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Udham Singh Nagar News: काशीपुर में 81 लाभार्थियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस
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काशीपुर। ऊधमसिंह नगर जिले में नंदा गौरा योजना के तहत फर्जी आय प्रमाणपत्र लगाने वाले 81 लाभार्थियों के खिलाफ जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) ने जांच के बाद काशीपुर आईटीआई थाना में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है।
नंदा गौरा योजना का लाभ लेने के लिए जिले के 6,541 लाभार्थियों ने बाल विकास विभाग में आवेदन किया था। इसमें जन्म के आधार पर योजना का लाभ लेने के लिए 2,250 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें बालिका का जन्म होने पर माता-पिता को 11,000 रुपये दिए जाते हैं जबकि 12वीं पास होने के बाद उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए 4,291 ने आवेदन किया था। इसके योजना में बालिकाओं को 51,000 रुपये दिए जाते हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद जब बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने जांच की तो आय प्रमाणपत्रों में खामियां मिलीं।
जांच के बाद सभी बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) ने अपनी रिपोर्ट डीपीओ को सौंपी। डीपीओ ने यह रिपोर्ट सीडीओ को सौंपी। ऊधमसिंह नगर के डीपीओ उदय प्रताप सिंह ने बताया कि नंदा गौरा योजना में फर्जी आय प्रमाणपत्र लगाने की शिकायत पर डीएम और सीडीओ के निर्देश पर मामले की जांच संबंधित एसडीएम और तहसीलदार स्तर से कराई गई। जांच में लाभार्थियों का आय प्रमाणपत्र और अन्य अभिलेख नियम विरुद्ध गलत पाए गए।
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सीडीओ के निर्देश पर सभी सीडीपीओ को पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। आईटीआई थाना पुलिस ने डीपीओ उदय प्रताप सिंह की तहरीर पर 81 लाभार्थियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आईटीआई थाना प्रभारी आशुतोष सिंह ने बताया कि डीपीओ की तहरीर पर केस दर्ज कर मामले की जांच की जाएगी।
कुंडा थाना में भी दर्ज हो चुका है एक केस
काशीपुर। सीडीपीओ जसपुर की ओर से थाना कुंडा में दी तहरीर में बताया कि नंदा गौरा योजना में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाभ लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम की ओर से निर्देश दिए गए हैं। जांच में पता चला कि तहसील काशीपुर के ग्राम नवलपुर निवासी सुंदर सिंह ने बेटी को लाभ दिलाने के लिए फर्जी आय प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया है। तहसीलदार काशीपुर की ओर से की गई जांच में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है। कुंडा थाना पुलिस ने इस मामले में छात्रा के पिता के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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नंदा गौरा योजना का लाभ लेने के लिए जिले के 6,541 लाभार्थियों ने बाल विकास विभाग में आवेदन किया था। इसमें जन्म के आधार पर योजना का लाभ लेने के लिए 2,250 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें बालिका का जन्म होने पर माता-पिता को 11,000 रुपये दिए जाते हैं जबकि 12वीं पास होने के बाद उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए 4,291 ने आवेदन किया था। इसके योजना में बालिकाओं को 51,000 रुपये दिए जाते हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद जब बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने जांच की तो आय प्रमाणपत्रों में खामियां मिलीं।
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जांच के बाद सभी बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) ने अपनी रिपोर्ट डीपीओ को सौंपी। डीपीओ ने यह रिपोर्ट सीडीओ को सौंपी। ऊधमसिंह नगर के डीपीओ उदय प्रताप सिंह ने बताया कि नंदा गौरा योजना में फर्जी आय प्रमाणपत्र लगाने की शिकायत पर डीएम और सीडीओ के निर्देश पर मामले की जांच संबंधित एसडीएम और तहसीलदार स्तर से कराई गई। जांच में लाभार्थियों का आय प्रमाणपत्र और अन्य अभिलेख नियम विरुद्ध गलत पाए गए।
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सीडीओ के निर्देश पर सभी सीडीपीओ को पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। आईटीआई थाना पुलिस ने डीपीओ उदय प्रताप सिंह की तहरीर पर 81 लाभार्थियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आईटीआई थाना प्रभारी आशुतोष सिंह ने बताया कि डीपीओ की तहरीर पर केस दर्ज कर मामले की जांच की जाएगी।
कुंडा थाना में भी दर्ज हो चुका है एक केस
काशीपुर। सीडीपीओ जसपुर की ओर से थाना कुंडा में दी तहरीर में बताया कि नंदा गौरा योजना में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाभ लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम की ओर से निर्देश दिए गए हैं। जांच में पता चला कि तहसील काशीपुर के ग्राम नवलपुर निवासी सुंदर सिंह ने बेटी को लाभ दिलाने के लिए फर्जी आय प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया है। तहसीलदार काशीपुर की ओर से की गई जांच में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है। कुंडा थाना पुलिस ने इस मामले में छात्रा के पिता के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।