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Udham Singh Nagar News: मृत व्यक्ति को फरार दिखाकर करोड़ों की पैतृक जमीन हड़पने का आरोप
Thu, 02 Jul 2026 12:53 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 02 Jul 2026 12:53 AM IST
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रुद्रपुर। मृत व्यक्ति को फरार दिखाकर करोड़ों की पैतृक जमीन हड़पने का मामला सामने आया है। युवक ने पुलिस-प्रशासन को तहरीर देकर भूमाफिया और राजस्व विभाग पर मिलीभगत से धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
रुद्रपुर के ग्राम जयनगर निवासी राम कुमार ने शिकायत में बताया कि जयनगर स्थित खसरा संख्या 54, रकबा 61 बीघा 10 बिस्वा भूमि वर्ष 1954 से उनके पिता स्व. चेतराम के नाम मारूसी काश्तकार के रूप में दर्ज थी। आरोप है कि 30 मार्च 1967 को तत्कालीन तहसीलदार ने एक वाद में एकतरफा आदेश पारित कर उनके पिता को फरार दर्शाते हुए राजस्व अभिलेखों से नाम हटा दिया जबकि उनके अनुसार चेतराम का निधन 16 जून 1968 को हुआ था। इससे स्पष्ट है कि आदेश पारित होने के समय वह जीवित थे।
आरोप है कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की धारा 157-ए के प्रावधानों के विपरीत की गई। पीड़ित का कहना है कि बिना जिलाधिकारी की अनुमति, अनुसूचित जाति की भूमि सामान्य वर्ग के लोगों के नाम दर्ज कर दी गई। इस पूरे मामले में कुछ भूमाफिया और तत्कालीन राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।
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पीड़ित ने यह भी आरोप है कि वर्ष 1995-96 के बंदोबस्त के दौरान पुराने खसरे को विभाजित कर नए खसरा नंबर बना दिए गए। जब उन्होंने अपनी पैतृक भूमि पर कब्जा लेने का प्रयास किया तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। उनका कहना है कि सीएम हेल्पलाइन और आरटीआई के माध्यम से भी शिकायत की लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित ने एसएसपी और डीएम से मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और उनकी पैतृक भूमि पर दोबारा कब्जा दिलाने की मांग की है। एसएसपी अजय गणपति ने कहा कि सभी आरोपों की जांच की जा रही है।
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रुद्रपुर के ग्राम जयनगर निवासी राम कुमार ने शिकायत में बताया कि जयनगर स्थित खसरा संख्या 54, रकबा 61 बीघा 10 बिस्वा भूमि वर्ष 1954 से उनके पिता स्व. चेतराम के नाम मारूसी काश्तकार के रूप में दर्ज थी। आरोप है कि 30 मार्च 1967 को तत्कालीन तहसीलदार ने एक वाद में एकतरफा आदेश पारित कर उनके पिता को फरार दर्शाते हुए राजस्व अभिलेखों से नाम हटा दिया जबकि उनके अनुसार चेतराम का निधन 16 जून 1968 को हुआ था। इससे स्पष्ट है कि आदेश पारित होने के समय वह जीवित थे।
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आरोप है कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की धारा 157-ए के प्रावधानों के विपरीत की गई। पीड़ित का कहना है कि बिना जिलाधिकारी की अनुमति, अनुसूचित जाति की भूमि सामान्य वर्ग के लोगों के नाम दर्ज कर दी गई। इस पूरे मामले में कुछ भूमाफिया और तत्कालीन राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।
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पीड़ित ने यह भी आरोप है कि वर्ष 1995-96 के बंदोबस्त के दौरान पुराने खसरे को विभाजित कर नए खसरा नंबर बना दिए गए। जब उन्होंने अपनी पैतृक भूमि पर कब्जा लेने का प्रयास किया तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। उनका कहना है कि सीएम हेल्पलाइन और आरटीआई के माध्यम से भी शिकायत की लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित ने एसएसपी और डीएम से मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और उनकी पैतृक भूमि पर दोबारा कब्जा दिलाने की मांग की है। एसएसपी अजय गणपति ने कहा कि सभी आरोपों की जांच की जा रही है।