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दुराचार का आरोप सिद्ध न होने पर आरोपित कोर्ट से दोषमुक्त
Sat, 01 Jun 2019 12:04 AM IST
अरुण कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अरुण कुमार
Updated Sat, 01 Jun 2019 12:04 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग लड़की को बहलाकर उसके साथ दुराचार करने के मामले में आरोपित एक युवक के खिलाफ आरोप सिद्ध न होने पर तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश विवेक द्विवेदी की अदालत ने उसे दोषमुक्त कर बरी करने के आदेश दिए हैं।
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अधिवक्ता सूरज सक्सेना के मुताबिक वर्ष 2017 में गदरपुर थाना क्षेत्र में रहने वाले एक युवक ने थाने में तहरीर देकर कहा था कि 24 मई 2017 को वह कुछ दिनों के लिए यूपी में आयोजित एक विवाह समारोह में शामिल होने गया था।
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इस दौरान घर पर उसके माता-पिता, एक छोटा भाई और मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग बहन थी। आरोप है कि 10 जूून को क्षेत्र में रहने वाले रामनिवास उसकी बहन को बहलाकर अपने साथ ले गया और उससे दुराचार किया। 16 जून को घर पहुंचने पर उसे घटना का पता चला तो उसने रामनिवास के खिलाफ गदरपुर थाने में तहरीर सौंपी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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पुलिस द्वारा आरोप पत्र दाखिल करने के बाद रामनिवास के खिलाफ तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश विवेक द्विवेदी की अदालत में मुकदमा चला। जिरह के बाद वादी पक्ष के अधिवक्ता रामनिवास पर लगाए गए दुराचार के आरोप को सिद्ध नहीं कर सके। इसके आधार पर शुक्रवार को तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश विवेक द्विवेदी की अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए आरोपित रामनिवास को दुराचार का आरोपी नहीं मानते हुए बरी करने के आदेश जारी किए।