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मनरेगा के कार्यों में खपाया जा रहा था नकली सीमेंट

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jul 2021 12:24 AM IST
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Fake cement was being consumed in MNREGA works
रुद्रपुर। गदरपुर में बंद पड़ी राइस मिल में चल रही नकली सीमेंट की फैक्टरी पकड़े जाने के बाद बड़ी बात सामने आई है। यहां बनाया जा रहा नकली सीमेंट अल्ट्रा टेक कंपनी के कट्टों में भरकर मनरेगा के कार्यों में खपाया जा रहा था। इससे एक ओर जहां सीमेंट कंपनी को नुकसान हो रहा था वहीं मनरेगा के कार्यों में नकली सीमेंट खपाने से सरकारी धन की भी बर्बादी भी हुई है। आरोपित 330 रुपये की दर से नकली सीमेंट का एक कट्टा बेचा करते थे। बहरहाल मामले का खुलासा करने वाली टीम की एसएसपी ने पीठ थपथपाते हुए ढाई हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
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शुक्रवार को पुलिस कार्यालय में एसएसपी डीएस कुंवर ने बताया कि गदरपुर में बराखेड़ा की ओर जाने वाले रास्ते पर घसिया के पास विशाल बत्रा की बंद पड़ी बत्रा राइस मिल में कुछ लोग नकली सीमेंट बनाकर उसे अल्ट्रा टेक कंपनी के कट्टों में भरकर बेचते थे। एसओजी टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से बृहस्पतिवार को राइस मिल में छापा मारकर पूरे प्रकरण का भंडाफोड़ करते हुए तीन लोगों को पकड़ा था। गोदाम से मेरठ, अलवर (राजस्थान) और कानपुर से खरीदी गई राख और रॉ मैटीरियल के नौ लाख 50 हजार रुपये के बिल बरामद हुए थे।
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पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम राकेश पाल निवासी नारायणपुर दोहरिया महतोष मोड़, प्रेमशंकर निवासी श्मशान घाट के पास बन्नाखेड़ा और मो. इस्लाम उर्फ भूरा निवासी ग्राम रसूलपुर थाना स्वार रामपुर (यूपी) बताया। आरोपियों ने बताया कि वह नकली सीमेंट बनाकर ग्राम प्रधानों को मनरेगा योजनाओं में प्रयोग के लिए 330 रुपये पर कट्टे के हिसाब से बेचते थे। इसके अलावा अन्य लोगों को भी सीमेंट बेचा जाता था।
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एसएसपी ने बताया कि मामले में राइस मिल स्वामी विशाल बत्रा की भूमिका की भी जांच की जा रही है। उनके खिलाफ पुलिस एक्ट में केस दर्ज किया जाएगा। अल्ट्रा टेक कंपनी के सीनियर मैनेजर संजय शर्मा को इसकी जांच के लिए बुला लिया गया है। आरोपियों के खिलाफ जालसाज समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। कोर्ट में पेश कर सभी को जेल भेज दिया गया है। टीम में एसओजी प्रभारी कमलेश भट्ट, एसआई सुरेंद्र प्रताप सिंह, कांस्टेबल राजेंद्र कश्यप, कुलदीप, भूपेंद्र सिंह, नीरज शुक्ला, गोकुल टम्टा और अरुणा मौजूद रहे।
अल्ट्रा टेक के मैनेजर ने की जांच
रुद्रपुर। अल्ट्रा टेक कंपनी के सीनियर मैनेजर संजय शर्मा ने शुक्रवार को गदरपुर पहुंचकर वहां बनाए जा रहे सीमेंट की जांच की। उन्होंने बताया कि इस कंपनी से उनकी कंपनी का कोई लेना देना नहीं है। उनकी कंपनी के नाम से नकली सीमेंट बेचकर उनकी प्रतिष्ठित कंपनी को बदनाम किया गया है। अल्ट्रा टेक कंपनी के मैनेजर ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। (संवाद)
राइस मिल से ये सामान हुआ बरामद
