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प्रशासन की सुस्ती से खनन माफिया की मौज
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
Updated Sun, 11 Jun 2017 12:28 AM IST
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सितारगंज उकरौली नदी में खनन करते वाहन व श्रमिक।
- फोटो : अमर उजाला
कैलाश नदी के उकरौली और साधूनगर खनन क्षेत्र में रात-दिन अवैध खनन हो रहा है। शुक्रवार को माफिया को प्रशासन के नदी में छापेमारी की भनक लगी तो माफिया वहां से खिसक लिए। लेकिन, भनक के चार घंटा देरी से एसडीएम नदी में पहुंचे और तब तक पूरी नदी खाली हो चुकी थी। प्रशासन की हीलाहवाली के आगे माफिया बेखौफ अवैध खनन के कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। इतना ही नहीं, पट्टों के साथ ही माफियाओं ने अब बंद नंधौर नदी में भी अवैध खनन करना शुरू कर दिया है।
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बता दें कि नदियों में जमी सिल्ट को हटाने के लिए शासन ने रीवर ट्रेनिंग पॉलिसी के तहत उकरौली और सूखी नदी में तीन-तीन सौ मीटर लंबाई के सिल्ट के पट्टे दिए। जिन पर खुफिया कैमरे लगाने के साथ ही नदी में पुलिस का बैरियर लगाने की शर्त रखी गई थी। शासन से स्वीकृति के बाद प्रशासन ने उकरौली में नौ व सूखी में पांच पट्टे तो आवंटित कर दिए। लेकिन, नियमों को ताक पर रख दिया गया। शुक्रवार को एसडीएम विनोद कुमार ने नदी में छापा तो मारा। लेकिन, चार घंटे देरी से। एसडीएम जब नदी में छापामार कार्रवाई के लिए निकले तो जाते-जाते रास्ते में ही रुक गए। उन्होंने नदियों के पट्टों पर छापेमारी के बजाय रास्ते में ही उपखनिज से लदे वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी।
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माफियाओं को एसडीएम के नदी में आने की भनक लगने के बाद चार घंटे के भीतर सभी माफिया नदी से खिसक लिए और पूरी नदी खाली हो गई। शाम चार बजे से लेकर आठ बजे तक यही चलता रहा और जब उसके बाद एसडीएम नदी पहुंचे तो वहां एक भी वाहन खनन करते नहीं मिला और न ही माफिया ही नदी में थे। उकरौली के पट्टों की सही मायनों में जांच की जाए तो पट्टों से बाहर खनन किया जाना सामने आएगा। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि पट्टों से उपखनिज निकलने के कारण बंद नंधौर से भी रात में चोरी-चोरी खनन सामग्री निकाली जा रही है।
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नदी के कांटों से निकल रहा ओवरलोडेड माल
प्रशासन अवैध खनन रोकने के लिए सिर्फ वाहनों की चेकिंग तक ही सीमित है। वाहन चेकिंग के दौरान ओवरलोड ट्रैक्टर ट्राली या फिर डंपर मिलते हैं तो उन्हें सीज भी किया जा रहा है। लेकिन, किस पट्टे से वाहनों को ओवरलोड माल दिया जाता है, इसकी कभी जांच नहीं हुई। जबकि, पट्टे से उपखनिज भरने के बाद माल कांटे पर तौला जाता है और पट्टों पर ट्रैक्टर ट्राली को 60 क्विंटल, डंपर को 90 क्विंटल और हाइवा को 150 क्विंटल निर्धारित वजन की रायल्टी दी जाती है। कांटे पर उपखनिज का वजन अधिक होता है तो वाहन स्वामी से रायल्टी के अलावा उतने माल का पैसा ले लिया जाता है। रास्ते में जब रायल्टी चेक होती है तो वाहन स्वामी निर्धारित वजन की रायल्टी दिखा देते हैं। बच गए तो ठीक और पकड़ गए तो वाहन स्वामी पर जुर्माना। लेकिन, ऐसे पट्टाधारकों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है।
खुफिया रास्ते बने मुफीद
बैगुल व सूखी नदी के डिसिल्टिंग पट्टों से मिट्टी व आरबीएम लेकर ओवरलोड वाहन चल रहे हैं। ये वाहन सिडकुल की निर्माणाधीन कंपनियों में मिट्टी भरान का काम कर रहे हैं। नदी से जंगल के खुफिया रास्तों से निकलकर सीधे सिडकुल में घुस जाते हैं। ऐसे दर्जनों ओवरलोड वाहन प्रतिदिन नदी से निकलकर जंगल होते हुए गुजर रहे हैं। प्रशासन द्वारा मुख्य सड़क पर चलने वाले वाहनों को तो रोका जा रहा है। लेकिन, इन ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे शासन-प्रशासन के नियमों व कोर्ट के ओवरलोड के खिलाफ सख्त आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं।