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अमीर और गरीब के बीच रिश्ता कायम करती है जकात

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 24 Apr 2022 12:45 AM IST
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Cultural programme.
मौलाना शुएब अत्तारी। - फोटो : KASHIPUR
जसपुर। मुबल्लिग दावत-ए-इस्लामी मौलाना शुएब अत्तारी ने मस्जिद फैजाने रमजान में जकात की फजीलत बताई और उसकी अदायगी की जानकारी दी। कहा कि जकात एक ऐसा स्तंभ है जो अमीर और गरीब के बीच रिश्ता कायम करता है।
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जकात एक समाजवादी व्यवस्था है। जकात निकालते समय अपने गरीब रिश्तेदार या पड़ोसी को तरजीह देनी चाहिए। ताकि आपके आस पास भी ईद की खुशियां नजर आएं। किसी गरीब का कर्ज उतारने में जकात का अहम रोल हो सकता है।
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जकात के जरिये कई लाइलाज बीमारियों से परेशान लोगों की मदद भी की जा सकती है। जकात की रकम फिजूलखर्ची में जाया न हो। यह भी एहतियात रखें कि सामान खुद लेकर जकात हासिल करने वाले के हाथ में दें। जकात तब तक पूरी नही मानी जाएगी जब तक आप जकात देने वाले के हाथ में देकर उसे मालिक न बना दें।
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हैसियतदार लोगों पर वाजिब है जकात
जसपुर। मौलाना शुएब ने बताया कि कुरआन के मुताबिक जिस शख्स के पास 656 ग्राम 250 मिलीग्राम चांदी या 93 ग्राम 750 मिलीग्राम सोना या इन दोनों में किसी एक बराबर नकद रुपये या तिजारत का सामान है, इस माल पर चांद की तारीख के हिसाब से एक साल गुजर गया हो, उस शख्स पर ढाई फीसदी जकात वाजिब है। जकात पर साल गुजरना शर्त है, जबकि फितरे पर साल गुजरना शर्त नहीं है। जकात बालिग और आकिल मुसलमान पर फर्ज है, जबकि फितरा बच्चों की तरफ से अदा किया जा सकता है।
इबादत में मददगार बन रहे मोबाइल एप
जसपुर। आधुनिक दौर में मोबाइल भी इबादत में मददगार साबित हो रहा है। मोबाइल एप के जरिये रोजेदार रमजान की जानकारी हासिल कर सकते हैं। जैसे-जैसे युवाओं में एनड्रायड मोबाइल का चलन बढ़ा तो मोबाइल कंपनियों ने जरूरत के मुताबिक एप उपलब्ध कराने शुरू कर दिए।
रमजान की इबादत के ताल्लुक से मोबाइल में कई खास एप्लीकेशन मौजूद हैं। एप्लीकेशन में अजान और नमाज का समय भी है। इसके अलावा इस्लामिक कैलेंडर, अल्लाह के 99 नाम, किबला कंपास, हिजरी डेट कंवर्टर, अजान अलार्म, इस्लाम-360, रमजान 2020 आदि शामिल हैं।
इतना ही नही लजीज पकवान खाने-खिलाने के उद्देश्य से रेसीपी एप भी उपलब्ध हैं। इनमें रूजान रेसीपीज, रमजान अफतार रेसीपीज, रेसीपीज फॉर रमजान इन अरेबिक, स्पेशल रमजान डिश और अफतारी मेकर आदि शामिल हैं। इन एप्स को प्ले स्टोर से डाउलोड किया जा सकता है जो इन दिनों रोजेदरों को बेहद पसंद आ रहे हैं।
शुएब आलम, इबादुरर्हमान, नाजिम लारा, मो.इकराम ने बताया कि इन एप्लीकेशन में रमजान कैलेंडर के अलावा सहरी और इफ्तार की दुआ के साथ ही रमजान की कई अन्य दुआएं भी शामिल हैं जिन्हे कोई भी व्यक्ति अपने एनड्रायड मोबाइल के जरिये आसानी से डाउनलोड कर सकता है।
मोबाइल एप के जरिये जरूरी दुआओं के साथ कुरआन की तिलावत आसानी से हो जाती है। एप्स से कुरआन तथा दुआओं की किताब साथ नही रखनी पड़ती है। दौरान-ए-सफर भी इसे आसानी से पढ़ा जा सकता है।

- नौशाद सम्राट, रोजेदार
कई ऐसी जगह हैं जहां धार्मिक किताबें और कुरआन साथ में नहीं होता है। कब्रिस्तान, मजार तथा दीन की तब्लीग आदि के लिए एप मददगार साबित हो रहे हैं जो अरबी, उर्दू के साथ हिंदी में भी उपलब्ध हैं।
मौ.नाजिम, रोजेदार
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