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काशीपुर में 21 साल पहले हुई थी गणेश उत्सव की शुरुआत
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साल 2002 में गणेश उत्सव के दौरान पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।
- फोटो : KASHIPUR
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इन दिनों चारों ओर गणेश उत्सव की धूम है। नगर में अब 18 से ज्यादा जगहों पर गणेश उत्सव मनाया जाता है। इसी के साथ साल 2000 में पहली बार हुए गणेश उत्सव का किस्सा भी चर्चा में है। नगर में पहला गणेश उत्सव साल 2000 में लाहोरियान मोहल्ले के बलकेश्वर महादेव मंदिर में मनाया गया था। इसके बाद उत्सव परंपरा बन गया।
काशीपुर में गणेश उत्सव मनाने की परंपरा साल 2000 में पहली बार शुरू हुई। नगर के मोहल्ला कानूनगोयान निवासी मुंशी रामनाथ मानव ने स्वर्गीय रमेश चंद्र शर्मा उर्फ खुट्टू मास्टर के सहयोग से इस उत्सव की नींव रखी थी। पहला उत्सव गणेश चतुर्थी पर एक दिन का मोहल्ला लाहौरियान स्थित बलकेश्वर महादेव मंदिर में मनाया गया था। मानव ने गणेश उत्सव की शुरुआत गणेश कथा से की थी। धीरे-धीरे इस उत्सव का चलन बढ़ता गया।
श्रद्धालुओं ने एक के बाद एक 18 से ज्यादा जगहों पर गणेश उत्सव मनाने की परंपरा शुरू की। इन दिनों क्षेत्र में गणेश उत्सव की काफी धूम है। ऐसे में दोबारा से रामनाथ मानव और रमेश चंद्र शर्मा का नाम चर्चा में है। उनके भतीजे मुकुल मानव बताते हैं कि स्वर्गीय रामनाथ मानव का अपने जीवन काल में भगवान गणेश के प्रति गहरा लगाव रहा। शायद यही वजह थी कि उनकी मृत्यु भी सात साल पहले गणेश चतुर्थी के दिन हुई। मुकुल बताते हैं कि गणेश उत्सव तीन से लेकर 11 दिन तक का होता है। अंतिम दौर का गणेश मूर्ति विसर्जन रविवार को होगा।
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काशीपुर में गणेश उत्सव मनाने की परंपरा साल 2000 में पहली बार शुरू हुई। नगर के मोहल्ला कानूनगोयान निवासी मुंशी रामनाथ मानव ने स्वर्गीय रमेश चंद्र शर्मा उर्फ खुट्टू मास्टर के सहयोग से इस उत्सव की नींव रखी थी। पहला उत्सव गणेश चतुर्थी पर एक दिन का मोहल्ला लाहौरियान स्थित बलकेश्वर महादेव मंदिर में मनाया गया था। मानव ने गणेश उत्सव की शुरुआत गणेश कथा से की थी। धीरे-धीरे इस उत्सव का चलन बढ़ता गया।
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श्रद्धालुओं ने एक के बाद एक 18 से ज्यादा जगहों पर गणेश उत्सव मनाने की परंपरा शुरू की। इन दिनों क्षेत्र में गणेश उत्सव की काफी धूम है। ऐसे में दोबारा से रामनाथ मानव और रमेश चंद्र शर्मा का नाम चर्चा में है। उनके भतीजे मुकुल मानव बताते हैं कि स्वर्गीय रामनाथ मानव का अपने जीवन काल में भगवान गणेश के प्रति गहरा लगाव रहा। शायद यही वजह थी कि उनकी मृत्यु भी सात साल पहले गणेश चतुर्थी के दिन हुई। मुकुल बताते हैं कि गणेश उत्सव तीन से लेकर 11 दिन तक का होता है। अंतिम दौर का गणेश मूर्ति विसर्जन रविवार को होगा।
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