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पाप्लर के 300 से ज्यादा पेड़ों पर लकड़ी तस्करों ने चलाई आरी
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शांतिपुरी में कटे हुए पॉप्लर के पेड़।
- फोटो : RUDRAPUR
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शांतिपुरी। तस्कर बंडिया के पवन फार्म में राजस्व विभाग की जमीन पर पाप्लर के पेड़ों पर लगातार आरी चला रहे हैं। इस बार 300 से ज्यादा पेड़ों का कटान किया गया है। राजस्व विभाग की टीम 30 पेड़ कटे होने की बात कह रही है। टीम ने लकड़ी को अपने कब्जे में ले लिया है।
तहसील प्रशासन को जब अवैध कटान की सूचना मिली तो मौके पर हड़कंप मच गया। किच्छा तहसीलदार भुवन चंद भंडारी ने बताया कि पाप्लर के पेड़ कटने की सूचना मिलने पर निरीक्षण किया गया जहां 30 पेड़ कटे हुए पाए गए हैं। राजस्व विभाग की ओर से पेड़ों को अपने कब्जे में लेकर किच्छा तहसील में लाकर सीज किया गया है। उन्होंने कहा कि जनवरी में पूर्व तराई प्रभारी वन विभाग को छपान के पैसे ट्रांसफर कर दिए गए हैं। वन विभाग पवन फार्म में पाप्लर के पेड़ों में छपान करेगी, उसके बाद इन पेड़ों का नीलामी होगी।
बंडिया के पवन फार्म में क्षेत्र में अब तक लाखों रुपये के पाप्लर की लकड़ी को काटकर चुराया जा चुका है। विधानसभा चुनाव में अधिकारियों की व्यस्तता का फायदा उठाकर तस्कर बड़े स्तर पर चोरी कर रहे हैं। हालांकि पहले भी किच्छा कोतवाली में पाप्लर के पेड़ काटने की रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी है।
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दियासलाई बनाने में होता है प्रयोग
पाप्लर की लकड़ी का प्रयोग मुख्य रूप से दियासलाई बनाने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त प्लाईवुड व अन्य इमारती लकड़ी के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है। जिसे खुले बाजार में 800 रुपये क्विंटल के हिसाब से बेचा जा रहा है। रुद्रपुर और आसपास के प्लाईवुड फैक्ट्रियों में पाप्लर के पेड़ों की मांग ज्यादा है।
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तहसील प्रशासन को जब अवैध कटान की सूचना मिली तो मौके पर हड़कंप मच गया। किच्छा तहसीलदार भुवन चंद भंडारी ने बताया कि पाप्लर के पेड़ कटने की सूचना मिलने पर निरीक्षण किया गया जहां 30 पेड़ कटे हुए पाए गए हैं। राजस्व विभाग की ओर से पेड़ों को अपने कब्जे में लेकर किच्छा तहसील में लाकर सीज किया गया है। उन्होंने कहा कि जनवरी में पूर्व तराई प्रभारी वन विभाग को छपान के पैसे ट्रांसफर कर दिए गए हैं। वन विभाग पवन फार्म में पाप्लर के पेड़ों में छपान करेगी, उसके बाद इन पेड़ों का नीलामी होगी।
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बंडिया के पवन फार्म में क्षेत्र में अब तक लाखों रुपये के पाप्लर की लकड़ी को काटकर चुराया जा चुका है। विधानसभा चुनाव में अधिकारियों की व्यस्तता का फायदा उठाकर तस्कर बड़े स्तर पर चोरी कर रहे हैं। हालांकि पहले भी किच्छा कोतवाली में पाप्लर के पेड़ काटने की रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी है।
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दियासलाई बनाने में होता है प्रयोग
पाप्लर की लकड़ी का प्रयोग मुख्य रूप से दियासलाई बनाने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त प्लाईवुड व अन्य इमारती लकड़ी के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है। जिसे खुले बाजार में 800 रुपये क्विंटल के हिसाब से बेचा जा रहा है। रुद्रपुर और आसपास के प्लाईवुड फैक्ट्रियों में पाप्लर के पेड़ों की मांग ज्यादा है।