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Udham Singh Nagar News: जमीनी लड़ाई और झोपड़ी जलने के बाद टूट गए थे पंचानन

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 28 Nov 2022 11:42 PM IST
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Crime.
पंचानन (फाइल फोटो)।
शक्तिफार्म। रहने के लिए खरीदा गया जमीन का टुकड़ा खोने का डर और पड़ोसी की प्रताड़ना आखिरकार 68 वर्षीय पंचानन मजूमदार सहन नहीं कर पाए। सोमवार सुबह अपने बेटे के घर से निकलकर उन्होंने करीब एक किमी दूर अपने जले हुए आशियाने के पास ही जहर खाकर जान दे दी।
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करीब 40 वर्ष पहले पंचानन मजूमदार ने टैगोरनगर में रहने के लिए पुतुल विश्वास के ससुर से जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा खरीदकर झोपड़ी बनाई थी। पट्टे की कच्ची जमीन होने के कारण खरीदा गया आवासीय टुकड़ा अभिलेखों में दर्ज नहीं हो पाया। पंचानन झोपड़ी में पत्नी, तीन बेटों और एक बेटी के साथ रहते थे। बेटी की शादी के बाद वह ससुराल चली गई जबकि तीनों बेटों की शादी के बाद वे सभी दूसरी जगह पर जमीन लेकर रहने लगे।
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वृद्ध दंपती झोपड़ी में रहकर मेहनत मजदूरी कर जैसे-तैसे गुजारा चलाता था। इस बीच पुतुल के ससुर की मौत के बाद पुतुल ने पंचानन की आवासीय जमीन पर दावा करते हुए न्यायालय में वाद दायर कर दिया। गरीबी में जी रहे पंचानन के लिए यह मुकदमे बाजी भारी पड़ने लगी। पड़ोस में ही रहने वाली पुतुल की पत्नी और उसके बेटे वृद्ध दंपती से आए दिन झगड़ा भी करने लगे।
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कई बार गांव समाज के लोगों ने दोनों के बीच के विवाद को सुलझाने का प्रयास किया लेकिन कामयाबी नहीं मिली। मुकदमे में खर्च होते रुपये से भी पंचानन अवसाद में रहने लगे। साथ ही कई वर्षों से मामला न्यायालय में विचाराधीन रहने के कारण उन्हें अपने खून पसीने के पैसे से खरीदे गए इस जमीन के टुकड़े को खोने का डर भी सताने लगा।

चार दिन पूर्व झोपड़ी जलाए जाने की घटना से पंचानन का अवसाद और बढ़ गया। उनके बेटे गोपाल ने बताया कि झोपड़ी जलाए जाने के बाद से माता-पिता उसके पास आकर रहने लगे थे। उसके पिता अवसाद के कारण रात को सो नहीं पाते थे। सोमवार की सुबह चाय पीने के बाद वह घर से निकल गए। काफी देर तक न लौटने पर उनकी ढूंढ खोज शुरू की गई और अंतत: उनका शव उनकी जली हुई झोपड़ी के पास झाड़ियों में मिला।
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