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शांतिपुरी के लोगों ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का लिया संकल्प
Thu, 07 Mar 2019 12:27 AM IST
अरुण कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अरुण कुमार
Updated Thu, 07 Mar 2019 12:27 AM IST
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अपराजिता कार्यक्रम में शपथ पत्रों के साथ छात्राएं व शिक्षिकाएं
- फोटो : amar ujala
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अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत बुधवार को राजकीय कन्या हाईस्कूल शांतिपुरी नंबर दो में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में एएनएम राधिका धामी ने छात्राओं व शिक्षिकाओं को खान-पान तथा स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि शरीर में कैल्शियम और आयरन की कमी होने से स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। डॉक्टर से स्वास्थ्य परीक्षण करना चाहिए। गोष्ठी में 73 लोगों ने संकल्प पत्र भरे।
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अमर उजाला अपराजिता मुहिम सरकार की ओर से चलाए गए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी। यह अभियान लोग में जागरूकता ला रहा है। -प्रधानाचार्य बृजेश गुप्ता।
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समाज में प्र्रचलित दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, महिला हिंसा जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए समाज का शिक्षित होना अति आवश्यक है। -लीला देउपा।
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जब बेटा पढ़ता है तो वह स्वयं शिक्षित होता है लेकिन यदि बेटी पढ़ती है तो वह पूरे परिवार तथा समाज को शिक्षित करती है। छात्रा, आराधना उपाध्याय,।
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कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए लोगों को जागरूक होना चाहिए। महिलाओं को समानता का अधिकार मिलने से ही मजबूत समाज का निर्माण होगा। शिक्षिका दिव्या पांडे।
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बेटियों को भी बेटों की तरह शिक्षित किया जाना चाaए। इससे बेटियां आत्मनिर्भर बन कर मुकाम हासिल कर सकेगी। छात्रा पायल दानू।
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परिवार तथा समाज में आज भी बेटियों को बेटों से कमतर आंका जाता है यदि समानता मिले तो निश्चित ही बेटियों को समाज में एक नया मुकाम मिलेगा। छात्रा मिथिलेश।
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बेटियों को आज भी कमजोर समझ कर उन्हें हीन भावना से देखा जाता है। समाज में बेटियां खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। छात्रा हिना रावत।
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अमर उजाला अपराजिता मुहिम सरकार की ओर से चलाए गए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी। यह अभियान लोग में जागरूकता ला रहा है। -प्रधानाचार्य बृजेश गुप्ता।
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समाज में प्र्रचलित दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, महिला हिंसा जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए समाज का शिक्षित होना अति आवश्यक है। -लीला देउपा।
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जब बेटा पढ़ता है तो वह स्वयं शिक्षित होता है लेकिन यदि बेटी पढ़ती है तो वह पूरे परिवार तथा समाज को शिक्षित करती है। छात्रा, आराधना उपाध्याय,।
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कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए लोगों को जागरूक होना चाहिए। महिलाओं को समानता का अधिकार मिलने से ही मजबूत समाज का निर्माण होगा। शिक्षिका दिव्या पांडे।
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बेटियों को भी बेटों की तरह शिक्षित किया जाना चाaए। इससे बेटियां आत्मनिर्भर बन कर मुकाम हासिल कर सकेगी। छात्रा पायल दानू।
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परिवार तथा समाज में आज भी बेटियों को बेटों से कमतर आंका जाता है यदि समानता मिले तो निश्चित ही बेटियों को समाज में एक नया मुकाम मिलेगा। छात्रा मिथिलेश।
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बेटियों को आज भी कमजोर समझ कर उन्हें हीन भावना से देखा जाता है। समाज में बेटियां खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। छात्रा हिना रावत।
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