{"_id":"5f07694e8ebc3e63725adead","slug":"court-given-order-kashipur-news-hld389156517","type":"story","status":"publish","title_hn":"तकिया कब्रिस्तान मामले में कोर्ट के आदेश पर पैमाइश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तकिया कब्रिस्तान मामले में कोर्ट के आदेश पर पैमाइश
विज्ञापन
काशीपुर में पोस्ट ऑफिस रोड पर पैमाइश करते राजस्व अधिकारी।
- फोटो : KASHIPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट के आदेश पर राजस्व विभाग ने पोस्ट ऑफिस मार्केट से रतन सिनेमा रोड होते हुए पंत इकां मार्केट से मुख्य बाजार निगम के सामने स्थित भूमि की पैमाइश का काम शुरू कर दिया है। इस भूमि को कब्रिस्तान बताकर याचिका दायर की गई है।
मोहल्ला थाना साबिक निवासी जावेद अख्तर ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका 122/18 दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि 1683 फसली अर्थात सन 1960-61 तक भूमि कब्रिस्तान और तकिया में राजस्व अभिलेखों में दर्ज रही है। बंदोबस्ती के बाद उक्त भूमि राजस्व अभिलेखों में निजी व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम दर्ज हो गई।
वर्तमान में यहां दो शिक्षण संस्थाएं, पोस्ट ऑफिस व सैकड़ों व्यवसायिक प्रतिष्ठान है। याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी ने अपने आदेश में राजस्व विभाग को इस बाबत निर्देशित किया है कि उक्त भूमि का स्वरूप परिवर्तन किन कारणों से हुआ है और पूर्व में कब्रिस्तान के नाम दर्ज रही।
विज्ञापन
इस आराजी पर दीगर लोग किस आधार पर काबिज हुए। अपर शासकीय अधिवक्ता अमरीश अग्रवाल ने तहसीलदार को पत्र लिखकर वर्णित भूमि का वर्तमान स्टेटस व मापजोख उपलब्ध कराने को कहा है। तहसीलदार वीसी पंत ने बताया कि इसी क्रम में राजस्व अधिकारियों ने पैमाईश का काम शुरू कर दिया है। इसमें एक सप्ताह से अधिक का समय लग सकता है।
विज्ञापन
मोहल्ला थाना साबिक निवासी जावेद अख्तर ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका 122/18 दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि 1683 फसली अर्थात सन 1960-61 तक भूमि कब्रिस्तान और तकिया में राजस्व अभिलेखों में दर्ज रही है। बंदोबस्ती के बाद उक्त भूमि राजस्व अभिलेखों में निजी व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम दर्ज हो गई।
विज्ञापन
वर्तमान में यहां दो शिक्षण संस्थाएं, पोस्ट ऑफिस व सैकड़ों व्यवसायिक प्रतिष्ठान है। याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी ने अपने आदेश में राजस्व विभाग को इस बाबत निर्देशित किया है कि उक्त भूमि का स्वरूप परिवर्तन किन कारणों से हुआ है और पूर्व में कब्रिस्तान के नाम दर्ज रही।
विज्ञापन
इस आराजी पर दीगर लोग किस आधार पर काबिज हुए। अपर शासकीय अधिवक्ता अमरीश अग्रवाल ने तहसीलदार को पत्र लिखकर वर्णित भूमि का वर्तमान स्टेटस व मापजोख उपलब्ध कराने को कहा है। तहसीलदार वीसी पंत ने बताया कि इसी क्रम में राजस्व अधिकारियों ने पैमाईश का काम शुरू कर दिया है। इसमें एक सप्ताह से अधिक का समय लग सकता है।