आईएएस पंकज पांडे और चंद्रेश यादव से होगी पूछताछ

ब्यूरो/अमर उजाला/ ऊधमसिंह नगर Updated Wed, 08 Aug 2018 12:43 AM IST
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घोटाला - फोटो : amar ujala

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एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में एसआईटी दो-तीन दिन के भीतर आईएएस पंकज पांडे और चंद्रेश यादव से देहरादून जाकर पूछताछ करेगी। कुछ दिन पूर्व एसआईटी ने दोनों अफसरों की ओर से आर्बिट्रेशन के मामलों में अनियमितता बरतने की रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इसके आधार पर शासन ने एसआईटी को मामले की विवेचना जारी रखते हुए दोनों अफसरों से पूछताछ करने की मंजूरी दे दी है।
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भूमि मुआवजा घोटाले में तत्कालीन अफसरों और काश्तकारों की जांच के बाद एसआईटी के सामने इस बात का खुलासा हुआ था कि तत्कालीन एसएलओ डीपी सिंह और अनिल शुक्ला की ओर से भू-अधिग्रहण के 16 मामलों में अभिनिर्णय आदेश पारित किए गए थे। इसमें कुछ मामलों में कृषि भूमि को अकृषि और कुछ मामलों में सरकारी भूमि को निजी दर्शाकर करोड़ों का मुआवजा निर्धारण किया गया था। इन सभी मामलों के वाद तत्कालीन डीएम पंकज पांडे और चंद्रेश यादव के आर्बिट्रेशन न्यायालय में दायर हुए थे। आर्बिट्रेटरों की ओर से पारित किए गए संशोधित निर्णय के आधार पर एनएचएआई ने काश्तकारों को चार गुना मुआवजा बांट दिया।
अनियमितता के साक्ष्य मिलने पर कुछ दिन पूर्व एसआईटी ने करीब सवा चार सौ पन्नों की जांच रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी। इसके आधार पर अब शासन ने एसआईटी को मामले की विवेचना जारी रखते हुए आईएएस पंकज पांडे और चंद्रेश यादव से पूछताछ करने की अनुमति दे दी है। बताया जा रहा है कि दोनों अफसरों से पूछताछ के लिए दो-तीन दिन के भीतर एसआईटी देहरादून रवाना हो सकती है। पूछताछ के बाद एसआईटी दोनों अफसरों के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति भी मांग सकती है। 
तबादले के बाद सुनाया था फैसला 
रुद्रपुर। भूमि मुआवजा घोटाले में आर्बिट्रेटरों ने किस कदर लापरवाही बरती, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक आईएएस अफसर ने आर्बिट्रेशन के मामले में फैसला सुनाने के लिए तारीख तय की, लेकिन इस तारीख से पहले अफसर का तबादला हो गया। इसके बाद अफसर ने तय तारीख से पहले ही मामले में फैसला सुना दिया।
 
सिर्फ सरकारी गवाह बचेंगे एसआईटी की कार्रवाई से 

रुद्रपुर। भूमि मुआवजा घोटाले में अब तक 17 किसान सरकार को मुआवजे की रकम का कुछ हिस्सा वापस कर चुके हैं। मुआवजा लौटाने वाले किसानों ने एसआईटी को लिखित में दिया है कि उन्होंने गलत तरीके से मुआवजा लिया। चूंकि एसआईटी की मंशा मुआवजे की पूरी रकम वसूल करने की थी, लेकिन किसानों की ओर से पूरा मुआवजा नहीं लौटाया गया है। ऐसे में एसआईटी की मानें तो जिन चार काश्तकारों ने 164 के कलमबंद बयान दर्ज कराए हैं, उन्हें ही एसआईटी सरकारी गवाह बनाएगी, शेष किसानों को एसआईटी मुल्जिम बना सकती है। चाहे उनके द्वारा मुुआवजे की आधे से अधिक रकम लौटा दी गई हो। 
 
ईडी की कार्रवाई से भी नहीं बचेंगे मुआवजा हड़पने वाले 
रुद्रपुर। भूमि मुआवजा घोटाले में अब तक 22 लोगों को जेल भेजा जा चुका है, जिनमें कुछ काश्तकार, सरकारी अफसर, बिल्डर और बिचौलिये शामिल हैं। इन सभी के जेल में सजा काटने के बाद भी इन्हें प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई से गुजरना होगा। गलत ढंग से मुआवजा लेने वालों के साथ ही मनी ट्रेल में शामिल लोगों की सूची एसआईटी ने ईडी को सौंपी है। ईडी इसमें अलग से जांच कर सरकारी धन की रिकवरी के लिए इनकी संपत्ति भी जब्त कर सकता है।
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