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11 सालों से पांच माओवादियों की तस्दीक बनी है फांस
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर।
Updated Wed, 06 Jun 2018 12:42 AM IST
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11 साल पहले नानकमत्ता के हसपुर खत्ता में माओवादी शिविर को लेकर नामजद 22 आरोपियों में से पुलिस 17 को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। लेकिन, पांच आरोपियों की कोड नेम की वजह से पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार दो माओवादियों को कस्टडी रिमांड में लेने के बाद कोड नेम के बारे में सुराग मिल सकता है। इधर गिरफ्तारी के बाद चार और कोड नेम सामने आने से पुलिस को पहचान करने की चुनौती बढ़ गई है।
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दरअसल, हसपुर खत्ते में माओवादी गतिविधियों को लेकर 20 दिसंबर 2007 को नानकमत्ता थाने में तत्कालीन एसओटीएफ प्रभारी बीएल मधवाल ने 22 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इनमें से पुलिस 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। ज्यादातर लोग जमानत पर रिहा हो चुके हैं। इनमें से कुछ नामजदों के खिलाफ दूसरे थानों में भी माओवाद को लेकर मुकदमे दर्ज हुए थे।
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रविवार को पुलिस के हत्थे चढ़े दो माओवादियों में से एक रमेश उर्फ मनीष उर्फ भट्ट भी नामजद मुकदमे में शामिल था। मुकदमे में वांछित पांच आरोपी चंदन मास्टर उर्फ शेखर राम, कमल दा, ज्योति, रुचि, मोहन उर्फ दीपू टम्टा की पुलिस तस्दीक तक नहीं कर सकी है। चूंकि मुकदमे में नामजद कोड नेम मनीष के ही रमेश होने की जानकारी पुलिस को देवेंद्र चमियाल से मिली थी।
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अब पुलिस को उक्त पांच लोगों के वास्तविक नाम की जानकारी गिरफ्तार रमेश और अरविंद से मिलने की उम्मीद है। हालांकि पुलिस के अब और चुनौती बढ़ चुकी है। दोनों ने संध्या सहित चार और कोड नेम पुलिस को बताए हैं। पुलिस के समक्ष नौ कोड नेम के वास्तविक लोगों तक पहुंचना टेढ़ी खीर से कम नहीं है।