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Udham Singh Nagar News: खेत स्वामी के मना करने के बाद सदियों से हो रही कुर्बानी पर गहराया संकट
Tue, 03 Jun 2025 12:04 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 03 Jun 2025 12:04 AM IST
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जसपुर। खेत स्वामी के मना करने के बाद सदियों से हो रही कुर्बानी पर संकट गहरा गया। एसडीएम की ओर से दोनों पक्षों के साथ की गई बैठक में भी कोई हल नहीं निकला। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
निजामगढ़-मनोरथपुर प्रथम गांव की कुर्बान गाह कमेटी के सदर सरदार खां ने बताया कि गांव निवासी रियासत खां के खेत में 100 गज की जगह पर ग्रामीण अपने पशुओं की ईद-उल-अजहा के दिन कुर्बानी करते चले आ रहे हैं। रियासत खां की मृत्यु के बाद से उनके पुत्र जिरासत, रियासत खेत की देखरेख करते हैं। जिरासत अब अपने खेत में कुर्बानी नहीं करने देना चाहते हैं। इनके मना करने के बाद कुर्बान गाह कमेटी ने कुर्बानी करने के लिए दो बीघा जमीन भी खरीदी है। बाकायदा भूमि का कुर्बान गाह में रजिस्ट्रेशन कराया है। वह अब इस भूमि में कुर्बानी करना चाहते थे तो भूमि के पड़ोसी लखविंदर सिंह एवं शिव मंदिर समिति ने कुर्बानी करने पर आपत्ति जता दी।
इसको लेकर सोमवार को एसडीएम चतर सिंह चौहान ने दोनों पक्षों के साथ ब्लाॅक सभागार में बैठक की। एसडीएम ने बताया कि जिस जगह वर्षों से कुर्बानी होती चली आ रही है वहीं पर कुर्बानी कराए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। आगामी कुछ दिनों का दोनों पक्षों को समय दिया गया है। न मानने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शांति व्यवस्था के लिए पुलिस को निर्देश दिए हैं। बैठक में सरफराज अहमद, जाहिद हुसैन, शााहिद हुसैन, सलीम अहमद आदि थे।
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निजामगढ़-मनोरथपुर की कुर्बानगाह से जुड़े हैं पांच गांवों के ग्रामीण
जसपुर। सरदार खां ने बताया कि निजामगढ़-मनोरथपुर प्रथम गांव की कुर्बानगाह से क्षेत्र के पांच गांव जुड़े हुए हैं। इनमें मेघावाला, बढ़ियोवाला, आमका, पतरामपुर एवं हजीरों गांव शामिल हैं। इन गांवों के ग्रामीण ईद-उल-अजहा के मौके पर सदियों से कुर्बानी करते चले आ रहे हैं। अब तो कमेटी ने कुर्बान गाह के नाम भूमि खरीद कर पंजीकरण भी करा लिया है। इसके बाद भी लोग कुर्बानी में खलल डाल रहे हैं। संवाद
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निजामगढ़-मनोरथपुर प्रथम गांव की कुर्बान गाह कमेटी के सदर सरदार खां ने बताया कि गांव निवासी रियासत खां के खेत में 100 गज की जगह पर ग्रामीण अपने पशुओं की ईद-उल-अजहा के दिन कुर्बानी करते चले आ रहे हैं। रियासत खां की मृत्यु के बाद से उनके पुत्र जिरासत, रियासत खेत की देखरेख करते हैं। जिरासत अब अपने खेत में कुर्बानी नहीं करने देना चाहते हैं। इनके मना करने के बाद कुर्बान गाह कमेटी ने कुर्बानी करने के लिए दो बीघा जमीन भी खरीदी है। बाकायदा भूमि का कुर्बान गाह में रजिस्ट्रेशन कराया है। वह अब इस भूमि में कुर्बानी करना चाहते थे तो भूमि के पड़ोसी लखविंदर सिंह एवं शिव मंदिर समिति ने कुर्बानी करने पर आपत्ति जता दी।
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इसको लेकर सोमवार को एसडीएम चतर सिंह चौहान ने दोनों पक्षों के साथ ब्लाॅक सभागार में बैठक की। एसडीएम ने बताया कि जिस जगह वर्षों से कुर्बानी होती चली आ रही है वहीं पर कुर्बानी कराए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। आगामी कुछ दिनों का दोनों पक्षों को समय दिया गया है। न मानने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शांति व्यवस्था के लिए पुलिस को निर्देश दिए हैं। बैठक में सरफराज अहमद, जाहिद हुसैन, शााहिद हुसैन, सलीम अहमद आदि थे।
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निजामगढ़-मनोरथपुर की कुर्बानगाह से जुड़े हैं पांच गांवों के ग्रामीण
जसपुर। सरदार खां ने बताया कि निजामगढ़-मनोरथपुर प्रथम गांव की कुर्बानगाह से क्षेत्र के पांच गांव जुड़े हुए हैं। इनमें मेघावाला, बढ़ियोवाला, आमका, पतरामपुर एवं हजीरों गांव शामिल हैं। इन गांवों के ग्रामीण ईद-उल-अजहा के मौके पर सदियों से कुर्बानी करते चले आ रहे हैं। अब तो कमेटी ने कुर्बान गाह के नाम भूमि खरीद कर पंजीकरण भी करा लिया है। इसके बाद भी लोग कुर्बानी में खलल डाल रहे हैं। संवाद