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Udham Singh Nagar News: सावधान... आज का पिज्जा-बर्गर बच्चों के लिए न बन जाए कल का आईसीयू
Wed, 31 Dec 2025 11:50 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Wed, 31 Dec 2025 11:50 PM IST
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रुद्रपुर। घर-घर में परोसा जा रहा फास्ट फूड अब स्वाद नहीं बल्कि बच्चों की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। रंगीन पैकेटों में बंद पिज़्ज़ा, बर्गर, नूडल्स, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स मासूमों के शरीर में धीरे-धीरे बीमारी का जहर घोल रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी है कि अगर समय रहते इस खतरे पर अंकुश नहीं लगा तो आने वाली पीढ़ी अस्पतालों की कतारों में खड़ी दिखाई देगी।
बीते दिनाें अमरोहा की एक 16 साल की बच्ची की दिल्ली एम्स में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पता चला कि बच्ची की मौत की सबसे अहम वजह जो निकल कर आई है वह अधिक फास्टफूड के सेवन से आंत व अन्य अंदरूनी अंगों का प्रभावित होना बताया जा रहा है। इस घटना के बाद से बरेली, पीलीभीत सहित तमाम जिलों में निजी स्कूलों ने फास्टफूड के खिलाफ बच्चों व अभिभावकों को जागरूक करने का संकल्प लिया गया है। कई स्कूलों ने तो बच्चों को टिफिन में फास्ट फूड देने पर भी पूरी तरह रोक लगा दिया है।
10 साल की उम्र में मोटापा, 15 में डायबिटीज
चौंकाने वाली बात यह है कि आज 10 से 15 वर्ष की उम्र में ही बच्चे मोटापा, फैटी लिवर, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमके तिवारी बताते हैं फास्ट फूड में मौजूद ट्रांस फैट, अत्यधिक नमक-चीनी और केमिकल प्रिजरवेटिव बच्चों की आंतों और लीवर पर सीधा हमला करते हैं। लगातार जंक फूड खाने से पाचन तंत्र कमजोर हो रहा है। गैस, कब्ज, उल्टी, पेट दर्द और संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बच्चों में फैटी लीवर अब आम होता जा रहा है। यह बीमारी आगे चलकर लीवर फेल्योर जैसी खतरनाक स्थिति पैदा कर सकती है। इसके साथ ही दिल की धड़कन का असामान्य होना और सांस की दिक्कतें भी सामने आ रही हैं। जंक फूड बच्चों के शरीर में टाइम बम की तरह काम कर रहा है।
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मोबाइल-टीवी और फास्ट फूड की खतरनाक तिकड़ी
मोबाइल और टीवी पर चलने वाले चमकदार विज्ञापन बच्चों को जंक फूड की ओर तेजी से आकर्षित कर रहे हैं। स्क्रीन के सामने बैठकर बिना भूख के खाने की आदत बच्चों को मानसिक रूप से भी कमजोर बना रही है। चिड़चिड़ापन, नींद की कमी, एकाग्रता में कमी और पढ़ाई से दूरी इसके दुष्परिणाम हैं। बच्चों को जागरूक करने के लिए एक-दो दिन में जारी होगा सर्कुलर
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बीते दिनाें अमरोहा की एक 16 साल की बच्ची की दिल्ली एम्स में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पता चला कि बच्ची की मौत की सबसे अहम वजह जो निकल कर आई है वह अधिक फास्टफूड के सेवन से आंत व अन्य अंदरूनी अंगों का प्रभावित होना बताया जा रहा है। इस घटना के बाद से बरेली, पीलीभीत सहित तमाम जिलों में निजी स्कूलों ने फास्टफूड के खिलाफ बच्चों व अभिभावकों को जागरूक करने का संकल्प लिया गया है। कई स्कूलों ने तो बच्चों को टिफिन में फास्ट फूड देने पर भी पूरी तरह रोक लगा दिया है।
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10 साल की उम्र में मोटापा, 15 में डायबिटीज
चौंकाने वाली बात यह है कि आज 10 से 15 वर्ष की उम्र में ही बच्चे मोटापा, फैटी लिवर, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमके तिवारी बताते हैं फास्ट फूड में मौजूद ट्रांस फैट, अत्यधिक नमक-चीनी और केमिकल प्रिजरवेटिव बच्चों की आंतों और लीवर पर सीधा हमला करते हैं। लगातार जंक फूड खाने से पाचन तंत्र कमजोर हो रहा है। गैस, कब्ज, उल्टी, पेट दर्द और संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बच्चों में फैटी लीवर अब आम होता जा रहा है। यह बीमारी आगे चलकर लीवर फेल्योर जैसी खतरनाक स्थिति पैदा कर सकती है। इसके साथ ही दिल की धड़कन का असामान्य होना और सांस की दिक्कतें भी सामने आ रही हैं। जंक फूड बच्चों के शरीर में टाइम बम की तरह काम कर रहा है।
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मोबाइल-टीवी और फास्ट फूड की खतरनाक तिकड़ी
मोबाइल और टीवी पर चलने वाले चमकदार विज्ञापन बच्चों को जंक फूड की ओर तेजी से आकर्षित कर रहे हैं। स्क्रीन के सामने बैठकर बिना भूख के खाने की आदत बच्चों को मानसिक रूप से भी कमजोर बना रही है। चिड़चिड़ापन, नींद की कमी, एकाग्रता में कमी और पढ़ाई से दूरी इसके दुष्परिणाम हैं। बच्चों को जागरूक करने के लिए एक-दो दिन में जारी होगा सर्कुलर