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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Udham Singh Nagar News ›   No record of running challan of CMR rice in Bajpur

बाजपुर में सीएमआर चावल के चलित चालान का रिकार्ड नहीं

Mon, 09 Oct 2017 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर।
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर। Updated Mon, 09 Oct 2017 12:15 AM IST
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एसआईटी की जांच में पकड़े गए 600 करोड़ रुपये के चावल घोटाले में चलित (मूवमेंट) चालान के नाम पर भी सरकार को चपत लगाई गई है। अफसरों ने चावल मिलरों और ट्रांसपोर्टरों के साथ मिलकर बिना तिथि और बिना ट्रक नंबर अंकित किए चावल वितरण के लिए बड़ी संख्या में चालान जारी कर दिए थे। बताया जा रहा कि जांच में कुछ अधिकारियों ने तो राजनैतिक दबाव में चलित चालान की प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने की बात स्वीकारी। इस पूरे खेल से सरकार को सवा तीन करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। इतना ही नहीं एसआईटी को तो बाजपुर में जांच के दौरान सीएमआर योजना के चावल के चलित चालान का ब्योरा तक नहीं मिला। दिलचस्प है कि फर्जी चालान को गढ़वाल मंडल में प्राप्त करने वाले अभी तक कार्रवाई की जद से बाहर हैं।
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बता दें कि एसआईटी को रुद्रपुर गोदाम में जांच के दौरान सीएमआर और राज्य पोषित योजना के चावल में बड़ी गड़गड़ियां मिली थीं। इसके अलावा राज्य पोषित की लॉट में रखे 601 कट्टों में केवल 177 मेें ही राज्य पोषित का टैग लगा था। 424 कट्टों को टीम ने संदेहजनक माना था। इसी तरह काशीपुर गोदाम में कागजों में 7232 कट्टे दर्ज थे, लेकिन टीम को महज 3980 कट्टे ही जांच में मिले थे। किच्छा, काशीपुर के गोदामों की जांच के साथ ही बाजपुर गोदाम से भेजे गए चलित चालान के साथ भेजे गए चावल की भी पड़ताल की थी। जांच में टीम को पता चला कि कई चलित चालान तो भेजे गए, लेकिन उनके साथ चावल नहीं भेजा गया था। टीम को सीएमआर कोटे के तहत भेजे गए चावलों के चालान का रिकार्ड भी नहीं मिल सका।
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परिवहन शुल्क और प्रति बोरे की दर से पूरे गड़बड़झाले ने सरकार को तीन करोड़ 38 लाख रुपये की चपत लगाई। दीगर बात है कि चलित चालान की प्रक्रिया के उल्लंघन का संज्ञान उच्चाधिकारियों को भी था, जिसको कुछ अधिकारी और कर्मचारियों ने पूछताछ में भी उजागर किया। पूरे खेल में गढ़वाल मंडल के अधिकारी भी दोषी हैं लेकिन अभी तक उनका जिक्र कहीं भी नहीं आ सका है।
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