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पटवारी बनाने का झांसा देकर सीआईएसएफ के दरोगा समेत दो ने ठगे सात लाख
ब्यूरो/अमर उजाला/ऊधमसिंह नगर
Updated Wed, 03 Oct 2018 12:10 AM IST
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उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग में पटवारी की नौकरी लगवाने के लिए सीआईएसएफ के एक दरोगा (स्टेनो) और उसके साथी ने एक व्यक्ति से सात लाख 25 हजार रुपये हड़प लिए। अदालत के आदेश पर कुंडा थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कुंडा थाने के ग्राम सरवरखेड़ा निवासी दलीप सिंह पुत्र जौर सिंह ने जसपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उसका पुत्र धुर्वेंद्र ठाकुरद्वारा में तिकोनिया पार्क के पास दुकान करता है। उसकी पहचान ठाकुरद्वारा के ग्राम नगलिया निवासी और ऊंचाहार जिला रायबरेली में तैनात सीआईएसएफ में एसआई स्टेनो (एम) दीपक कुमार से हुई। धुर्वेंद्र के मुताबिक 23 अगस्त 2015 को दीपक एक अन्य व्यक्ति के साथ वहां आया।
साथ आए व्यक्ति का परिचय उसने ठाकुरद्वारा के ग्राम कमालपुरी खालसा निवासी उदित कुमार के रूप में दिया। उसने उदित को अपना वरिष्ठ अधिकारी बताया। दोनों ने अपनी मजबूत पकड़ बताते हुए उसके पुत्र हरेंद्र की लेखपाल (पटवारी) पद पर नियुक्ति कराने का झांसा देते हुए 10 लाख रुपये की मांग की। 9 सितंबर 2015 को उन्होंने दीपक को छह लाख की रकम चेक के जरिये दी।
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शेष चार लाख रुपये की रकम उसने 15 जून 2016 को दीपक और उदित को दी। काफी समय तक नौकरी न लगने पर दोनों टालमटोल करते रहे। रकम वापस मांगने पर दीपक ने पौने तीन लाख रुपये वापस किए, जबकि शेष रकम देने से इनकार कर दिया। प्रार्थना पत्र का संज्ञान लेकर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रकाश चंद्र ने कुंडा थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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कुंडा थाने के ग्राम सरवरखेड़ा निवासी दलीप सिंह पुत्र जौर सिंह ने जसपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उसका पुत्र धुर्वेंद्र ठाकुरद्वारा में तिकोनिया पार्क के पास दुकान करता है। उसकी पहचान ठाकुरद्वारा के ग्राम नगलिया निवासी और ऊंचाहार जिला रायबरेली में तैनात सीआईएसएफ में एसआई स्टेनो (एम) दीपक कुमार से हुई। धुर्वेंद्र के मुताबिक 23 अगस्त 2015 को दीपक एक अन्य व्यक्ति के साथ वहां आया।
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साथ आए व्यक्ति का परिचय उसने ठाकुरद्वारा के ग्राम कमालपुरी खालसा निवासी उदित कुमार के रूप में दिया। उसने उदित को अपना वरिष्ठ अधिकारी बताया। दोनों ने अपनी मजबूत पकड़ बताते हुए उसके पुत्र हरेंद्र की लेखपाल (पटवारी) पद पर नियुक्ति कराने का झांसा देते हुए 10 लाख रुपये की मांग की। 9 सितंबर 2015 को उन्होंने दीपक को छह लाख की रकम चेक के जरिये दी।
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शेष चार लाख रुपये की रकम उसने 15 जून 2016 को दीपक और उदित को दी। काफी समय तक नौकरी न लगने पर दोनों टालमटोल करते रहे। रकम वापस मांगने पर दीपक ने पौने तीन लाख रुपये वापस किए, जबकि शेष रकम देने से इनकार कर दिया। प्रार्थना पत्र का संज्ञान लेकर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रकाश चंद्र ने कुंडा थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।