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Udham Singh Nagar News: मिट्टी की उर्वरा के लिए करें दलहनी फसलों की अधिक खेती
Sat, 06 Dec 2025 01:23 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 06 Dec 2025 01:23 AM IST
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काशीपुर। ग्राम फिरोजपुर में विश्व मृदा दिवस पर कृषि विभाग की ओर से कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्डाें का वितरण करते हुए उसके उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। मिट्टी की गुणवक्ता के लिए गोबर की सड़ी खाद के अधिक प्रयोग की सलाह दी गई।
कार्यक्रम में कृषि व भूमि संरक्षण अधिकारी डॉ. कल्याण सिंह ने मिट्टी के महत्व, उसके संरक्षण की आवश्यकता और स्वास्थ्य मृदा के लाभाें से अवगत कराया। साथ ही मृदा की देखभाल, माप, निगरानी, प्रबंधन जैसे बिंदुओं के बारे में कृषकों को जानकारी दी। इसके अलावा बढ़ती जनसंख्या और प्रदूषण से होने वाले भू-क्षरण को रोकने और टिकाऊ खेती के विषय पर भी चर्चा की।
किसानों को मृदा स्वास्थ्य को बहाल करने के लिए गैर रासायनिक तरीकों के बारे में जानकारी दी। गैर वैज्ञानिक रूप से रासायनिक खादों का प्रयोग करने पर मृदा की संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है जिससे मिट्टी की उर्वरा क्षमता कम हुई है।
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इसकी रोकथाम के लिए अधिक मात्रा में दलहनी फसलों की खेती करनी चाहिए। इसके अलावा गोबर की सड़ी खाद के अत्यधिक प्रयोग करने और हरी खाद के रूप में ढैंचा फसल की जानकारी दी।
किसानों को ग्रीष्मकालीन धान के विकल्प के रूप में अन्य फसलों जैसे संकर मक्का, मूंग व गन्ने की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस मौके पर विकास खंड प्रभारी कृषि अखिलेश चंद्रा, न्याय पंचायत प्रभारी कुंडेश्वरी नरेश कुमार, सुमित चौधरी आदि शामिल रहे।
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कार्यक्रम में कृषि व भूमि संरक्षण अधिकारी डॉ. कल्याण सिंह ने मिट्टी के महत्व, उसके संरक्षण की आवश्यकता और स्वास्थ्य मृदा के लाभाें से अवगत कराया। साथ ही मृदा की देखभाल, माप, निगरानी, प्रबंधन जैसे बिंदुओं के बारे में कृषकों को जानकारी दी। इसके अलावा बढ़ती जनसंख्या और प्रदूषण से होने वाले भू-क्षरण को रोकने और टिकाऊ खेती के विषय पर भी चर्चा की।
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किसानों को मृदा स्वास्थ्य को बहाल करने के लिए गैर रासायनिक तरीकों के बारे में जानकारी दी। गैर वैज्ञानिक रूप से रासायनिक खादों का प्रयोग करने पर मृदा की संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है जिससे मिट्टी की उर्वरा क्षमता कम हुई है।
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इसकी रोकथाम के लिए अधिक मात्रा में दलहनी फसलों की खेती करनी चाहिए। इसके अलावा गोबर की सड़ी खाद के अत्यधिक प्रयोग करने और हरी खाद के रूप में ढैंचा फसल की जानकारी दी।
किसानों को ग्रीष्मकालीन धान के विकल्प के रूप में अन्य फसलों जैसे संकर मक्का, मूंग व गन्ने की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस मौके पर विकास खंड प्रभारी कृषि अखिलेश चंद्रा, न्याय पंचायत प्रभारी कुंडेश्वरी नरेश कुमार, सुमित चौधरी आदि शामिल रहे।