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Udham Singh Nagar News: बेडू-काफल समेत स्थानीय फलों का आकार बढ़ाने पर जोर
Tue, 10 Feb 2026 01:16 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 10 Feb 2026 01:16 AM IST
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पंतनगर। जीबी पंत कृषि व प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आईसीएआर की ओर से संचालित ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटर रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन फ्रूट्स की 13वीं समूह चर्चा का उद्घाटन हुआ। इसमें देशभर के 19 आईसीएआर संस्थानों और 22 राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक, प्रतिनिधि और छह राज्यों के प्रगतिशील किसानों सहित विभिन्न फलों के परियोजना समन्वयक प्रतिभाग कर रहे हैं।
डाॅ. रतन सिंह सभागार में आयोजित उद्घाटन समारोह में कुलपति डाॅ. मनमोहन सिंह चौहान ने शोध परिणामों के प्रभावी प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि शोध का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने मांग-आधारित शोध, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और कृषि को उद्योग के रूप में विकसित करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने उत्तराखंड के बेडू व काफल फलों को उन्नत किए जाने का सुझाव दिया ताकि उनके आकार और वजन में वृद्धि हो। साथ ही अन्य स्थानीय फलों को भी शोध के माध्यम से उन्नत किए जाने का सुझाव दिया।
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उन्होंने उद्यान अनुसंधान केंद्र पत्थरचट्टा में ड्रैगन फ्रूट, अंगूर, एवाकाडो आदि के रोपण पर भी प्रकाश डाला। साथ ही स्थानीय प्रजातियों को एनबीपीजीएआर में पंजीकृत कराने का सुझाव दिया। उन्होंने फलों में तुड़ाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और उनकी सेल्फ लाइफ (समय अवधि) बढ़ाने के लिए शोध करने पर बल दिया।
एक्रिप के परियोजना समन्वयक (फल) डाॅ. प्रकाश पाटिल ने देश के 49 केंद्रों पर विभिन्न फलों पर किए जा रहे शोध और भविष्य की चुनौतियों के बीच रणनीति बनाकर फलों की पैदावार में वृद्धि व गुणवत्ता के लिए सुझाव दिया।
अधिष्ठाता कृषि डाॅ. सुभाष चंद्र ने भी अपने विचार रखे। इससे पूर्व निदेशक शोध डाॅ. एसके वर्मा ने स्वागत करते हुए विवि की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। संयुक्त निदेशक उद्यान डाॅ. एके सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान आईसीएआर के प्रतिनिधि और पूर्व कुलपति एमपीयूएटी उदयपुर, यूयूएचएफ, व भरसार डाॅ. एके कर्नाटक, अधिष्ठाता, निदेशक आदि मौजूद थे।
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फलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए हो शोध
आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (फल व बागवानी) डाॅ. वीबी पटेल ने वर्चुअल संबोधित करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के दृष्टिगत हमें विभिन्न फलों में शोध को आगे बढ़ाना है। हमें अच्छी गुणवत्ता व पोषक फलों की नई किस्मों को विकसित करना है। कहा कि कीवी एक महत्वपूर्ण फल है। जिसकी औसत उत्पादकता भारत में 2-3 मीट्रिक टन प्रति हेक्टे., जबकि न्यूजीलैंड में 38-40 मीट्रिक टन है। उन्होंने फल प्रजातियों को पौध संरक्षण प्रजाति एवं कृषक संरक्षण प्राधिकरण में पंजीकृत करने का सुझाव दिया।
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रोग व कीट प्रतिरोधी किस्मों के विकास पर जोर
निदेशक आईसीएआर-सीसीआरआई नागपुर डाॅ. दिलीप घोष ने भी बदलते मौसम के चलते नए रोग एवं कीट प्रतिरोधी किस्मों के विकास पर बल दिया। उन्होंने नींबू में किए जा रहे शोध एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए एक्रिप केंद्रों पर थ्री-पी मॉडल अपनाने का सुझाव दिया।
