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बिना टेंडर खरीद ली 18 लाख की किताबें

Tue, 21 Nov 2017 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर।
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर। Updated Tue, 21 Nov 2017 12:09 AM IST
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Books of 18 lakhs without buying tender
काशीपुर डिग्री कॉलेज में पुस्तकों की खरीद में धांधली के मामले में गेट पर प्रदर्शन करते छात्र नेता। - फोटो : amar ujala
राधेहरि राजकीय महाविद्यालय प्रशासन द्वारा लाइब्रेरी में पुस्तकों की खरीद में भारी घोटाले का आरोप लगाते हुए छात्र नेताओं ने लाइब्रेरी में हंगामा काटा। उन्होंने कार्यकारी प्राचार्या का घेराव कर आरोप लगाया कि पुस्तकें बगैर किसी टेंडर के निर्धारित मूल्य से अधिक दामों पर खुले बाजार से क्रय की गई हैं। इतना ही नही, पुस्तकों की संख्या भी कई गुना अधिक दर्शाई गई है।
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महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष गुरप्रेम सिंह ने 16 नवंबर को आरटीआई के तहत महाविद्यालय में वर्ष 2015 से अब तक खरीदी गई पुस्तकों के बारे में पूर्ण विवरण मांगा है। छात्र नेताओं का आरोप है कि महाविद्यालय प्रशासन ने इन किताबों की खरीद में लाखों का घोटाला किया है। मामले को लेकर सोमवार को छात्रसंघ अध्यक्ष गुरप्रेम सिंह, पूर्व अध्यक्ष राहुल कांबोज, संयुक्त सचिव प्रियंका के नेतृत्व में छात्रों ने महाविद्यालय की लाइब्रेरी में हंगामा काटा।
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उनका कहना था कि कॉलेज की लाइब्रेरी में दो माह पूर्व बहुत कम संख्या में पुस्तकें आई हैं, जबकि उनकी संख्या हजारों में बताई गई है। इन किताबों पर अंकित मूल्य काले स्कैच पेन से मिटाए गए है। कॉलेज प्रशासन ने 18 लाख 66 हजार 550 रुपये की पुस्तकें खरीदने का दावा किया गया है, जबकि लाइब्रेरी में पहुंची पुस्तकों का वास्तविक मूल्य दो लाख रुपये से भी कम है। ज्यादातर पुस्तकें मौजूदा पाठ्यक्रम से भिन्न है। उन्होंने मामले की जांच कराए जाने को लेकर कार्यकारी प्राचार्या डॉ. कमला शर्मा का घेराव भी किया। हंगामा करने वालों ने पुस्तकों की खरीद के मामले की निष्पक्ष जांच न होने पर आमरण अनशन शुरू करने की भी चेतावनी दी।
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पुस्तकालय प्रभारी ने स्वीकारा, नियमानुसार नहीं हुई पुस्तकों की खरीद
महाविद्यालय के पुस्तकालय प्रभारी डॉ. सुभाष सिंह कुशवाहा ने भी स्वीकार किया कि पुस्तकों की खरीद नियमानुसार नहीं की गई है। इस कारण इन पुस्तकों को दो माह बाद भी लाइब्रेरी के रिकार्ड में नहीं चढ़ाया जा सका है। डॉ. कुशवाहा ने बताया कि महाविद्यालय प्रशासन द्वारा जो पुस्तकें खरीदी जाती है, उन्हें पुस्तकालय के रिकार्ड में चढ़ाया जाता हैै। रिकार्ड में पुस्तकें चढ़ाते समय लेखक, पुस्तक का नाम, संस्करण, प्रकाशक का नाम, प्रकाशन का वर्ष, बिल नंबर आदि का संपूर्ण विवरण दर्ज किया जाता है। तीन माह पूर्व लाइब्रेरी में लाई गई पुस्तकों का बिल आदि प्राप्त नहीं हो सका है। इस कारण ये पुस्तकें रिकार्ड में नहीं चढ़ाई जा सकी हैं।
 
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