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सात फीसदी ब्याज के साथ बीमा क्लेम दें
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
Updated Tue, 02 Jan 2018 12:41 AM IST
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जिला उपभोक्ता फोरम ने ढाई साल पहले के मामले में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को बीमा धनराशि, वाद व्यय, मानसिक उत्पीड़न की धनराशि वाद दायर करने की तिथि से सात फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान के आदेश दिए हैं। कंपनी को एक महीने के भीतर धनराशि का भुगतान करना होगा।
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बीते 24 जुलाई 2015 में मोहल्ला कटोराताल काशीपुर निवासी मिथिलेश कांबोज ने फोरम में वाद दर्ज कराया था। उनका कहना था कि पति प्रमोद कुमार का देहांत हो गया था। पति ने एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से बीमा कराया था। बीमा पॉलिसी लेने के एक महीने के भीतर पति की मौत हो गई थी। जब उसने बीमा कंपनी में क्लेम के लिए आवेदन किया तो कंपनी ने पति द्वारा संबंधित तथ्य छुपाने का कारण गिनाकर क्लेम की राशि देने से इनकार कर दिया।
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बता दें कि बीमा कंपनियां बीमा करते समय व्यक्तियों को बीमा से संबंधित हितलाभ बताकर बीमा करती हैं, लेकिन क्लेम के भुगतान के समय विभिन्न प्रकार के नियम बताकर प्रीमियम राशि का भुगतान करने में आनाकानी करती हैं। अधिकांश लोग जानकारी के अभाव में फोरम की शरण में आ नहीं पाते हैं। साल के पहले दिन सोमवार को फोरम के अध्यक्ष आरडी पालीवाल, सदस्य सबाहत हुसैन खान, नरेश कुमारी छाबड़ा की बैंच ने मामले में एचडीएफसी इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया।
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बैंच ने कंपनी को वादी मिथिलेश कांबोज को पॉलिसी में उल्लेखित बीमा धनराशि दस लाख रुपये, मानसिक उत्पीड़न के लिए एक लाख रुपये और वाद व्यय पांच हजार रुपये वाद दायर की तिथि से भुगतान तिथि तक सात फीसदी साधारण वार्षिक ब्याज सहित चुकता करने के आदेश दिए हैं। बेंच ने कहा है कि बिना ठोस कारण बीमा कंपनी वादी को क्लेम देने से इनकार नहीं कर सकती है।