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प्रौद्योगिकी टोकरी के विमोचन सहित किसान सम्मानित
समारोह में आम, अमरूद व लीची की उत्पादन वृद्धि के लिए प्रौद्योगिकी टोकरी नामक प्रकाशन का विमोचन किया गया। साथ ही छह राज्यों से आए प्रगतिशील किसानों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।
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डाॅ. रतन सिंह सभागार में आयोजित उद्घाटन समारोह में कुलपति डाॅ. मनमोहन सिंह चौहान ने शोध परिणामों के प्रभावी प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि शोध का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए।
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उन्होंने मांग-आधारित शोध, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और कृषि को उद्योग के रूप में विकसित करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने उत्तराखंड के बेडू व काफल फलों को उन्नत किए जाने का सुझाव दिया ताकि उनके आकार और वजन में वृद्धि हो। साथ ही अन्य स्थानीय फलों को भी शोध के माध्यम से उन्नत किए जाने का सुझाव दिया।
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उन्होंने उद्यान अनुसंधान केंद्र पत्थरचट्टा में ड्रैगन फ्रूट, अंगूर, एवाकाडो आदि के रोपण पर भी प्रकाश डाला। साथ ही स्थानीय प्रजातियों को एनबीपीजीएआर में पंजीकृत कराने का सुझाव दिया। उन्होंने फलों में तुड़ाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और उनकी सेल्फ लाइफ (समय अवधि) बढ़ाने के लिए शोध करने पर बल दिया।
एक्रिप के परियोजना समन्वयक (फल) डाॅ. प्रकाश पाटिल ने देश के 49 केंद्रों पर विभिन्न फलों पर किए जा रहे शोध और भविष्य की चुनौतियों के बीच रणनीति बनाकर फलों की पैदावार में वृद्धि व गुणवत्ता के लिए सुझाव दिया।
अधिष्ठाता कृषि डाॅ. सुभाष चंद्र ने भी अपने विचार रखे। इससे पूर्व निदेशक शोध डाॅ. एसके वर्मा ने स्वागत करते हुए विवि की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। संयुक्त निदेशक उद्यान डाॅ. एके सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान आईसीएआर के प्रतिनिधि और पूर्व कुलपति एमपीयूएटी उदयपुर, यूयूएचएफ, व भरसार डाॅ. एके कर्नाटक, अधिष्ठाता, निदेशक आदि मौजूद थे।
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फलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए हो शोध
आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (फल व बागवानी) डाॅ. वीबी पटेल ने वर्चुअल संबोधित करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के दृष्टिगत हमें विभिन्न फलों में शोध को आगे बढ़ाना है। हमें अच्छी गुणवत्ता व पोषक फलों की नई किस्मों को विकसित करना है। कहा कि कीवी एक महत्वपूर्ण फल है। जिसकी औसत उत्पादकता भारत में 2-3 मीट्रिक टन प्रति हेक्टे., जबकि न्यूजीलैंड में 38-40 मीट्रिक टन है। उन्होंने फल प्रजातियों को पौध संरक्षण प्रजाति एवं कृषक संरक्षण प्राधिकरण में पंजीकृत करने का सुझाव दिया।
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रोग व कीट प्रतिरोधी किस्मों के विकास पर जोर
निदेशक आईसीएआर-सीसीआरआई नागपुर डाॅ. दिलीप घोष ने भी बदलते मौसम के चलते नए रोग एवं कीट प्रतिरोधी किस्मों के विकास पर बल दिया। उन्होंने नींबू में किए जा रहे शोध एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए एक्रिप केंद्रों पर थ्री-पी मॉडल अपनाने का सुझाव दिया।
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प्रौद्योगिकी टोकरी के विमोचन सहित किसान सम्मानित
समारोह में आम, अमरूद व लीची की उत्पादन वृद्धि के लिए प्रौद्योगिकी टोकरी नामक प्रकाशन का विमोचन किया गया। साथ ही छह राज्यों से आए प्रगतिशील किसानों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।