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Udham Singh Nagar News: देवी ध्वजारोहण के साथ आज से होगा चैती मेले का आगाज
Mon, 08 Apr 2024 10:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 08 Apr 2024 10:54 PM IST
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काशीपुर का चैती मंदिर। संवाद
काशीपुर। उत्तर भारत की प्रसिद्ध मां बाल सुंदरी देवी का चैत्र मास में लगने वाला ऐतिहासिक चैती मेला आज से शुरू हो जाएगा। पंडा विकास अग्निहोत्री ने बताया इस वर्ष चैत्र नवरात्र की सप्तमी यानी 15 अप्रैल की अर्द्ध रात्रि पंडा आवास मोहल्ला कानूनगोयान से मां भगवती का डोला चैती मेला मैदान स्थित मंदिर पहुंचेगा। मां भगवती यहां 22 अप्रैल तक श्रद्धालुओं को दर्शन देगी और 22 अप्रैल की ही अर्द्ध रात्रि डोला वापस पंडा आवास पहुंचेगा।
52 शक्तिपीठों में शामिल उज्जैनी शक्तिपीठ मां बाल सुंदरी देवी मंदिर में उत्तराखंड के अलावा यूपी, दिल्ली समेत कई राज्यों के श्रद्धालुओं में भारी आस्था है। चैत्र मास में लगने वाले इस मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां मत्था टेकने के साथ अपने बच्चों का मुंडन संस्कार और नवविवाहिता दंपति मां के दर्शन व जात लगाने पहुंचते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडा विकास अग्निहोत्री बताते हैं जिस स्थान पर गर्भ गृह है। वहां मां पार्वती की बाई भुजा गिरी थी। इसलिए यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में शामिल है। बताया काशीपुर का नाम पहले उज्जैनी था। जिसके चलते मंदिर का नाम उज्जैनी शक्तिपीठ पड़ गया। वहीं मंदिर परिसर के ईशान कोण में यज्ञशाला स्थापित है। जहां प्रतिदिन हवन-यज्ञ होता है। माना जाता है कि द्रोपदी ने भी यहां मां बाल सुंदरी देवी की पूजा-अर्चना की थी।
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52 शक्तिपीठों में शामिल उज्जैनी शक्तिपीठ मां बाल सुंदरी देवी मंदिर में उत्तराखंड के अलावा यूपी, दिल्ली समेत कई राज्यों के श्रद्धालुओं में भारी आस्था है। चैत्र मास में लगने वाले इस मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां मत्था टेकने के साथ अपने बच्चों का मुंडन संस्कार और नवविवाहिता दंपति मां के दर्शन व जात लगाने पहुंचते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडा विकास अग्निहोत्री बताते हैं जिस स्थान पर गर्भ गृह है। वहां मां पार्वती की बाई भुजा गिरी थी। इसलिए यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में शामिल है। बताया काशीपुर का नाम पहले उज्जैनी था। जिसके चलते मंदिर का नाम उज्जैनी शक्तिपीठ पड़ गया। वहीं मंदिर परिसर के ईशान कोण में यज्ञशाला स्थापित है। जहां प्रतिदिन हवन-यज्ञ होता है। माना जाता है कि द्रोपदी ने भी यहां मां बाल सुंदरी देवी की पूजा-अर्चना की थी।
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