{"_id":"ca48c362156b4c73f303e7d629669c43","slug":"bets-of-the-temple-of-learning-life-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षा के मंदिर तक जिंदगी का दांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षा के मंदिर तक जिंदगी का दांव
ब्यूूराे, अमर उजाला, रुद्रपुर
Updated Wed, 01 Jul 2015 12:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूलने वाले रुद्रपुर शहर के निजी स्कूलों का हाल कुछ और ही बयां कर रहा है। यह सब परिवहन विभाग की लापरवाही का ही खामियाजा है कि 1 जुलाई को शहर के स्कूल खुल रहे हैं और स्कूलों ने दो-चार बसों को छोड़ अभी भी खटारा बसों को ही बच्चों को लाने-ले जाने में लगा रखा है। रंगाई-पुताई करके बसें सजाकर तैयार कर दी हैं, हाल यह है कि कई बसों के टायर घिसे हुए हैं तो कुछ बसों की खिड़कियों पर जाली तक नहीं लगी है।
कुछ बसों की छत का लोहा तक जंग खाकर गल चुका है। अमर उजाला टीम ने जब शहर के कुछ स्कूलों की बसों की पड़ताल की तो वाहनों के हालात देख मासूमों की जिंदगी दांव पर दिखाई दी। अगर ऐसे ही खटारा वाहनों को छात्र-छात्राओं को लाने-ले जाने में लगा दिया गया तो हादसा होना तय है। स्कूल प्रबंधन भी आंखें मूंदे हुए हैं। वहीं परिवहन विभाग भी अपने काम की इतिश्री कर आराम फरमा रहा है। करीब डेढ़ माह पहले कुछ दिन के लिए चलाया चेकिंग अभियान भी ठंडे बस्ते में चला गया है। एक जुलाई को स्कूल खुल रहे हैं, लेकिन परिवहन विभाग की अभी तक स्कूल प्रबंधन के साथ बैठक तक नहीं हुई है।
विज्ञापन
कुछ बसों की छत का लोहा तक जंग खाकर गल चुका है। अमर उजाला टीम ने जब शहर के कुछ स्कूलों की बसों की पड़ताल की तो वाहनों के हालात देख मासूमों की जिंदगी दांव पर दिखाई दी। अगर ऐसे ही खटारा वाहनों को छात्र-छात्राओं को लाने-ले जाने में लगा दिया गया तो हादसा होना तय है। स्कूल प्रबंधन भी आंखें मूंदे हुए हैं। वहीं परिवहन विभाग भी अपने काम की इतिश्री कर आराम फरमा रहा है। करीब डेढ़ माह पहले कुछ दिन के लिए चलाया चेकिंग अभियान भी ठंडे बस्ते में चला गया है। एक जुलाई को स्कूल खुल रहे हैं, लेकिन परिवहन विभाग की अभी तक स्कूल प्रबंधन के साथ बैठक तक नहीं हुई है।
विज्ञापन