प्रक्रिया के पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को शुरू कर दिया जाएगा। निर्माण कार्य के लिए शासन से करीब 336 करोड़ बजट मिला है।
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पिछले 17 वर्षों से निर्माणाधीन है रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज
रुद्रपुर। रुद्रपुर में 17 वर्षों से मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण अभी तक मेडिकल कॉलेज का सपना पूरा नहीं हो सका है। शासन की ओर से वर्ष 2023 तक मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन निर्माण कार्य की गति बेहद धीमी है। इस कॉलेज के लिए एमबीबीएस की 100 सीटें निर्धारित की गई हैं लेकिन एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए मेडिकल कॉलेज के हॉस्पिटल के अलावा एकेडमिक भवन, प्रशासनिक भवन आदि की भी आवश्यकता है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज का अस्पताल तो तैयार हो चुका है लेकिन शेष भवनों का निर्माण अधूरा है। मेडिकल कॉलेज निर्माण में देरी से जहां लोगों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, वहीं कई युवाओं के डॉक्टर बनने का सपना भी पूरा नहीं हो पा रहा है। संवाद
मेडिकल कॉलेज का अस्पताल तैयार हो चुका है और वर्तमान में ओपीडी चल रही हैं लेकिन जब तक मेडिकल कॉलेज के अन्य भवन मसलन, एकेडमिक भवन, छात्रावास, प्रशासनिक भवन आदि नहीं बन जाते, एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकती। यदि इसी गति से मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य जारी रहा तो वर्ष 2024 तक भी पहला बैच शुरू नहीं हो पाएगा। - डॉ. केदार शाही, प्रार्चाय, रुद्रपुर डिग्री कॉलेज।
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रुद्रपुर राजकीय मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में 11 अक्तूबर से ओपीडी शुरू हो चुकी हैं। वर्तमान में यहां चार विभागों की ओपीडी चल रही है लेकिन मेडिकल कॉलेज के दूसरे हिस्से यानी छात्रावास, प्रशासनिक भवन, अकादमिक भवन आदि का निर्माण ठप पड़ा हुआ है। एआरटीओ कार्यालय के निकट निर्माणाधीन इन भवनों के पिलरों की सरिया काटने को लेकर करीब एक माह पहले हुए विवाद के बाद कार्यदायी संस्था को बदल दिया गया था लेकिन नई कार्यदायी संस्था अभी तक कार्य शुरू नहीं कर सकी है।
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पेयजल निर्माण इकाई के परियोजना प्रबंधक एके जोशी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज छात्रावास का निर्माण कार्य जल्द ही रफ्तार पकड़ेगा। कई महीनों से ठप पड़े निर्माण कार्यों को अब पेयजल संसाधन एवं निर्माण इकाई पूरा करेगी। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज के भवनों के निर्माण के लिए ईपीएल कंपनी से फाइलें हस्तांतरित की जा रही हैं। शीघ्र ही इस प्रक्रिया के पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को शुरू कर दिया जाएगा। निर्माण कार्य के लिए शासन से करीब 336 करोड़ बजट मिला है।
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पिछले 17 वर्षों से निर्माणाधीन है रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज
रुद्रपुर। रुद्रपुर में 17 वर्षों से मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण अभी तक मेडिकल कॉलेज का सपना पूरा नहीं हो सका है। शासन की ओर से वर्ष 2023 तक मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन निर्माण कार्य की गति बेहद धीमी है। इस कॉलेज के लिए एमबीबीएस की 100 सीटें निर्धारित की गई हैं लेकिन एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए मेडिकल कॉलेज के हॉस्पिटल के अलावा एकेडमिक भवन, प्रशासनिक भवन आदि की भी आवश्यकता है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज का अस्पताल तो तैयार हो चुका है लेकिन शेष भवनों का निर्माण अधूरा है। मेडिकल कॉलेज निर्माण में देरी से जहां लोगों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, वहीं कई युवाओं के डॉक्टर बनने का सपना भी पूरा नहीं हो पा रहा है। संवाद
मेडिकल कॉलेज का अस्पताल तैयार हो चुका है और वर्तमान में ओपीडी चल रही हैं लेकिन जब तक मेडिकल कॉलेज के अन्य भवन मसलन, एकेडमिक भवन, छात्रावास, प्रशासनिक भवन आदि नहीं बन जाते, एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकती। यदि इसी गति से मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य जारी रहा तो वर्ष 2024 तक भी पहला बैच शुरू नहीं हो पाएगा। - डॉ. केदार शाही, प्रार्चाय, रुद्रपुर डिग्री कॉलेज।