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सिल्वर रंग की लकी कार ही बन गई गिरफ्तारी में मददगार
Updated Sun, 04 Mar 2018 11:49 PM IST
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रुद्रपुर। काशीपुर पुलिस की ओर से जेल भेजे गए सात ऑटोलिफ्टर ढाई साल से वाहन चोरियों की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे। गिरोह का सरगना खलील काम में इतना शातिर हो गया था कि वह न तो पहले कभी पुलिस के हत्थे चढ़ा था और न ही उसके खिलाफ कहीं वाहन चोरी का कोई मुकदमा ही दर्ज हुआ था। बड़ी बात यह है कि खलील जिस ऑल्टो कार को अपने लिए लकी मानता था, वही कार उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने में पुलिस की मददगार बनी।
बता दें कि शुक्रवार को काशीपुर पुलिस ने सात ऑटोलिफ्टरों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चार बोलेरो, दो स्विफ्ट और दो बोलेेरो के इंजन बरामद किए थे। जिले में लगातार वाहन चोरी की घटनाओं के बाद पुलिस टीमों ने अमरोहा, लखीमपुर, सीतापुर, शाहजहांपुर, बाराबंकी, रामपुर की खाक छान मारी थी। जिन जगहों से बोलेरो चोरी हुई थीं, उन जगहों के सीसीटीवी खंगालने पर पुलिस को पता चला कि ऑटोलिफ्टर वारदात के लिए हर बार सिल्वर ऑल्टो कार का ही इस्तेमाल करते हैं।
हालांकि हर बार कार का नंबर बदल दिया जाता था। बस पुलिस ने इसी ऑल्टो कार को केंद्र में रखकर जांच आगे बढ़ाई। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस यह पता लगाने में सफल रही कि हर जगह चोरी से पहले घटनास्थल के आसपास मंडराने वाली ऑल्टो अमरोहा के खलील अहमद की है। इसके बाद पुलिस ने खलील निवासी थाना मुल्लाना (अमरोहा) और उसके साथियों को धर दबोचा।
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पूछताछ में खलील ने स्वीकारा कि यह ऑल्टो कार उसके लिए लकी थी। वह और गिरोह के साथी इसी कार से पहले रैकी किया करते थे और फिर वाहन चुराकर बेचा करते थे। करीब तीन साल पहले तक खलील कपड़ों की फेरी लगाने का काम करता था, लेकिन उसके बाद वाहन चोरी करना शुरू कर दिया। अब तक वह कितनी गाड़ियां चुराकर बेच चुका है, उसे यह तक याद नहीं। वह अपने काम में इतना शातिर था कि उसके खिलाफ किसी थाने में कोई मुकदमा तक दर्ज नहीं है।
व्हाट्सएप का होता था इस्तेमाल
रुद्रपुर। अंतरराज्जीय ऑटोलिफ्टर गिरोह के लोग आपस में व्हाट्सएप मैसेज या कॉल का इस्तेमाल करते थे। चूंकि गिरोह के लोग अलग-अलग जगह के रहने वाले हैं, इसलिए एक जगह एकत्र होने के लिए व्हाट्सएप से ही संदेश भेजे जाते थे। चोरी किए वाहनों को बेचने, चेसिस और इंजन नंबर के साथ ही कागजात तैयार करने के लिए भी बातचीत व्हाट्सएप पर ही करते थे।
‘बबलू’ और ‘कपड़े’ थे कोड वर्ड
रुद्रपुर। ऑटोलिफ्टर गिरोह के लोग कोड वर्ड में बातचीत किया करते थे। उन्होंने बोलेरो का कोड वर्ड ‘बबलू’ रखा हुआ था, जबकि वाहन के कागज को ‘कपड़ों’ का नाम दिया गया था। इसके अलावा बोलरो को खेलने के लिए एलएनकी चाबी (मास्टर की) का इस्तेमाल किया जाता था। कपड़ों की फेरी लगाने के दौरान खलील ऊधमसिंह नगर की भौगोलिक स्थिति से भलीभांति परिचित था। यही कारण रहा कि अगस्त से सक्रिय होकर खलील और उसके गैंग ने आधा दर्जन से अधिक वाहन चुराए और भागने के लिए यूपी को जोड़ने वाले चोर रास्तों का इस्तेमाल किया।
