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काउंटर साइन कराने के नाम पर टहला रहे डाक्टर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Fri, 12 Aug 2016 12:13 AM IST
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प्रमाण्ा पत्र
- फोटो : अमर उजाला
रुद्रपुर का जिला अस्पताल इतना बेलगाम हो चुका है कि उस पर स्वास्थ्य विभाग के ही आला अधिकारियों का ही नियंत्रण नहीं रहा। आलम यह है कि जिला अस्पताल में चारों तरफ गोलमाल ही गोलमाल है। जहां मेडिकल बनाने में लेनदेन का खेल चल रहा है वहीं अब प्रमाण पत्रों पर काउंटर साइन कराने आ रहे लोगों को डाक्टर टहला रहे हैं। लोगों के अनुसार डाक्टर प्रमाण पत्र देखे बिना दूसरे कर्मचारी के पास जाने को कह देते हैं। वहीं अगर अस्पताल कर्मी को कुछ सुविधा शुल्क थमा दिया जाता है तो दस मिनट में प्रमाण पत्र पर काउंटर साइन हो जाते हैं। यह खेल डाक्टर कर्मचारियों को आगे करके करते हैं।
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जिला अस्पताल में रोजाना प्रमाण पत्रों पर सीएमओ और अस्पताल प्रमुख अधीक्षक के हस्ताक्षर कराने कई लोग आते हैं, जिनमें काफी संख्या में प्रमाण पत्र सत्यापन कराने वाले होते हैं। सितारगंज से आए महिंद्र मैसी ने बताया कि वह चार दिन से लगातार दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने और काउंटर साइन कराने के लिए जिला अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन डाक्टर बिना कोई स्पष्टीकरण दिए अस्पताल के दूसरे डाक्टर के पास भेज देते हैं। वहां जाने पर डाक्टर काम करने में टालमटोल करता है। महिंद्र ने बताया कि दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद डाक्टर उनको अस्पताल के चक्कर कटवा रहे हैं।
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वहीं शहर निवासी रीता देवी ने बताया कि वह अपने पति और दिव्यांग बेटे के साथ प्रमाण पत्र सत्यापित कराने के लिए जिला अस्पताल के चक्कर काट रही है, लेकिन डाक्टर द्वारा भ्रमित करने से उनके प्रमाण पत्र पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। टनकपुर निवासी परमजीत सिंह ने बताया कि पिछले दस दिन से वह टनकपुर से अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। डाक्टर के अस्पताल में नहीं मिलने और अन्य कर्मचारियों द्वारा कोई जानकारी नहीं देने से उनका किराया और समय दोनों बरबाद हो रहा है। वहीं अभी तक उनके प्रमाण पत्र का कार्य अधर में लटका हुआ है।
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सीएमओ अपना पल्ला दूसरे पर झाड़ देते हैं
जिला अस्पताल में व्याप्त खामियों के बारे में जब सीएमओ डा. एचके जोशी से बात करनी होती है तो पहले वे मोबाइल रिसीव नहीं करते, अगर फोन रिसीव भी हो जाए तो वह सीधे कह देते हैं कि इसमें मेरी जिम्मेदारी नहीं है, यह मामला सीएमएस का है उन्हीं से बात की जानी चाहिए। जबकि प्रमाण पत्रों पर बिना सीएमओ के हस्ताक्षर के कोई भी प्रमाण पत्र वैध नहीं माना जाता।