एनएच में कृषि भूमि को व्यावसायिक बनाकर लिया गया करोड़ों का मुआवजा
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एनएच की जद में आ रही भूमि के मुआवजे को लेकर हुई अनियमितताओं की जांच के लिए भले ही कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन ने कार्रवाई करने के निर्देश दिए हों, लेकिन रुद्रपुर में एनएच की आड़ में भूमि का मोटा मुआवजा लेने का खेल काफी पहले से चल रहा है। एनएच-74 में ही करीब 20 से अधिक ऐसी कृषि भूमि हैं, जिन्हें कुछ कॉलोनाइजरों ने पहले कौड़ियों के भाव खरीदा और फिर सरकारी अधिकारियों ने उन्हें व्यावसायिक भूमि में दर्शाकर अपने साथ ही कॉलोनाइजरों की तिजोरियां भी भरी। इसके साथ ही नजूल और सीलिंग की जमीन को भी दाखिल खारिज कर मोटा पैसा कमाया गया।
कृषि भूमि को व्यावसायिक दिखाकर मुआवजा हड़पने का सबसे बड़ा खेल एनएच-74 में हुआ है। कुछ समय पूर्व जब एनएच निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण हुआ, तो जिन लोगों की भूमि का अधिग्रहण हुआ उन्हें सरकार द्वारा मुआवजा देने की बात तय हुई थी।
कुछ कॉलोनाइजरों ने मुआवजे का लाभ लेने के उद्देश्य से कौड़ियों के दाम देकर लोगों से उनकी कृषि भूमि खरीद ली और जब मुआवजा देने का क्रम चला तो इन्हीं कॉलोनाइजरों ने कुछ सरकारी अधिकारियों की मदद से कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि में दर्शाकर उन्हें मोटा मुआवजा दिलाया और कमीशन के रूप में मोटी रकम ली। सूत्र बताते हैं कि बुधवार को आयकर विभाग की जांच के दायरे में आए पीसीएस, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह के क्षेत्र में हो रहे एनएच निर्माण में ही करीब 20 ऐसी कृषि भूमि हैं, जिन्हें व्यावसायिक में दिखाकर करोड़ों का मुआवजा लिया गया है।
इसके साथ ही डीपी सिंह के देहरादून निवासी एक रिश्तेदार के नाम से भूमि अधिग्रहण से पहले बगवाड़ा में ली गई सवा बीघा कृषि भूमि को भी भूमि अधिग्रहण के बाद व्यावसायिक दिखाकर मोटा मुआवजा लिया गया और मुआवजे की इस करोड़ों की रकम को कॉलोनाइजरों द्वारा बनाई गई कालोनियों में निवेश किया गया है। फिलहाल देखना यह है कि मुआवजे के इस खेल में किस-किस के नाम से पर्दा उठता है और किस पर कार्रवाई की गाज गिरती है।