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मटियाई गांव में किसानों का धरना-प्रदर्शन
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सितारगंज के मटियाई गांव में धरना देते अखिल भारतीय किसान सभा के किसान।
- फोटो : SITARGANJ
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सितारगंज। पांच सूत्री मांगों को लेकर चल रहे अखिल भारतीय किसान सभा के आंदोलन ने तेजी पकड़ ली है। किसानों ने मटियाई गांव में धरना-प्रदर्शन कर किसान विरोधी अध्यादेश वापस लो, वापस लो के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
शुक्रवार को अध्यक्ष जगमीत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित धरने के दौरान हुई सभा में जिलाध्यक्ष त्रिलोचन सिंह ने कहा कि मोदी सरकार में देश की अर्थ व्यवस्था ठप है। कर्ज में डूबा किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। है। यहां तक कि एमपी में तो किसानों को गोली भी मारी गई जबकि भारत की अर्थव्यवस्था में किसानों की बड़ी भूमिका होती है। कोरोना काल में भी किसानों ने देश के लोगों की मदद की लेकिन सरकार उनके विरोध में अध्यादेश लाकर शोषण कर रही है।
किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार से किसान विरोधी अध्यादेश वापस लेकर व्यापारियों की ओर से किसानों के उत्पाद की लूटपाट बंद करने, किसानों को कर्जमुक्त करने, मनरेगा के तहत मजदूरों को सौ के बजाय दो सौ दिन मजदूरी देने और दैनिक मजदूरी छह सौ रुपये करने, युवाओं को रोजगार देने एवं सरकारी उपक्रमों का निजीकरण बंद करने की मांग की। वहां जिला उपाध्यक्ष लोहर सिंह, मुख्त्यार सिंह, खड़क सिंह, इंदर सिंह, बद्दल देवी, दीपमाला राना, सरोजा देवी, सिलोचना देवी, सत्यवती, लता राना, शांति देवी, सुभाष वती, प्रवेश सिंह, लक्ष्मण सिंह, भगवान सिंह, जसवीर सिंह, मीना देवी, मनखुशी सिंह आदि थे।
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शुक्रवार को अध्यक्ष जगमीत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित धरने के दौरान हुई सभा में जिलाध्यक्ष त्रिलोचन सिंह ने कहा कि मोदी सरकार में देश की अर्थ व्यवस्था ठप है। कर्ज में डूबा किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। है। यहां तक कि एमपी में तो किसानों को गोली भी मारी गई जबकि भारत की अर्थव्यवस्था में किसानों की बड़ी भूमिका होती है। कोरोना काल में भी किसानों ने देश के लोगों की मदद की लेकिन सरकार उनके विरोध में अध्यादेश लाकर शोषण कर रही है।
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किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार से किसान विरोधी अध्यादेश वापस लेकर व्यापारियों की ओर से किसानों के उत्पाद की लूटपाट बंद करने, किसानों को कर्जमुक्त करने, मनरेगा के तहत मजदूरों को सौ के बजाय दो सौ दिन मजदूरी देने और दैनिक मजदूरी छह सौ रुपये करने, युवाओं को रोजगार देने एवं सरकारी उपक्रमों का निजीकरण बंद करने की मांग की। वहां जिला उपाध्यक्ष लोहर सिंह, मुख्त्यार सिंह, खड़क सिंह, इंदर सिंह, बद्दल देवी, दीपमाला राना, सरोजा देवी, सिलोचना देवी, सत्यवती, लता राना, शांति देवी, सुभाष वती, प्रवेश सिंह, लक्ष्मण सिंह, भगवान सिंह, जसवीर सिंह, मीना देवी, मनखुशी सिंह आदि थे।
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