खसरों का 3-ए में प्रकाशन किए बगैर एनएचएआई ने बना दिया फोरलेन
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एनएच-74 घोटाले में मुआवजा वितरण में अनियमितता बरतने वाले एनएचएआई ने किच्छा तहसील में फोरलेन निर्माण में भी भारी अनियमितता बरती थीं। उक्त तहसील के बरा गांव में एनएचएआई ने फोरलेन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की और धारा 3-ए के तहत प्रारंभिक सूचना का प्रस्ताव तैयार करने के बाद दो खसरों का प्रकाशन किए बगैर ही फोरलेन निर्माण कर दिया गया। इसका लाभ उठाकर खातेदारों ने फोरलेन निर्माण के बाद भी खसरों का 143 (कृषि भूमि को अकृषि करना) कराकर दाखिल-खारिज करा दिया। तत्कालीन एसडीएम किच्छा की जांच में मामला पकड़ में आने के बाद डीएम के आदेश पर जांच एसआईटी को सौंपी गई थी।
वर्ष 2013 में ग्राम बरा में एनएचएआई की ओर से फोरलेन सड़क बनाने के लिए गांव के खसरा संख्या 250 और 562 का अधिग्रहण किया गया। इन खसरों का कुल रकबा 3.7130 हेक्टेयर है। इसमें से 1.5389 हेक्टेयर को राजकीय भूमि और 2.1750 हेक्टेयर को निजी व्यक्तियों की शामिल जोत में दिखाया गया है। भूमि का अधिग्रहण करने के बाद एनएचएआई ने फोरलेन निर्माण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 3-ए के तहत प्रारंभिक अधिसूचना का प्रस्ताव तैयार कर सक्षम अधिकारी भूमि अधिग्रहण (काला) के हस्ताक्षर के बाद पांच जुलाई 2013 को भूमि का प्रकाशन कराया, लेकिन उक्त प्रकाशन में खसरा संख्या 250 और 562 का प्रकाशन नहीं किया गया।
इसके बाद वर्ष 2015 में सड़क बनकर तैयार भी हो गई। खसरा नंबरों का प्रकाशन नहीं किए जाने से ही खातेदारों ने भूमि पर फोरलेन बन जाने के बाद इस भूमि का 143 कराकर दाखिल खारिज कर भूमि को बेच दिया। जब भू स्वामियों ने मुआवजे की मांग की तो मामला उजागर हुआ। मुआवजा नहीं मिलने पर खातेदारों ने एक तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी के साथ एनएचएआई अधिकारियों पर मुआवजे के बदले 25 से 40 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप भी लगाया था।
मामला डीएम डॉ. नीरज खैरवाल के संज्ञान में आने पर उन्होंने तत्कालीन एसडीएम किच्छा नरेश दुर्गापाल को मामले की जांच करने के आदेश दिए। एसडीएम की जांच में घोटाले की पुष्टि होने के बाद मामला एसआईटी के सुपुर्द किया गया। पूरे मामले की जांच के बाद एसआईटी को एनएचएआई के खिलाफ महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले थे।
3-ए में हर भूमि का प्रकाशन होता है जरूरी
रुद्रपुर। बरा में फोरलेन निर्माण के दौरान एनएचएआई की ओर से दो खसरों का प्रकाशन नहीं कराया गया, जबकि नियमानुसार 3-ए के प्रकाशन में निजी और राजकीय सभी भूमि के खसरा नंबरों का प्रकाशन अनिवार्य होता है। इसके साथ ही एनएचएआई ने खातेदारों द्वारा सड़क बिक्री के लिए किये गये दाखिल खारिज को निरस्त करने के लिए भी कोई पहल नहीं कर अपनी लापरवाही उजागर की थी।