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सकुशल लौटा अपहृत छात्र, अपहरणकर्ता चिन्हित
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Sun, 06 Nov 2016 11:58 PM IST
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एसएसपी
- फोटो : अमर उजाला
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राइस मिलर का अपहृत बेटा 52 घंटे बाद सकुशल लौट आया है। पुलिस चिन्हित बदमाशों के घरों में दबिश देने के दबाव में छात्र का सकुशल छोड़ने का दावा कर रही है। पुलिस ने जांच का हवाला देते हुए अपहरण में लिप्त बदमाशों की जानकारी देने से परहेज कर रही है। बच्चे की सकुशल वापसी से परिजन के साथ ही पुलिस ने भी राहत की सांस ली है।
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बीते 4 नवंबर की शाम कुंडा थाना क्षेत्र के ग्राम हल्दुआ साहू निवासी राइस मिलर जगदीश कुमार का बेटे आर्यन अरोरा (14) बाइक से हल्दुआ चौराहा गया था। इसके बाद अज्ञात लोगों ने आर्यन का बाइक सहित अपहरण कर उसके ही फोन से पिता जगदीश से 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। फिरौती की रकम नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी थी। पिता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मुुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस की टीमें आर्यन की बरामदगी की जुटी थी।
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मामला हाइप्रोफाइल होने की वजह से दो एएसपी सहित पुलिस की 20 टीमों ने बिजनौर, मुरादाबाद के अलग-अलग क्षेत्रों में दबिश दी थी। रविवार शाम करीब 8 बजे आर्यन ने बहन को फोन कर अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटने की बात बताई। इसके बाद पुुलिस ने आर्यन को बाइक के साथ हरियावाला चौक के समीप से बरामद कर लिया। देर रात मंडी गेस्ट हाउस में पत्रकार वार्ता में डीआईजी अजय रौतेला ने बताया कि सर्विलांस और मैनुवल इंटेलीजेंस की मदद से अपहृत छात्र की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे थे।
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छानबीन में संदेह के दायरे में आए बिजनौर और मुरादाबाद में कुछ लोगों के घरों में दबिश दी गई थी। लगातार दबिश के दबाव में ही आर्यन को हरियावाला चौक पर छोड़ा गया है। उन्होंने आरोपियों को किसी तरह की फिरौती की रकम देने से इनकार किया। बरामद बच्चा परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया है। लेकिन बच्चे को वे सामने नहीं ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि जांच में अपहरण करने वाले बदमाश चिन्हित हो चुके हैं। जल्द ही वे पुलिस की गिरफ्त में होंगे। इस मौके पर एसएसपी सैंथिल अबुदई, एएसपी कमलेश उपाध्याय, पंकज भट्ट, टीडी वैला सहित अन्य मौजूद रहे।
टीम को 51 हजार का पुरस्कार देने की घोषणा
बेटे की सकुशल बरामदगी से पिता जगदीश गदगद नजर आए। उन्होंने कहा कि वे खुलासे से पूरी तरह से संतुष्ट हैं। उन्होंने खुलासा करने वाली टीम को 51 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की। डीआईजी अजय रौतेला ने टीम को 5 हजार और एसएसपी सैंथिल अबुदई ने ढाई हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की।
फिरौती के लिए अपहरणकर्ताकर्ता बना रहे थे भावनात्मक दबाव
आर्यन का अपहरण करने वाले बदमाशों को जब दिए गए समय पर फिरौती की रकम नहीं मिली तो वे बेचैन हो गए। उन्होंने डराने का पैंतरा बदलते हुए परिजनों पर भावनात्मक दबाव बनाना शुरु कर दिया। उन्होंने आर्यन की बहन और परिवारवालों को समझाया कि पिता को समझाकर रुपये दे दो और भैय्या को घर ले जाओ।
आर्यन के पिता डा.जगदीश ने बताया कि बदमाश उन्हें फिरौती देने के बहाने बुलवाकर शनिवार की रात भर चक्कर कटवाते रहे। रविवार की सुबह आर्यन की उसकी बहन और मां से बात कराई। यह तक कहा कि क्या तुम नहीं चाहते, तुम्हारा भाई घर लौट आए। आपके पिता रुपये खर्च नहीं करना चाहते।
उन्हें जसपुर रोड पर बुलाकर कहा कि अकेले रुपया लेकर आना और रुपया देने के एक घंटे बाद लड़के को छोड़ देंगे। लेकिन इतने रुपये लेकर उन्होंने अकेले आने से मना कर दिया। तब बदमाशों ने उसे चेरीवाली रोड बुलाया। वह वहा गया तो उसे बादीगढ़ रोड पर बुलाया। एक बार उससे पूछा कि तुम्हारी गाड़ी में पीछे कौन बैठा है। उसके यह कहने पर कि केवल मुंशी है। इस प्रकार वे उल्टे सीधे सवाल पूछकर घुमाते रहे। आज शाम अचानक आर्यन को हरियावाला के पास छोड़ दिया और उसकी बाइक देकर उसे घर जाने के लिए कह दिया।
एसएसआई को बनाया गया मुंशी
पुलिस ने बदमाशों को उसके ही जाल में फांसने की कोशिश की। आर्यन के पिता के साथ बाजपुर एसएसआई कमलेश भट्ट को मुंशी बनाकर भेजा गया था। फिरौती में देने के लिए बैगों में भर कर जो नोट रखे गए थे, उनमें नोटों के बराबर कागज की गड्डियां थी। गड्डियों के बाहर से असली नोट लपेटे गए थे।
बच्चे को नहीं किया प्रताड़ित
अपहरणकर्ताओं ने जब आर्यन को छोड़ा तो वहा बाइक चलाता हुआ घर ही ओर चलता बना। 48 घंटे तक अपहरणकर्ताओं के चंगुल में रहने के बाद भी आर्यन का का सहज रहना लोगों की समझ से परे है।
पुलिस किशोर को सामने क्यों नहीं लाई
पुलिस ने पूरी टीमों को मीडिया के सामने खड़ा कर बरामदगी के प्रयास में पूरी ताकत झोंकने की बात कही। लेकिन पुलिस बरामद किशोर को सामने लाने से बचती रही। खुलासे के दौरान जब डीआईजी से बच्चे को सामने लाने को कहा तो उन्होंने इंका कर दिया। कहा कि बच्चा भी सामने नहीं लाया जा सकता है। लेकिन जानकारों के मुताबिक बच्चा नार्मल था।