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गायों को दूध निकालने के बाद लावारिस छोड़ रहे पशुपालक
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Tue, 28 Jun 2016 11:46 PM IST
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गायों को लावारिस छोड़ रहे पशुपालक
- फोटो : अमर उजाला
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तराई का जिला ऊधमसिंह नगर जहां गौ वंशीय पशुओं के तस्करों के लिए मुफीद है, वहीं पशुपालक और गौ रक्षा की दुहाई देने वाले हिंदुवादी भी गौ माता को मौत के मुंह में धकेलने में पीछे नहीं हैं। हिंदू धर्म में पूजनीय गौ माता को जितना नुकसान तस्कर पहुंचा रहे हैं उससे कहीं अधिक पशुपालक पहुंचा रहे हैं।
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यह सच्चाई अमर उजाला के एक सर्वे में सामने आई है। अब नगर निगम रुद्रपुर ने लावारिस छोड़ने वाले पशुपालकों को सबक सिखाने की योजना बनाई है। इसमें कड़ी कार्रवाई के साथ भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया जा रहा है।
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जनपद मुख्यालय पर गायों की कद्र सिर्फ जुबान पर ही होती है। धरातल पर गौवंशीय पशुओं की हालत दिन पर दिन बदतर हो रही है। शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेरों पर लावारिस गायों को मुंह मारते देखा जा सकता है। भूखी प्यासी ये गायें कभी सड़े गले खाद्य पदार्थ और प्लास्टिक की पन्नियां खाकर अपनी भूख मिटाती हैं और प्यास बुझाने के लिए कीचड़युक्त गंदा पानी पीना इनकी मजबूरी बन गई है।
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रुद्रपुर शहर की ही बात करें तो यहां वर्तमान में सैकड़ों गौवंशीय पशु सुबह से ही सड़कों पर लावारिस छोड़ दिए जाते हैं। दिन भर इन गायों को गंदगी से ही पेट भरना होता है। तपती धूप हो या घनघोर बारिश इन गायों को इनके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
जो गायें सड़कों पर अक्सर नजर आती हैं उनमें से अधिकांश गायें पशुपालकों की हैं। पशुपालक सुबह गायों से दूध निकालकर उन्हें खुला छोड़ देते हैं। शाम को गाय से पुन: दूध निकालकर उन्हें रात को बांध दिया जाता है। सुबह होने पर फिर इन्हें छोड़ देते हैं। पशुपालकों द्वारा सड़कों पर छोड़े गए यही गौवंशीय पशु अक्सर तस्करों का निशाना बनते हैं।
तस्करों की नजर ज्यादातर घुमंतू पशुओं पर ही रहती है। इनमें गायों के छोटे बछड़ों को तस्कर आसानी से वाहनों में डालकर तस्करी करके यूपी के इलाकों में सप्लाई कर देते हैं। वहीं कचरे से दूषित पदार्थ खाने से भी गोवंशीय पशुओं की असामयिक मौत हो रही है। सड़कों पर विचरण करने वाले ये पशु अक्सर वाहनों से दुर्घटना के शिकार भी हो जाते हैं।
कई बार इन्हें आवारा कुत्तों के हमलों का भी शिकार बनना पड़ता है। शहर में गौ रक्षा की दुहाई देने के लिए तमाम संगठन समय-समय पर बड़ी बड़ी बातें तो करते हैं लेकिन शहर में घुमंतू गायों की दुर्दशा की तरफ आज तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
पशुपालक और प्रशासन दोनों जिम्मेदार
वरिष्ठ समाजसेवी और सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक डा. मनमोहन सिंह गायों की दुर्दशा को लेकर खासे चिंतित हैं। उन्होंने कहा गायों की दुर्दशा के लिए पशुपालक और प्रशासन दोनों जिम्मेदार हैं। गायों की दुर्दशा का आलम यह है कि उन्होंने खुद कई बार दुधारू गायों पर आवारा कुत्तों को झपटते देखा है। हाल ही में आठ-दस आवारा कुत्ते एक अच्छी खासी गाय को नोचते हुए मिले। डा. सिंह ने कहा पशुपालक इन गायों से दूध निकालकर अच्छा खासा मुनाफा कमाते हैं तो इनके उचित रहन-सहन की व्यवस्था उन्हीं को करनी चाहिए।
पिछले कई दिनों से देखा जा रहा है कि शहरी क्षेत्र में भी कुछ पशुपालक अपने पशुुओं को लावारिस छोड़ रहे हैं। इससे गायों को अधिकांश गंदगी में मुंह मारते देखा गया है। कुछ पशु तस्कर भी इसी का फायदा उठा रहे हैं, इसलिए नगर निगम अब ऐसे पशु पालकों की सूची तैयार कर रहा है जो गायों को दूध निकालने के बाद खुले में लावारिस छोड़ रहे हैं। उनके खिलाफ पशु अधिनियम में कार्रवाई करते हुए निगम दस हजार रुपये जुर्माना भी वसूलेगा। इसके लिए वेटनरी विभाग और एसडीएम की देखरेख में एक टीम का गठन किया जा रहा है।
दीप्ति वैश्य, मुख्य नगर अधिकारी