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Udham Singh Nagar News: अब रसोई में धुएं से आजाद होंगी ग्रामीण महिलाएं
Mon, 21 Sep 2026 01:07 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 21 Sep 2026 01:07 AM IST
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पंतनगर। जल्द ही ग्रामीण अंचल की महिलाओं को रसोई में धुएं से आजादी मिल जाएगी। इसके लिए जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने उन्नत किस्म का बायोमास फायर्ड चूल्हा ईजाद किया है, जो सुदूर गांवों में भोजन पकाने के साथ गर्म पानी भी प्रदान करेगा। इसे हीट रिकवरी चूल्हा भी कह सकते हैं। भविष्य में कुछ सुधारों के बाद डीआईसी की मदद से राज्य के ग्रामीण अंचलों में इसे उपलब्ध कराने की योजना है।
प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्राध्यापक डाॅ. पीसी तिवारी के मार्गदर्शन में एमटेक छात्रों ने धुआं रहित बायोमास फायर्ड चूल्हा बनाया है। यह चूल्हा पहाड़ में ग्रामीणों के जीवन को आसान कर सकता है। इससे जंगलों की जलौनी लकड़ी पर निर्भरता भी खत्म हो सकती है। डाॅ. तिवारी ने बताया कि उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ऐसा धुआं रहित चूल्हा बनाया जाए, जिससे पहाड़ के लोगों का जीवन आसान हो जाए और पिरूल सहित पर्यावरण जैसी प्रमुख समस्याओं से भी निजात मिले। उन्होंने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की अभिकल्प नव प्रवर्तन (डीआईसी) परियोजना के तहत इस पर काम शुरू किया और उनके दिशा निर्देशन में एमटेक छात्रों ने बायोमास फायर्ड चूल्हा बनाने की तकनीक ईजाद कर ली। इस नवाचार का पेटेंट भी फाइल कर दिया गया है।
-इंसेट
ऐसे बना बायोमास फायर्ड चूल्हा
पंतनगर। डाॅ. तिवारी ने बताया कि इस तकनीक में उत्तराखंड के जंगलों में उपलब्ध बायोमास (पिरूल) का प्रयोग किया गया है। जिससे ऊर्जा की जरूरत के लिए लकड़ी के ईंधन पर निर्भरता खत्म होगी और जंगल की आग रोकने सहित पौधों के पुनर्जन्म में मदद मिलेगी। बताया कि लोहे की चादर (स्क्रैप) से करीब दस इंच आयताकार और 15 इंच ऊंचाई का चूल्हा डिजाइन किया गया है। जिसके बीच में करीब चार इंच आयताकार लोहे की गोल चादर का पाइप लगाकर उसे ढक्कन से बंद किया गया है। साथ ही धुआं निकलने के लिए ऊंचाई के बीच दो इंच चौड़ा और दो फीट लंबा पाइप निकाला गया है। इसकी बाहरी और अंदर की दीवार के बीच पिरूल का चूरा और सस्ते मिश्रण का प्रयोग किया है। इस चूल्हे को व्यावसायिक तौर पर बनाने में डेढ़ से दो हजार रुपये खर्च हुए। संवाद
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-इंसेट
एलपीजी का बन सकता है विकल्प
पंतनगर। डॉ. तिवारी ने बताया कि पहले चरण में बायोमास स्टोव और दूसरे चरण में बायोमास फायर्ड चूल्हा बनाया है। तीसरे चरण में तकनीक को मॉडिफाई कर एलपीजी का विकल्प बनाने पर काम करेंगे और उन्नत चूल्हे बनाकर राज्य सरकार में प्रस्तुतिकरण के बाद रिमोट एरिया में उपलब्ध कराएंगे। यदि राज्य सरकार ने सहयोग किया तो जल्द इस तकनीक का व्यावसायीकरण कर वृहद स्तर पर बायोमास चूल्हे का निर्माण शुरू हो जाएगा। संवाद
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प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्राध्यापक डाॅ. पीसी तिवारी के मार्गदर्शन में एमटेक छात्रों ने धुआं रहित बायोमास फायर्ड चूल्हा बनाया है। यह चूल्हा पहाड़ में ग्रामीणों के जीवन को आसान कर सकता है। इससे जंगलों की जलौनी लकड़ी पर निर्भरता भी खत्म हो सकती है। डाॅ. तिवारी ने बताया कि उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ऐसा धुआं रहित चूल्हा बनाया जाए, जिससे पहाड़ के लोगों का जीवन आसान हो जाए और पिरूल सहित पर्यावरण जैसी प्रमुख समस्याओं से भी निजात मिले। उन्होंने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की अभिकल्प नव प्रवर्तन (डीआईसी) परियोजना के तहत इस पर काम शुरू किया और उनके दिशा निर्देशन में एमटेक छात्रों ने बायोमास फायर्ड चूल्हा बनाने की तकनीक ईजाद कर ली। इस नवाचार का पेटेंट भी फाइल कर दिया गया है।
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ऐसे बना बायोमास फायर्ड चूल्हा
पंतनगर। डाॅ. तिवारी ने बताया कि इस तकनीक में उत्तराखंड के जंगलों में उपलब्ध बायोमास (पिरूल) का प्रयोग किया गया है। जिससे ऊर्जा की जरूरत के लिए लकड़ी के ईंधन पर निर्भरता खत्म होगी और जंगल की आग रोकने सहित पौधों के पुनर्जन्म में मदद मिलेगी। बताया कि लोहे की चादर (स्क्रैप) से करीब दस इंच आयताकार और 15 इंच ऊंचाई का चूल्हा डिजाइन किया गया है। जिसके बीच में करीब चार इंच आयताकार लोहे की गोल चादर का पाइप लगाकर उसे ढक्कन से बंद किया गया है। साथ ही धुआं निकलने के लिए ऊंचाई के बीच दो इंच चौड़ा और दो फीट लंबा पाइप निकाला गया है। इसकी बाहरी और अंदर की दीवार के बीच पिरूल का चूरा और सस्ते मिश्रण का प्रयोग किया है। इस चूल्हे को व्यावसायिक तौर पर बनाने में डेढ़ से दो हजार रुपये खर्च हुए। संवाद
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एलपीजी का बन सकता है विकल्प
पंतनगर। डॉ. तिवारी ने बताया कि पहले चरण में बायोमास स्टोव और दूसरे चरण में बायोमास फायर्ड चूल्हा बनाया है। तीसरे चरण में तकनीक को मॉडिफाई कर एलपीजी का विकल्प बनाने पर काम करेंगे और उन्नत चूल्हे बनाकर राज्य सरकार में प्रस्तुतिकरण के बाद रिमोट एरिया में उपलब्ध कराएंगे। यदि राज्य सरकार ने सहयोग किया तो जल्द इस तकनीक का व्यावसायीकरण कर वृहद स्तर पर बायोमास चूल्हे का निर्माण शुरू हो जाएगा। संवाद