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13 फर्मों में पकड़ी एक करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी
Wed, 24 Apr 2019 12:10 AM IST
अरुण कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अरुण कुमार
Updated Wed, 24 Apr 2019 12:10 AM IST
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एक प्रतिष्ठान में दस्तावेजों की जांच कर असिटेंट कमिश्नर भुवन चंद्र पांडे
- फोटो : अमर उजाला
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स्टेट जीएसटी की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने फैब्रिक बैग बनाकर बेचने वाली 13 कंपनियों में छापा मारकर प्रारंभिक रूप से करीब एक करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी है। सभी संचालकों से दस्तावेज जब्त करने के साथ ही जीएसटी की राशि तत्काल जमा करने के निर्देश दिए हैं।
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मंगलवार सुबह एडिशनल कमिश्नर अनिल सिंह के निर्देश पर एसटीएफ के डिप्टी कमिश्नर रजनीश यशवस्थी की अगुवाई में 13 टीमों में शामिल 65 अधिकारियों ने रुद्रपुर, सिडकुल, सितारगंज, खटीमा, गदरपुर, पिथौरागढ़ और बेड़ीनाग में फैब्रिक बनाने वाले कारोबारियों के प्रतिष्ठानों में छापा मारा। एसटीएफ की टीम को प्रतिष्ठान में देख कारोबारियों में खलबली मच गई।
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टीम ने मौके से कच्चे माल की खरीद और फैब्रिक बैग की बिक्री के दस्तावेज जांचे और जरूरी दस्तावेज कब्जे में ले लिए। गदरपुर में छापे के दौरान टीम को हल्का विरोध भी झेलना पड़ा। डिप्टी कमिश्नर रजनीश ने बताया कि यह कार्रवाई पांच करोड़ रुपये के टर्नओवर पर जीएसटी चोरी करने वाले कारोबारियों के खिलाफ की गई थी। प्रारंभिक जांच में करीब एक करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ में आई है। दस्तावेजों की जांच में यह चोरी ज्यादा भी हो सकती है। इन कारोबारियों को तत्काल जीएसटी जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
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डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि यह कारोबारी मॉल, दुकानों और शोरूमों में सामान पैकिंग करने में बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने वाले फैब्रिक बैग बनाकर बेचने का कारोबार करते है लेकिन कारोबार से मुनाफा कमाने के बाद भी जीएसटी जमा नहीं कर रहे थे। बताया कि ये कारोबारी कच्चा माल 12 फीसदी की दर से लेते हैं जबकि तैयार माल को निर्धारित 18 फीसदी की बजाय पांच फीसदी में बेचा करते थे। कारोबारी सरकार को मिलने वाली 13 फीसदी टैक्स चोरी करते थे।
टीम ये रहे शामिल
डिप्टी कमिश्नर रजनीश यशवस्थी, एनएस बोरा, रणवीर सिंह, तारकेश्वर मिश्रा, निशिकांत सिंह, शिवेंद्र प्रताप सिंह, मोहिता भंडारी, असिस्टेंट कमिश्नर भुवन चंद्र पांडे, आशीष ठाकुर, शुचि तिवारी, ज्ञान चंद्र, गौरव पंत, अनिल सिन्हा, दीपक कुमार, डॉ. प्रियंका, राज्य कर अधिकारी नंदन गिरी, जीशान मलिक, प्रदीप चंद्रा, राहुलकांत, कुशल रौतेला, प्रकाश त्रिवेदी, अनमोल राणा, शांतिलाल, डीएस तोमर, मोहन बिष्ट, शंकर राम, हरिओम, किरन आर्या, मोहन सिंह, तनुजा जोशी, एनएस नपच्चयाल, एजाज बेग, विशाल, शेखर, संजय, नीरज, सचिन, राकेश, कप्तान सिंह, सुरेंद्र, दीपक, किंशुक शर्मा और महेश।
जीएसटी चोरी की, उल्टा सरकार से लिया रिफंड
रुद्रपुर। फैब्रिक बैग का कारोबार करने वाले व्यापारियों को कच्चे माल की खरीद पर 12 फीसदी और तैयार बैग की खरीद/बिक्री पर 18 फीसदी जीएसटी देना होता है लेकिन कारोबारी जीएसटी चोरी करने के लिए सिर्फ पांच फीसदी पर बैग की बिक्री घोषित कर रहे थे। डिप्टी कमिश्नर रजनीश ने बताया कि पांच फीसदी में बैग की खरीद या बिक्री दर्शाकर कारोबारी जहां छह फीसदी की जीएसटी चोरी कर रहे थे। वहीं, पांच कारोबारियों ने पांच फीसदी की बिक्री दर्शाकर इंवरटेड ड्यूटी स्ट्रक्चर पर करीब सात से 10 लाख रुपये रिफंड भी लिया है। इन कारोबारियों से जीएसटी के साथ ही ब्याज सहित रिफंड की वसूली भी की जाएगी।
आपस में कारोबार खरा, अन्य से कारोबार में जीएसटी चोरी
रुद्रपुर। एसटीएफ के छापे में चार कारोबारियों ने खुद के साथ ही पत्नी के नाम से फर्म बना रखी है। यह कारोबारी पत्नी के साथ कारोबार में 12 और 18 फीसदी जीएसटी में कारोबार करते हैं। वहीं, दूसरों के साथ कारोबार में जीएसटी चोरी की जाती है। मसलन पत्नी की फर्म 18 फीसदी जीएसटी पर फैब्रिक बैग की बिक्री करती है तो पति की फर्म पांच फीसदी जीएसटी पर बिक्री या खरीद कर जीएसटी की चोरी करते हैं।
ई-वे बिल की बजाय आधार कार्ड से कारोबार
रुद्रपुर। करोड़ों का कारोबार करने वाले कई व्यापारियों ने जीएसटी से बचने के लिए आधार कार्ड से खरीद और बिक्री का तरीका ईजाद किया है। डिप्टी कमिश्नर रजनीश ने बताया कि ये कारोबारी सामान की खरीद या बिक्री में ई-वे बिल का इस्तेमाल नहीं करते हैं और आधार कार्ड से सामान की बिक्री और खरीद करते हैं। वहीं, खरीद और बिक्री के प्रपत्रों में लगाए गए आधार कार्डों को जांचने के बाद यह ट्रेंड पकड़ में आया है। जिन कारोबारियों के प्रतिष्ठानों में कार्रवाई की गई है, उनके रिटर्न का परीक्षण कई महीनों से किया जा रहा था।