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Udham Singh Nagar News: त्रिलोक को फल, फूल, सब्जी की खेती से मिली पहचान
Tue, 06 Jun 2023 01:24 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 06 Jun 2023 01:24 AM IST
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रजपुरा नंबर दो निवासी किसान त्रिलोक चंद कंबोज परंपरागत खेती से हटकर सब्जी और फूल उत्पादन कर मुन
गदरपुर। रजपुरा नंबर दो निवासी किसान त्रिलोक चंद कंबोज परंपरागत खेती से हटकर सब्जी और फूल उत्पादन कर मुनाफा कमा रहे हैं। त्रिलोक को वर्ष 2022 के किसान भूषण सम्मान और वर्ष 2014 में किसान श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 74वें स्थापना दिवस पर देश के प्रगतिशील किसानों की सूची बनी। अपने सफल प्रयोगों से उनका नाम भी इस सूची में शामिल हो चुका है।
त्रिलोक ने बताया कि वर्ष 1997-98 में उनके बड़े भाई जयपाल कंबोज ने परंपरागत खेती छोड़कर फूलों की खेती शुरू की थी। वर्ष 2016 में जयपाल की मृत्यु के बाद त्रिलोक ने अपने पिता वरयाम चंद्र कंबोज के साथ गेहूं और धान बोने के बजाय गेंदा और ग्लेडियोलस फूल उगाया। बाद में मेंथा, लहसुन, प्याज की खेती की। धान की फसल की कटाई के बाद उन्होंने फूल उगाए लेकिन दस एकड़ जमीन पर की गई फूलों की खेती कोरोना महामारी के कारण तीन एकड़ तक सिमट गई।
इसके बावजूद सफलता के लिए उन्होंने कई प्रयोग किए। इनमें विभिन्न प्रतियोगिताओं और पुष्प प्रदर्शनी में कई प्रशस्ति पत्र और सम्मान भी पाए। वे वर्ष 2008 से लगातार हर साल राजभवन देहरादून में होने वाली पुष्प प्रदर्शनी में सम्मानित हो रहे हैं। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना एवं संचालन के लिए छह दिसंबर 2018 को भी उन्हें प्रशस्ति पत्र मिला। संवाद
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दोहरा लाभ कमा सकते हैं किसान
गदरपुर। प्रगतिशील किसान त्रिलोक ने बताया कि इच्छुक किसान गेहूं की फसल न बोकर ग्लेडियोलस और मेंथा की खेती कर दोहरा लाभ कमा सकते हैं। एक एकड़ में 60,000 रुपये से अधिक की लागत आती है। कहा कि बेमौसमी धान की फसल के बजाय क्षेत्र के किसान मेंथा, मक्का, सब्जी और फूलों की खेती कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं लेकिन फूलों की खेती कठिन होने के साथ अधिक मेहनत भी मांगती है।
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त्रिलोक ने बताया कि वर्ष 1997-98 में उनके बड़े भाई जयपाल कंबोज ने परंपरागत खेती छोड़कर फूलों की खेती शुरू की थी। वर्ष 2016 में जयपाल की मृत्यु के बाद त्रिलोक ने अपने पिता वरयाम चंद्र कंबोज के साथ गेहूं और धान बोने के बजाय गेंदा और ग्लेडियोलस फूल उगाया। बाद में मेंथा, लहसुन, प्याज की खेती की। धान की फसल की कटाई के बाद उन्होंने फूल उगाए लेकिन दस एकड़ जमीन पर की गई फूलों की खेती कोरोना महामारी के कारण तीन एकड़ तक सिमट गई।
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इसके बावजूद सफलता के लिए उन्होंने कई प्रयोग किए। इनमें विभिन्न प्रतियोगिताओं और पुष्प प्रदर्शनी में कई प्रशस्ति पत्र और सम्मान भी पाए। वे वर्ष 2008 से लगातार हर साल राजभवन देहरादून में होने वाली पुष्प प्रदर्शनी में सम्मानित हो रहे हैं। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना एवं संचालन के लिए छह दिसंबर 2018 को भी उन्हें प्रशस्ति पत्र मिला। संवाद
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दोहरा लाभ कमा सकते हैं किसान
गदरपुर। प्रगतिशील किसान त्रिलोक ने बताया कि इच्छुक किसान गेहूं की फसल न बोकर ग्लेडियोलस और मेंथा की खेती कर दोहरा लाभ कमा सकते हैं। एक एकड़ में 60,000 रुपये से अधिक की लागत आती है। कहा कि बेमौसमी धान की फसल के बजाय क्षेत्र के किसान मेंथा, मक्का, सब्जी और फूलों की खेती कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं लेकिन फूलों की खेती कठिन होने के साथ अधिक मेहनत भी मांगती है।