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सरकारी अस्पताल के बर्न वार्ड का एसी महीनों से खराब

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Sep 2022 11:18 PM IST
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AC is not working properly in burn ward.
काशीपुर स्थित सरकारी अस्पताल। संवाद - फोटो : KASHIPUR
काशीपुर। एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय का बर्न वार्ड चिकित्सालय प्रशासन की उपेक्षा का शिकार हो रहा है। बर्न वार्ड में झुलसे लोगों के इलाज की कोई उचित व्यवस्था नहीं होने से अधिकतर गंभीर झुलसे केस को रेफर किया जाता है।
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सरकारी अस्पताल में विभिन्न सामाजिक संगठनों और गणमान्य व्यक्तियों के सहयोग से निर्मित चार बैड के बर्न वार्ड का 25 जून 2010 को तत्कालीन एसडीएम बीडी तिवारी ने उद्घाटन किया था। 12 वर्ष हो गए लेकिन अभी तक बर्न वार्ड में मूलभूत सुविधाओं को स्वास्थ्य विभाग उपलब्ध नहीं करा सका। वार्ड में एयरकंडीशनर तो लगे हैं लेकिन वे काफी समय से खराब हैं। झुलसे लोगों के लिए नेट कवर तक की व्यवस्था नहीं है।
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अस्पताल में फिजिशियन नहीं होने से 40 से 50 फीसदी से ऊपर झुलसे लोगों को भर्ती नहीं किया जाता है। पीड़ित को इमरजेंसी से ही हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में बहुत से झुलसे लोगों के तीमारदार क्षेत्र के महंगे अस्पताल में इलाज कराने को मजबूर हो जाते हैं। अब शीत काल शुरू होने जा रहा है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों से अधिकतर बर्न केस आते हैं।
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फर्स्ट एड देकर कर देते हैं रेफर
सरकारी अस्पताल का बर्न वार्ड शहरवासियों के साथ ग्रामीणों और इंडस्ट्रीज वर्क्स के लिए काफी महत्वपूर्ण है। समय-समय पर किसी न किसी कारण से लोग झुलस जाते हैं। खासकर शीतकाल के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों के झुलसने के अधिक केस आते हैं लेकिन अस्पताल के बर्न वार्ड में सुविधाओं का अभाव होने से पीड़ितों को इमरजेंसी से ही हायर सेंटर कर दिया जाता है। ऐसे में तीमारदारों को झुलसे व्यक्ति को इधर से उधर ले जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सीएमएस ने रिसीव नहीं किया फोन
सरकारी अस्पताल के सीएमएस डॉ. कैमाश राणा से जब बर्न वार्ड की खामियों को दूर करने के लिए क्या प्रयास किए गए हैं, इसकी जानकारी के लिए दो बार फोन से संपर्क किया गया तब उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

इस संबंध में मुझे जानकारी नहीं है। सरकारी अस्पताल के सीएमएस से इस संबंध में जानकारी जुटाकर बर्न वार्ड में जो खामियां होंगी उनको दूर कराया जाएगा। अस्पताल में बर्न केस के लिए सर्जन डॉक्टर तो है लेकिन फिजिशियन नहीं है।
डॉ. सुनीता रतूड़ी, सीएमओ।
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