स्टाटर, रोड़ी तोड़ने वाली इलेक्ट्रिक मशीन, दो सूपड़ी, एक बाल्टी, दो फावड़े, सीमेंट के अधखुले कट्टे, सौ कट्टे खुला सीमेंट, अल्ट्रा टेक कंपनी के 290 खाली कट्टे, नकली सीमेंट भरे 175 कट्टे, 750 कट्टे रॉ मैटीरियल, 108 फटे कट्टे और 17 खाली कट्टे एसीसी सुरक्षा पावर के बरामद हुए। (संवाद)
नकली सीमेंट बनाने में जेल जा चुका है प्रेमशंकर
रुद्रपुर। आरोपी प्रेमशंकर पहले भी बाजपुर से नकली सीमेंट बनाने के मामले में जेल जा चुका है। वर्ष 2019 में वह बाजपुर में नकली सीमेंट बनाते हुए पकड़ा गया था। वहीं मो. इस्लाम यूपी में प्रतिबंधित मास तस्करी में जेल जा चुका है। पुलिस तीसरे आरोपी का आपराधिक इतिहास भी खंगाल रही है। (संवाद)
स्वार रामपुर तक हुई है सीमेंट की सप्लाई
रुद्रपुर। अच्छी क्वालिटी का सीमेंट कम दाम में देने का लालच देकर आरोपी लोगों को अपने झांसे में लेते थे। अल्ट्रा टेक कंपनी का सीमेंट होने पर लोगों को ज्यादा सोचना नहीं पड़ता था। आरोपियों ने सीमेंट को जिले के अलग-अलग इलाकों के साथ ही स्वार रामपुर (यूपी) तक सप्लाई किया। एसओजी प्रभारी कमलेश भट्ट ने बताया कि आरोपी दोराहा, बाजपुर, बन्नाखेड़ा, गदरपुर, स्वार और कनौरा में सीमेंट का एक कट्टा 350 रुपये तक में बेचते थे। यही सीमेंट ग्राम प्रधानों को मनरेगा के काम के लिए 330 रुपये में बेचा जाता था। (संवाद)
...तो टिक पाएंगे नकली सीमेंट से हुए निर्माण कार्य
रुद्रपुर। नकली सीमेंट का प्रयोग सबसे अधिक गदरपुर, बाजपुर और रुद्रपुर के ग्राम प्रधानों ने मनरेगा के निर्माण कार्यों के लिए किया है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि नकली सीमेंट से बनाई गई ये विकास कार्य आखिर कितने समय तक टिक पाते हैं।
एसओजी कर्मियों के अनुसार गदरपुर के बत्रा राइस मिल के स्वामी विशाल बत्रा ने गोदाम वर्ष 2017 में अपने मुंशी के कहने पर राजेश पाल नाम के एक व्यक्ति को किराये पर दिया था। राइस मिल को विशाल बत्रा ने अपने पिता के निधन के बाद बंद कर दिया था। किराये के रुपये उसे समय से मिल जाते थे इसलिए उन्हें कभी गोदाम तक जाने की जरूरत भी नहीं पड़ी। लेकिन आरोपियों का सत्यापन कराना न तो राइस मिल कारोबारी ने जरूरी समझा और न ही पुलिस ने।
मार्च 2021 से राकेश पाल, प्रेमशंकर और मो. इस्लाम ने नकली सीमेंट बनाकर बेचना शुरू कर दिया था। चार माह में ये लोग 30 लाख रुपये का नकली सीमेंट बनाकर बेच चुके हैं। नकली सीमेंट की सबसे अधिक खरीदारी ग्राम प्रधानों ने मनरेगा कार्यों के लिए की। नकली सीमेंट से हुए निर्माण कार्यों से गुणवत्ता जल्द सबके सामने आ जाएगी।
राजेश पाल है मास्टरमाइंड
रुद्रपुर। नकली सीमेंट की फैक्ट्री चलाने का मास्टरमाइंड राजेश पाल निवासी नारायणपुर दोहरिया महतोष मोड़ गदरपुर है। उसने बाजपुर के प्रेमशंकर से संपर्क कर यह कारोबार शुरू किया। प्रेमशंकर को पहले से ही नकली सीमेंट तैयार करने के बारे में पता था। इसके बाद मो. इस्लाम के साथ मिलकर इन लोगों ने फैक्टरी शुरू कर दी। (संवाद)

आरोपियों पर लगेगा गैंगस्टर
रुद्रपुर। एसएसपी डीएस कुंवर ने बताया कि नकली सीमेंट बनाने का मामला बेहद गंभीर है। नकली सीमेंट का प्रयोग करने से कई लोगों को नुकसान झेलना पड़ सकता है। साथ ही सरकार की योजनाओं को भी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले की जांच गदरपुर थाना प्रभारी सतीश कापड़ी को सौंपी गई है। (संवाद)
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