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लावारिस पशु बने मौत का सबब: ऊधमसिंह नगर में चार महीने में चार की जान, प्रशासन के दावे कागजों तक सीमित

Tue, 15 Sep 2026 12:06 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर Published by: Heera Updated Tue, 15 Sep 2026 12:06 PM IST
सार

ऊधमसिंह नगर जिले में लावारिस पशु सड़कों पर मौत का कारण बन रहे हैं। पिछले चार महीनों में लावारिस पशुओं की वजह से चार लोगों की जान जा चुकी है। नगर निगम और प्रशासन कागजों में दावे कर रहा है, लेकिन सड़कों पर हकीकत बदस्तूर है।

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stray animals are now roaming on the streets like death In Udham Singh Nagar
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

ऊधमसिंह नगर जिले में लावारिस पशु अब सड़कों पर मौत बनकर घूम रहे हैं। सिस्टम कागजों पर पशुओं को पकड़ रहा है लेकिन सड़कों पर हकीकत खून से लाल है।

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ताजा मामला सिडकुल का है। यहां लावारिस पशु से टकराने से उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी 19 वर्षीय विक्की की मौत हो गई। विक्की बाइक से कैंची धाम अपने भाई के साथ जा रहा था। अचानक सड़क पर आए पशु से उसकी बाइक टकरा गई और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले चार महीनों में लावारिस पशुओं की वजह से चार लोगों की जान जा चुकी है। नगर निगम और प्रशासन लगातार कागजों में पशुओं को पकड़ने के दावे कर रहा है लेकिन हर दिन लावारिस पशु सड़कों पर घूमते हुए दिख जाते हैं। इधर, मेयर विकास शर्मा का दावा है कि इस साल अबतक 200 से अधिक लावारिस पशुओं को पकड़कर लंभाखेड़ा गोशाला पहुंचाया जा चुका है।

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केस-1: छह मई को गदरपुर निवासी परविंदर सिंह बाइक से जा रहे थे। लावारिस पशु से टकराकर वे सड़क पर गिरे और पीछे से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने उन्हें कुचल दिया।

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केस-2: 14 अगस्त की रात ट्रांजिट कैंप कोतवाली में तैनात कांस्टेबल भुवन चंद्र आर्या गश्त पर थे। उनकी बाइक लावारिस पशु से टकरा गई और हादसे में उनकी मौत हो गई।

केस-3: तीन सितंबर को जसपुर हाईवे पर होमगार्ड दीक्षित चौहान (25) पशु को बचाने के चक्कर में हादसे का शिकार हो गए और उनकी जान चली गई।

नगर निगम शहर से लावारिस पशुओं को पकड़कर गोशाला पहुंचा रहा है। लोगों से भी अपील है कि पशुओं को सड़कों पर न छोड़ें। जो पशु नहीं पालना चाहता वो गोशाला पहुंचा सकता है। -विकास शर्मा, मेयर

अमर उजाला जगाता रहा, प्रशासन सोता रहा
सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं लेकिन प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। अमर उजाला ने 14 अगस्त को पंतनगर में सिपाही भुवन चंद्र आर्या और जसपुर में होमगार्ड दीक्षित चौहान की सड़क हादसे में मौत के बाद लगातार खबरें प्रकाशित कर प्रशासन और नगर निगम को चेताया था, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा, सोमवार को एक और दर्दनाक हादसा हो गया। रुद्रपुर ही नहीं, पूरे ऊधमसिंह नगर जिले में लावारिस पशुओं का आतंक है। हाईवे से लेकर शहर की गलियों तक झुंड में घूम रहे पशु हर रोज हादसों का कारण बन रहे हैं। लोगों में प्रशासन और नगर निगम के खिलाफ भारी आक्रोश है। 

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