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पर्यावरण संरक्षण: आयुर्वेदिक अस्पतालों में डॉ. आशुतोष ने किए मिनी फॉरेस्ट तैयार, खास तकनीक का कर रहे प्रयोग

Fri, 18 Nov 2022 04:36 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रपुर। Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Fri, 18 Nov 2022 04:36 PM IST
सार

डॉ. पंत रुद्रपुर स्थित पुराना जिला अस्पताल स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल के परिसर में सरकारी भूमि पर मियावाकी तकनीक से मिनी फॉरेस्ट तैयार कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि ऊधमसिंह नगर जिले के 21 में से सिर्फ आठ राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में ही खाली जमीन उपलब्ध है। इन आठ अस्पतालों में छोटे सघन वन मिनी फॉरेस्ट लगाने का प्रयास कर रहे हैं।

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Dr. Ashutosh Pant giving  message of environmental protection with Miyawaki technique of Japan Uttarakhand
अपने आवास पर मिनी फोरेस्ट तैयार करते डॉ. आशुतोष पंत। संवाद - फोटो : RUDRAPUR

विस्तार

जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. आशुतोष पंत जापान की मियावाकी तकनीक से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। वह इस तकनीक से रुद्रपुर स्थित पुराना जिला अस्पताल परिसर, काशीपुर स्थित महुआडाबरा और गदरपुर स्थित मसीत के आयुर्वेदिक अस्पतालों में मिनी फॉरेस्ट तैयार कर रहे हैं।

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उन्होंने जिले के आठ आयुर्वेदिक अस्पतालों में मिनी फॉरेस्ट तैयार करने का लक्ष्य रखा है। डॉ. पंत रुद्रपुर स्थित पुराना जिला अस्पताल स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल के परिसर में सरकारी भूमि पर मियावाकी तकनीक से मिनी फॉरेस्ट तैयार कर चुके हैं। इस मिनी फॉरेस्ट में आंवला, आम, अमरूद, शरीफा, तेजपत्ता, कटहल, नींबू, सहजन आदि के पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने अपने निजी आवास में भी इसी जापानी तकनीक से मिनी फॉरेस्ट तैयार किया है।
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डॉ. पंत ने कहा कि ऊधमसिंह नगर जिले के 21 में से सिर्फ आठ राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में ही खाली जमीन उपलब्ध है। इन आठ अस्पतालों में छोटे सघन वन मिनी फॉरेस्ट लगाने का प्रयास कर रहे हैं। वर्तमान में पुराना जिला अस्पताल रुद्रपुर, मसीत, महुआडाबरा में पौधे लगा दिए गए हैं, अब शेष स्थानों पर जल्द पौधे लगाए जाएंगे।

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भविष्य में प्रतिवर्ष से पांच से 10 मिनी फॉरेस्ट तैयार करने का लक्ष्य

डॉ. पंत बताते हैं कि अपने पिता सुशील चंद्र पंत की प्रेरणा से वर्ष 1988 से लगातार अपने वेतन से पर्यावरण संरक्षण का प्रयास करते आ रहे हैं। उन्होंने प्रत्येक वर्ष 20,000 पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनकी अपनी भूमि पर लगाने के लिए निशुल्क पौधे भेंट करते हैं।

अब तक 3,72,000 पौधे लगवा चुके हैं। वह कहते हैं इस तरह लोग कई जगह मिनी फॉरेस्ट बनाएं तो ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ने से वायुमंडल भी स्वच्छ होगा। उनका भविष्य में प्रतिवर्ष से पांच से 10 मिनी फॉरेस्ट तैयार करने का लक्ष्य है।

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क्या है मियावाकी तकनीक
डॉ. आशुतोष पंत ने बताया कि मियावाकी तकनीक जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी ने खोजी थी। इसमें पौधों को बहुत कम जगह में पास-पास रोपा जाता है। पौधों में तीव्र प्रकाश संश्लेषण होता है। खाद-पानी की अच्छी व्यवस्था होने पर पौधे चार-पांच गुना तेजी से बढ़कर बहुत जल्दी जंगल का स्वरूप ले लेते हैं। पौधे कम स्थान घेरने के साथ ही दूसरे पौधों की वृद्धि में भी सहायक होते हैं। 

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