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थारु जनजाति पर लिखी गई टिप्पणी के खिलाफ इतिहासकार पर केस दर्ज
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खटीमा। ‘उत्तराखंड का समग्र राजनीतिक इतिहास’ पुस्तक में थारु जनजाति पर जातिसूचक शब्दों का उल्लेख करने के मामले में पुलिस ने आरोपी इतिहासकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। राणा थारु परिषद के अध्यक्ष की ओर से तहरीर देने के बाद एसएसपी ने कोतवाली पुलिस को कार्रवाई के आदेश दिए थे।
राणा थारु परिषद अध्यक्ष दान सिंह राणा ने पुलिस को दी तहरीर में कहा था कि पुस्तक में थारु जनजाति पर की गई अपमानजनक टिप्पणी के कारण इस पुस्तक को आधार मानते हुए प्रो. अजय सिंह रावत के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि थारु जनजाति पर की गई टिप्पणी के कारण पुस्तक को प्रतिबंधित कर पाठ्यक्रम से भी हटाया जाए। प्रो. अजय सिंह रावत के इस कृत्य के कारण समाज के लोग और आने वाली पीढ़ी को भविष्य में अपमान व समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
इधर पुलिस ने प्रो. अजय सिंह रावत के खिलाफ धारा 153ए, 505 (2) व अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3 (1)(यू) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। सीओ बीएस भंडारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद आरोपी पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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बाजार में आई संशोधित पुस्तक
नैनीताल। इतिहासकार और पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत का कहना है कि उनके द्वारा लिखित पुस्तक ‘उत्तराखंड का समग्र राजनीतिक इतिहास’ संशोधित रूप में छपकर बाजार में आ गई है। संशोधित पुस्तक में वह अंश हटा दिया गया है जिस पर थारू समाज के लोगों को आपत्ति थी।
उन्होंने दोहराया कि उन्होंने अपनी इस पुस्तक में एचआर नेविल के लिखे गवर्नमेंट गजेटियर से कुछ अंश लिए थे जिस पर थारू समाज को आपत्ति थी। समाज की आपत्ति के बाद इन सभी पुस्तकों को बाजार से वापस मंगाया गया और उसे संशोधित कर प्रकाशित कराया गया। बताया कि संशोधित पुस्तक खटीमा और सितारगंज के पुस्तक विक्रेताओं को उपलब्ध करा दी गई है।
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राणा थारु परिषद अध्यक्ष दान सिंह राणा ने पुलिस को दी तहरीर में कहा था कि पुस्तक में थारु जनजाति पर की गई अपमानजनक टिप्पणी के कारण इस पुस्तक को आधार मानते हुए प्रो. अजय सिंह रावत के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि थारु जनजाति पर की गई टिप्पणी के कारण पुस्तक को प्रतिबंधित कर पाठ्यक्रम से भी हटाया जाए। प्रो. अजय सिंह रावत के इस कृत्य के कारण समाज के लोग और आने वाली पीढ़ी को भविष्य में अपमान व समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
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इधर पुलिस ने प्रो. अजय सिंह रावत के खिलाफ धारा 153ए, 505 (2) व अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3 (1)(यू) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। सीओ बीएस भंडारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद आरोपी पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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बाजार में आई संशोधित पुस्तक
नैनीताल। इतिहासकार और पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत का कहना है कि उनके द्वारा लिखित पुस्तक ‘उत्तराखंड का समग्र राजनीतिक इतिहास’ संशोधित रूप में छपकर बाजार में आ गई है। संशोधित पुस्तक में वह अंश हटा दिया गया है जिस पर थारू समाज के लोगों को आपत्ति थी।
उन्होंने दोहराया कि उन्होंने अपनी इस पुस्तक में एचआर नेविल के लिखे गवर्नमेंट गजेटियर से कुछ अंश लिए थे जिस पर थारू समाज को आपत्ति थी। समाज की आपत्ति के बाद इन सभी पुस्तकों को बाजार से वापस मंगाया गया और उसे संशोधित कर प्रकाशित कराया गया। बताया कि संशोधित पुस्तक खटीमा और सितारगंज के पुस्तक विक्रेताओं को उपलब्ध करा दी गई है।