ऑटोलिफ्टर गिरोह के लोगों के नेपाल कनेक्शन को खंगाला जा रहा है। पूछताछ में दो और लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। जेल भेजे गए सात लोगों में दो सदस्य वो थे, जो फर्जी कागजात तैयार करते थे। पुलिस टीम ने गुडवर्क किया है।
- डॉ. सदानंद दाते, एसएसपी।
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बता दें कि शुक्रवार को काशीपुर पुलिस ने सात ऑटोलिफ्टरों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चार बोलेरो, दो स्विफ्ट और दो बोलेेरो के इंजन बरामद किए थे। जिले में लगातार वाहन चोरी की घटनाओं के बाद पुलिस टीमों ने अमरोहा, लखीमपुर, सीतापुर, शाहजहांपुर, बाराबंकी, रामपुर की खाक छान मारी थी। जिन जगहों से बोलेरो चोरी हुई थीं, उन जगहों के सीसीटीवी खंगालने पर पुलिस को पता चला कि ऑटोलिफ्टर वारदात के लिए हर बार सिल्वर ऑल्टो कार का ही इस्तेमाल करते हैं।
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हालांकि हर बार कार का नंबर बदल दिया जाता था। बस पुलिस ने इसी ऑल्टो कार को केंद्र में रखकर जांच आगे बढ़ाई। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस यह पता लगाने में सफल रही कि हर जगह चोरी से पहले घटनास्थल के आसपास मंडराने वाली ऑल्टो अमरोहा के खलील अहमद की है। इसके बाद पुलिस ने खलील निवासी थाना मुल्लाना (अमरोहा) और उसके साथियों को धर दबोचा।
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पूछताछ में खलील ने स्वीकारा कि यह ऑल्टो कार उसके लिए लकी थी। वह और गिरोह के साथी इसी कार से पहले रैकी किया करते थे और फिर वाहन चुराकर बेचा करते थे। करीब तीन साल पहले तक खलील कपड़ों की फेरी लगाने का काम करता था, लेकिन उसके बाद वाहन चोरी करना शुरू कर दिया। अब तक वह कितनी गाड़ियां चुराकर बेच चुका है, उसे यह तक याद नहीं। वह अपने काम में इतना शातिर था कि उसके खिलाफ किसी थाने में कोई मुकदमा तक दर्ज नहीं है।
व्हाट्सएप का होता था इस्तेमाल
रुद्रपुर। अंतरराज्जीय ऑटोलिफ्टर गिरोह के लोग आपस में व्हाट्सएप मैसेज या कॉल का इस्तेमाल करते थे। चूंकि गिरोह के लोग अलग-अलग जगह के रहने वाले हैं, इसलिए एक जगह एकत्र होने के लिए व्हाट्सएप से ही संदेश भेजे जाते थे। चोरी किए वाहनों को बेचने, चेसिस और इंजन नंबर के साथ ही कागजात तैयार करने के लिए भी बातचीत व्हाट्सएप पर ही करते थे।
‘बबलू’ और ‘कपड़े’ थे कोड वर्ड
रुद्रपुर। ऑटोलिफ्टर गिरोह के लोग कोड वर्ड में बातचीत किया करते थे। उन्होंने बोलेरो का कोड वर्ड ‘बबलू’ रखा हुआ था, जबकि वाहन के कागज को ‘कपड़ों’ का नाम दिया गया था। इसके अलावा बोलरो को खेलने के लिए एलएनकी चाबी (मास्टर की) का इस्तेमाल किया जाता था। कपड़ों की फेरी लगाने के दौरान खलील ऊधमसिंह नगर की भौगोलिक स्थिति से भलीभांति परिचित था। यही कारण रहा कि अगस्त से सक्रिय होकर खलील और उसके गैंग ने आधा दर्जन से अधिक वाहन चुराए और भागने के लिए यूपी को जोड़ने वाले चोर रास्तों का इस्तेमाल किया।
ऑटोलिफ्टर गिरोह के लोगों के नेपाल कनेक्शन को खंगाला जा रहा है। पूछताछ में दो और लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। जेल भेजे गए सात लोगों में दो सदस्य वो थे, जो फर्जी कागजात तैयार करते थे। पुलिस टीम ने गुडवर्क किया है।
- डॉ. सदानंद दाते, एसएसपी।