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Udham Singh Nagar News: गर्भवती की मौत के बाद क्लीनिक में छापा, संचालक फरार
Wed, 12 Jul 2023 11:14 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Wed, 12 Jul 2023 11:14 PM IST
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प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्लीनिक को किया सील
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। गर्भवती महिला की मौत के मामले में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को क्लीनिक पर छापा मारा। इसकी भनक लगते ही क्लीनिक संचालक परिवार समेत फरार हो गया। टीम ने क्लीनिक को सील कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्लीनिक का क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में पंजीकरण नहीं मिला है।
ट्रांजिट कैंप स्थित लक्ष्मी क्लीनिक में मंगलवार को एक गर्भवती महिला पूजा की मौत हो गई थी। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया था। इसके बाद बुधवार को एसीएमओ डॉ. हरेंद्र मलिक और नायब तहसीलदार बीसी भंडारी टीम के साथ क्लीनिक के औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे लेकिन वहां ताला लटका मिला। टीम के सदस्यों ने आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई तो उन्होंने बताया कि घटना के तुरंत बाद ही क्लीनिक संचालक परिवार समेत फरार हो गया था। एसएमओ डॉ. हरेंद्र मलिक ने बताया कि एहतियातन अग्रिम कार्रवाई तक क्लीनिक को सील किया गया है। इस प्रकरण में क्लीनिक संचालक को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए निर्देशित किया गया है। डॉ. मलिक ने बताया कि जांच में लक्ष्मी क्लीनिक का क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में भी पंजीकरण नहीं मिला है।
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क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का खुला उल्लंघन कर रहे निजी अस्पताल
- जिले में सिर्फ 678 निजी अस्पताल और 89 पैथोलॉजी लैब हैं पंजीकृत
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते सैकड़ों निजी अस्पताल और पैथोलॉजी लैब बगैर पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। पंजीकरण शुल्क से बचने के लिए निजी अस्पताल संचालक क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। इससे निजी अस्पताल संचालकों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी राजस्व नुकसान हो रहा है।
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जिले में वर्तमान में कुल 678 निजी अस्पतालों का क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में पंजीकरण है। इनमें 166 स्थायी और 512 अस्थायी पंजीकरण है, जबकि जिले में निजी अस्पतालों की संख्या इससे दोगुना होने का अनुमान है। पंजीकरण न करवाने वालों में कुछ बड़े अस्पताल भी बताए जा रहे हैं। लगभग यही स्थिति पैथोलॉजी लैब के पंजीकरण में देखी जा रही है। जिले में अभी तक सिर्फ 89 पैथोलॉजी लैब ही पंजीकृत हैं, जबकि असल में इनकी संख्या एक हजार के करीब होने का अनुमान है। पंजीकरण न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के पास पैथोलॉजी लैब और निजी अस्पतालों की सही संख्या नहीं है। एसीएमओ डॉ. हरेंद्र मलिक ने कहा कि बगैर पंजीकरण चल रहे अस्पतालों के विरुद्ध शीघ्र ही अभियान चलाया जाएगा।
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शहरी क्षेत्र के अस्पतालों के पंजीकरण का शुल्क (स्थायी पंजीकरण)
बेड की संख्या-- सामान्य -- सुपर स्पेशलिटी
01-10 बेड-- 18,000 रुपये -- 25,000 रुपये
11-20 बेड-- 20,000 रुपये-- 30,000 रुपये
21-30 बेड-- 40,000 रुपये- 50000 रुपये
31-40 बेड-- 60,000 रुपये-- 80,000 रुपये
41-50 बेड-- 80,000 रुपये-- 1,20,000 रुपये
51-100 बेड-- 1,00000 रुपये-- 1,50,000 रुपये
101-500 बेड-- 1,20,000 रुपये-- 1,80,000 रुपये
500 से अधिक बेड-- 1,80,000 रुपये-- 2,20,000 रुपये
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संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। गर्भवती महिला की मौत के मामले में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को क्लीनिक पर छापा मारा। इसकी भनक लगते ही क्लीनिक संचालक परिवार समेत फरार हो गया। टीम ने क्लीनिक को सील कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्लीनिक का क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में पंजीकरण नहीं मिला है।
ट्रांजिट कैंप स्थित लक्ष्मी क्लीनिक में मंगलवार को एक गर्भवती महिला पूजा की मौत हो गई थी। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया था। इसके बाद बुधवार को एसीएमओ डॉ. हरेंद्र मलिक और नायब तहसीलदार बीसी भंडारी टीम के साथ क्लीनिक के औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे लेकिन वहां ताला लटका मिला। टीम के सदस्यों ने आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई तो उन्होंने बताया कि घटना के तुरंत बाद ही क्लीनिक संचालक परिवार समेत फरार हो गया था। एसएमओ डॉ. हरेंद्र मलिक ने बताया कि एहतियातन अग्रिम कार्रवाई तक क्लीनिक को सील किया गया है। इस प्रकरण में क्लीनिक संचालक को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए निर्देशित किया गया है। डॉ. मलिक ने बताया कि जांच में लक्ष्मी क्लीनिक का क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में भी पंजीकरण नहीं मिला है।
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क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का खुला उल्लंघन कर रहे निजी अस्पताल
- जिले में सिर्फ 678 निजी अस्पताल और 89 पैथोलॉजी लैब हैं पंजीकृत
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते सैकड़ों निजी अस्पताल और पैथोलॉजी लैब बगैर पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। पंजीकरण शुल्क से बचने के लिए निजी अस्पताल संचालक क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। इससे निजी अस्पताल संचालकों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी राजस्व नुकसान हो रहा है।
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जिले में वर्तमान में कुल 678 निजी अस्पतालों का क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में पंजीकरण है। इनमें 166 स्थायी और 512 अस्थायी पंजीकरण है, जबकि जिले में निजी अस्पतालों की संख्या इससे दोगुना होने का अनुमान है। पंजीकरण न करवाने वालों में कुछ बड़े अस्पताल भी बताए जा रहे हैं। लगभग यही स्थिति पैथोलॉजी लैब के पंजीकरण में देखी जा रही है। जिले में अभी तक सिर्फ 89 पैथोलॉजी लैब ही पंजीकृत हैं, जबकि असल में इनकी संख्या एक हजार के करीब होने का अनुमान है। पंजीकरण न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के पास पैथोलॉजी लैब और निजी अस्पतालों की सही संख्या नहीं है। एसीएमओ डॉ. हरेंद्र मलिक ने कहा कि बगैर पंजीकरण चल रहे अस्पतालों के विरुद्ध शीघ्र ही अभियान चलाया जाएगा।
शहरी क्षेत्र के अस्पतालों के पंजीकरण का शुल्क (स्थायी पंजीकरण)
बेड की संख्या
01-10 बेड
11-20 बेड
21-30 बेड
31-40 बेड
41-50 बेड
51-100 बेड
101-500 बेड
500 से अधिक बेड