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12 दिनों में शासन को ढाई करोड़ की हानि
Udham singh nagar
Updated Mon, 04 Feb 2013 05:30 AM IST
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सितारगंज। कोर्ट के आदेश पर शासन द्वारा ओवरलोडिंग के मामले में कड़ा रुख अपनाने और रायल्टी दर बढ़ाने के बाद नदी से उपखनिजों के चुगान को घाटे का सौदा करार देते हुए करीब दो हजार वाहन स्वामियों ने इससे किनारा कर लिया है। वाहन स्वामी पिछले 12 दिन से उपखनिजों के दाम बढ़ाने को लेकर आंदोलनरत हैं। चुगान न होने से इन 12 दिनों में सरकार को करीब ढाई करोड़ रुपये के राजस्व की हानि हो चुकी है। साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से आए तकरीबन दो हजार श्रमिकों के परिवारों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। मामला नहीं सुलझने पर वाहन स्वामियों ने गाड़ियों की चाबियां उपजिलाधिकारी को सौंपने का निर्णय लिया है।
नंधौर नदी में उपखनिजों के चुगान के लिए एमबीआर, कड़ापानी, कड़ापानी प्रथम, चोरगलिया एवं साधूनगर निकासी गेट में करीब दो हजार वाहन पंजीकृत हैं। सूत्रों के मुताबिक इन पांचों गेट से शासन को प्रतिदिन करीब 20 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। 22 जनवरी से पहले ट्रैक्टर-ट्राली से 80 क्विंटल, डंपर एवं ट्रकों से 140 क्विंटल उपखनिज लोडिंग की अनुमति थी और रायल्टी दर थी 7.20 रुपये प्रति क्विंटल थी। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर शासन ने 23 जनवरी से ट्रैक्टर-ट्राली में 60 क्विंटल, डंपरों एवं ट्रकों में 90 क्विंटल लोडिंग का शासनादेश जारी किया। साथ ही रायल्टी लगभग दोगुना करते हुए 14 रुपये प्रति क्विंटल कर दी। वाहन स्वामियों का कहना है रायल्टी दर बढ़ाने के बावजूद स्टोन क्रेशर मालिक पूर्व की भांति 30 रुपये प्रति क्विंटल पर माल खरीद रहे हैं। ऐसे में वाहन स्वामियों को प्रति चक्कर पांच सौ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उपखनिजों का दाम क्रेशरों में कम से कम 40 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर वाहनों को खड़ा कर हड़ताल पर चले गए हैं। 12 दिनों की हड़ताल के कारण शासन को अब तक 2.50 करोड़ रुपये राजस्व की हानि हो चुकी है। हड़ताल की वजह से चुगान में लगे यूपी, बिहार, झारखंड से आए करीब दो हजार मजदूर परिवार बेकार बैठे हैं, जबकि स्थानीय मजदूरों को शामिल करें तो यह आंकड़ा 3.50 हजार से अधिक है। वाहन स्वामियों ने बताया क्रेशर मालिकों द्वारा दाम नहीं बढ़ाने पर सभी वाहन स्वामी अपने वाहनों की चाबियां उपजिलाधिकारी मनीष कुमार सौंप कार्यालय में धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।
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स्टोन क्रेशरों की मनमानी ने निकाला दम
सितारगंज। नंधौर खनन वाहन समिति के नेता असलम हुसैन ने कहा वाहन स्वामी शासन द्वारा लोडिंग सीमा 60 क्विंटल और 90 क्विंटल किए जाने के विरोधी नहीं हैं। क्रेशर मालिकों की मनमानी के कारण हड़ताल की नौबत आई है। आरोप लगाया कि नदी से चुगान कर लाए उपखनिजों को क्रेशर मालिक 30 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद उसे 55 से 60 रुपये की दर से बेचते हैं। उनका कहना है लोडिंग सीमा की बाध्यता क्रेशरों से रेता बरजी के ढुलान में लगे वाहनों समेत सभी प्रकार के ट्रांसपोर्टेशन में लगे वाहनों पर भी लागू होना चाहिए। यह फरमान सिर्फ नदियों से चुगान में लगे वाहनों पर लागू होना शोषण नहीं तो और क्या है ? कहा कि इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है।
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नंधौर नदी में उपखनिजों के चुगान के लिए एमबीआर, कड़ापानी, कड़ापानी प्रथम, चोरगलिया एवं साधूनगर निकासी गेट में करीब दो हजार वाहन पंजीकृत हैं। सूत्रों के मुताबिक इन पांचों गेट से शासन को प्रतिदिन करीब 20 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। 22 जनवरी से पहले ट्रैक्टर-ट्राली से 80 क्विंटल, डंपर एवं ट्रकों से 140 क्विंटल उपखनिज लोडिंग की अनुमति थी और रायल्टी दर थी 7.20 रुपये प्रति क्विंटल थी। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर शासन ने 23 जनवरी से ट्रैक्टर-ट्राली में 60 क्विंटल, डंपरों एवं ट्रकों में 90 क्विंटल लोडिंग का शासनादेश जारी किया। साथ ही रायल्टी लगभग दोगुना करते हुए 14 रुपये प्रति क्विंटल कर दी। वाहन स्वामियों का कहना है रायल्टी दर बढ़ाने के बावजूद स्टोन क्रेशर मालिक पूर्व की भांति 30 रुपये प्रति क्विंटल पर माल खरीद रहे हैं। ऐसे में वाहन स्वामियों को प्रति चक्कर पांच सौ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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उपखनिजों का दाम क्रेशरों में कम से कम 40 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर वाहनों को खड़ा कर हड़ताल पर चले गए हैं। 12 दिनों की हड़ताल के कारण शासन को अब तक 2.50 करोड़ रुपये राजस्व की हानि हो चुकी है। हड़ताल की वजह से चुगान में लगे यूपी, बिहार, झारखंड से आए करीब दो हजार मजदूर परिवार बेकार बैठे हैं, जबकि स्थानीय मजदूरों को शामिल करें तो यह आंकड़ा 3.50 हजार से अधिक है। वाहन स्वामियों ने बताया क्रेशर मालिकों द्वारा दाम नहीं बढ़ाने पर सभी वाहन स्वामी अपने वाहनों की चाबियां उपजिलाधिकारी मनीष कुमार सौंप कार्यालय में धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।
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स्टोन क्रेशरों की मनमानी ने निकाला दम
सितारगंज। नंधौर खनन वाहन समिति के नेता असलम हुसैन ने कहा वाहन स्वामी शासन द्वारा लोडिंग सीमा 60 क्विंटल और 90 क्विंटल किए जाने के विरोधी नहीं हैं। क्रेशर मालिकों की मनमानी के कारण हड़ताल की नौबत आई है। आरोप लगाया कि नदी से चुगान कर लाए उपखनिजों को क्रेशर मालिक 30 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद उसे 55 से 60 रुपये की दर से बेचते हैं। उनका कहना है लोडिंग सीमा की बाध्यता क्रेशरों से रेता बरजी के ढुलान में लगे वाहनों समेत सभी प्रकार के ट्रांसपोर्टेशन में लगे वाहनों पर भी लागू होना चाहिए। यह फरमान सिर्फ नदियों से चुगान में लगे वाहनों पर लागू होना शोषण नहीं तो और क्या है ? कहा कि इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है।