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मुख्तयार हत्याकांड : फरीदा का कोर्ट में सरेंडर, जेल भेजा
Wed, 19 Dec 2018 12:04 AM IST
दीपक नेगी
ब्यूरो/ऊधमसिंह नगर
ब्यूरो/ऊधमसिंह नगर
Published by: दीपक नेगी
Updated Wed, 19 Dec 2018 12:04 AM IST
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फरीदा बेगम
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जसपुर के पूर्व पालिकाध्यक्ष मुख्तयार अहमद की हत्या में सुप्रीम कोर्ट से दोषी ठहराई गई तत्कालीन चेयरमैन फरीदा बेगम ने मंगलवार को प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उसे जेल भेज दिया है।
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जसपुर निवासी पूर्व पालिकाध्यक्ष मुख्तयार अहमद की हत्या में नामजद तत्कालीन पालिकाध्यक्ष फरीदा बेगम, मो. अशरफ, रईस अहमद उर्फ सतना, रईस उर्फ लपट्टी, असलम, नसीम उर्फ चुरती और इदरीश उर्फ मिर्ची को एडीजे कोर्ट ने 23 जुलाई 2004 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। निचली अदालत के इस आदेश के खिलाफ आरोपियों ने नैनीताल हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने 22 अगस्त 2012 को निचली अदालत के आदेश पर मुहर लगा दी। इसके बाद आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। मुख्य आरोपी फरीदा बेगम उसके बाद से जमानत पर थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय खंड पीठ ने मुख्तयार हत्याकांड की मुख्य आरोपी फरीदा बेगम और एक अन्य अभियुक्त मो. अशरफ को निचली अदालत से मिली उम्रकैद को बरकरार रखा।
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कोर्ट ने चार अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। निचली अदालत की ओर से सजा सुनाए जाने से पूर्व ही एक आरोपी असलम की हत्या हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी फरीदा बेगम के जमानती बंधपत्र निरस्त कर उसे दो सप्ताह के भीतर संबंधित कोर्ट में सरेंडर करने के आदेश दिए थे। मंगलवार को फरीदा बेगम ने अपने अधिवक्ता शैलेंद्र मिश्रा के माध्यम से प्रभारी प्रथम अपर जिला जज ओमकुमार की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। फरीदा के अधिवक्ता ने न्यायालय में अभियुक्त को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी अर्जी लगाई है। इसमें फरीदा बेगम की वृद्धावस्था के साथ ही हृदय रोग से पीड़ित होने का जिक्र किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट में दायर करूंगी पुनर्विचार याचिका : फरीदा
काशीपुर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुख्तयार हत्याकांड की मुजरिम ठहराई गई फरीदा बेगम ने अदालत में आत्मसमर्पण करने से पूर्व इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात कही है। फरीदा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हुए वह अदालत में पेश होने जा रही हैं। उनकी मृतक मुख्तयार से कोई रंजिश नही थी। उनके कार्यकाल में रहे एक सभासद ने प्रपंच रचकर उन्हें इस झूठे मुकदमे में फंसाया है। उक्त सभासद उनसे गलत ढंग से बिल पास कराने का दबाव डालता था। उन्होंने कहा कि जिस समय मुख्तयार की हत्या को अंजाम दिया गया, उस समय वह कुछ सभासदों के साथ अपने घर पर मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि इस सजा के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगी। उन्हें इंसाफ मिलने का पूरा भरोसा है।