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अब राजस्व अहलमद, डाटा एंट्री आपरेटर और दो किसानों पर कसेगा शिकंजा

Thu, 23 Nov 2017 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर Updated Thu, 23 Nov 2017 12:04 AM IST
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Now Revenue Ahlad, Data Entry Operator and Howga Screens on Two Farmers
dp singh

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एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में जुटी एसआईटी ने अब जांच में दोषी पाये गये राजस्व अहलमद, डाटा एंट्री आपरेटर और दो काश्तकारों पर भी गिरफ्तारी का शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। अब तक एक एसडीएम, दो तहसीलदार, एक संग्रह अमीन, एक अनुसेवक, एक स्टांप वेंडर और दो काश्तकारों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। मुख्य आरोपी डीपी सिंह के भी जल्द आत्मसमर्पण करने की उम्मीद एसआईटी जता रही है।

भूमि मुआवजा घोटाले की तहसीलवार जांच के बाद काश्तकारों की भूमि का बैक डेट में 143 करने के साथ ही दस्तावेज में फर्जी हस्ताक्षर करने के दर्जनों मामले एसआईटी की पकड़ में आये थे। जसपुर और काशीपुर तहसील की जांच में एसआईटी के सामने इस बात का खुलासा हुआ था कि मुआवजे के नाम पर तत्कालीन अफसरों के साथ ही काश्तकारों और कुछ बिचौलियों ने दस्तावेज में हेरफेर कर करोड़ों का घोटाला किया। दोनों तहसीलों के दस्तावेज को एसआईटी द्वारा जांच के लिए एफएसएल देहरादून भेजा गया जहां इस बात की पुष्टि हुई कि दस्तावेज में हेरफेर करने के साथ ही फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। 
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साक्ष्य जुटाने के बाद एसआईटी ने एक एसडीएम, दो तहसीलदार, एक संग्रह अमीन, एक अनुसेवक और एक स्टांप वेंडर के साथ ही दो काश्तकारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन एसआईटी द्वारा चिन्हित किए गए काशीपुर तहसील के डाटा एंट्री आपरेटर अर्पण कुमार, राजस्व अहलमद संजय चौहान सहित जसपुर तहसील के काश्तकार रमेश और दिलबाग सिंह एसआईटी को चकमा देकर भूमिगत हो गए थे। 
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पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए डीपी सिंह की तर्ज पर अर्पण कुमार और संजय चौहान ने भी हाइकोर्ट में याचिका दायर की जिसे पखवाड़े भर पहले हाइकोर्ट ने खारिज कर दिया था। अब एसआईटी की तीन टीमें फरार चल रहे सभी आरोपियों की गिरफ्तारी में जुटी हैं। 

डीपी ने नहीं किया सरेंडर, पुलिस टीमें भी लौटी बैरंग
सुप्रीम कोर्ट से दोबारा झटका मिलने पर भूमि मुआवजा घोटाले के मुख्य आरोपी डीपी सिंह ने बुधवार को भी आत्मसमर्पण नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा डीपी को सरेंडर करने के निर्देश दिए थे, जिसके आधार पर पिछले दो दिन से एसआईटी डीपी के सरेंडर करने की उम्मीद जता रही है, लेकिन बुधवार को भी डीपी कोर्ट नहीं पहुंचा। डीपी की धरपकड़ के लिए बरेली और लखनऊ गई टीमें भी वापस लौट आई हैं।

टीमों के वापस लौटने से एसआईटी को स्पष्ट हो गया है कि डीपी का परिवार लखनऊ में अपने किसी रिश्तेदार के यहां है और डीपी पुलिस से बचने के लिए अकेले ही ठिकाने बदल रहा है। फिलहाल एसआईटी बृहस्पतिवार को भी डीपी के सरेंडर करने की उम्मीद जता रही है।
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