{"_id":"6026ceb98ebc3ee8fb040cf2","slug":"farmer-angered-sitarganj-news-hld4145803191","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाव न मिलने से आहत किसान ने जोती केले की फसल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाव न मिलने से आहत किसान ने जोती केले की फसल
विज्ञापन
सितारगंज खुनसरा गांव में केले की फसल जोतता किसान।
- फोटो : SITARGANJ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सितारगंज। सरकार भले ही किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाएं चला रही हो लेकिन धरातल पर किसान योजना का लाभ लेने के बाद भी आर्थिक नुकसान उठा रहा है। ऐसा ही मामला खुनसरा गांव में सामने आया है, जहां एक किसान परिवार ने लागत भर भी भाव न मिलने पर केले की खेती को जोत दिया। इससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है।
किसान राजेश कुमार ने बताया कि जून 2019 में उद्यान विभाग की ओर से मनरेगा के तहत केले की पौध नि:शुल्क मिली थी। इस पर उन्होंने करीब 1.20 हेक्टेयर जमीन पर केले की खेती की। करीब डेढ़ साल में खेती पर आई लागत भी नहीं निकल सकी है। बताया कि विभाग ने उन्हें बुआई, निराई आदि की मजदूरी तो दी थी लेकिन जुताई, खाद और उर्वरक का खर्च उन्होंने उठाया। बताया कि खेती में अब तक करीब साढ़े तीन लाख रुपये खर्च हो चुके है।
लगातार फसल की देखभाल की भी गई। अब जब फसल तैयार हो गई तो उसे बाजार में दाम तक नहीं मिल रहे। केला दो सौ रुपये प्रति क्विंटल तक में कोई खरीदने को तैयार नहीं हुआ उचित दाम पर फसल बेचने की कोशिशों के बाद भी जब बाजार में भाव नहीं मिला तो शुक्रवार को उन्होंने खेत में खड़ी केले की फसल को ही जोत दिया।
विज्ञापन
उनका कहना था कि केले की फसल लगाकर वे कर्ज में डूब गए हैं। कहा कि सरकार को फल और सब्जी की खेती कराने से पहले विपणन की व्यवस्था करनी चाहिए। बिना विपणन के इस तरह की खेती किसान के साथ धोखा है।
किसान को केले की पौध देने के साथ ही मनरेगा से निराई और बुवाई की मजदूरी दी गई थी। किसान के फसल जोतने का मामला संज्ञान में आया है। इसको लेकर मुख्य उद्यान अधिकारी को पत्राचार किया जाएगा। - त्रिभुवन चंद्र जोशी, सचल दल प्रभारी, उद्यान विभाग सितारगंज।
विज्ञापन
किसान राजेश कुमार ने बताया कि जून 2019 में उद्यान विभाग की ओर से मनरेगा के तहत केले की पौध नि:शुल्क मिली थी। इस पर उन्होंने करीब 1.20 हेक्टेयर जमीन पर केले की खेती की। करीब डेढ़ साल में खेती पर आई लागत भी नहीं निकल सकी है। बताया कि विभाग ने उन्हें बुआई, निराई आदि की मजदूरी तो दी थी लेकिन जुताई, खाद और उर्वरक का खर्च उन्होंने उठाया। बताया कि खेती में अब तक करीब साढ़े तीन लाख रुपये खर्च हो चुके है।
विज्ञापन
लगातार फसल की देखभाल की भी गई। अब जब फसल तैयार हो गई तो उसे बाजार में दाम तक नहीं मिल रहे। केला दो सौ रुपये प्रति क्विंटल तक में कोई खरीदने को तैयार नहीं हुआ उचित दाम पर फसल बेचने की कोशिशों के बाद भी जब बाजार में भाव नहीं मिला तो शुक्रवार को उन्होंने खेत में खड़ी केले की फसल को ही जोत दिया।
विज्ञापन
उनका कहना था कि केले की फसल लगाकर वे कर्ज में डूब गए हैं। कहा कि सरकार को फल और सब्जी की खेती कराने से पहले विपणन की व्यवस्था करनी चाहिए। बिना विपणन के इस तरह की खेती किसान के साथ धोखा है।
किसान को केले की पौध देने के साथ ही मनरेगा से निराई और बुवाई की मजदूरी दी गई थी। किसान के फसल जोतने का मामला संज्ञान में आया है। इसको लेकर मुख्य उद्यान अधिकारी को पत्राचार किया जाएगा। - त्रिभुवन चंद्र जोशी, सचल दल प्रभारी, उद्यान विभाग सितारगंज।