फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Udham Singh Nagar News ›   छवि धूमिल करने की साजिश : नामधारी

छवि धूमिल करने की साजिश : नामधारी

Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
Udham singh nagar
Udham singh nagar Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
बाजपुर। उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव सिंह नामधारी ने कहा उनकी राजनीति को धूमिल करने के लिए उन्हीं के राजनैतिक दल के कुछ लोग पौंटी हत्याकांड मामले में फंसाने की साजिश रच रहे हैं। उन पर लगे सभी आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने दावा किया देशभर में उनके ऊपर कोई मुकदमा नहीं है, जो भी मुकदमे लगे हैं, वह लोगों की समस्याओं को उठाने पर लगे हैं। सभी मुकदमों का कोर्ट से निस्तारण हो चुका है।
विज्ञापन

गांव ताली फार्म स्थित आवास पर शुक्रवार दोपहर दिल्ली पुलिस की गिरफ्तारी से पहले मीडिया से बातचीत में नामधारी ने कहा पौंटी वारदात के बाद वह लगातार दिल्ली पुलिस के संपर्क में रहे। घटना के बाद फरार होने की बात को सिरे से नकारते हुए नामधारी ने कहा घटना के बाद वह घर आ गये थे, दो दिन उनका मोबाइल जरूर बंद रहा है। नामधारी ने बताया वह पौंटी से मिलने गये थे। पौंटी उन्हें गाड़ी में बैठाकर अपने साथ फार्म हाउस ले गए थे। उन्होंने अपने गनर सचिन त्यागी को भी गाड़ी में बैठाया। गाड़ी से उतरते समय ही पौंटी चड्ढा और उनके भाई हरदीप सिंह के बीच गालीगलौज हुई थी, लेकिन पौंटी को यह नहीं मालूम था कि ऐसी घटना उनके साथ होगी। उनके गनर त्यागी ने उनकी सुरक्षा के लिए फायरिंग की थी।
विज्ञापन


गोली लगने पर पौंटी को ले गये थे अस्पताल
बाजपुर। उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव सिंह नामधारी ने बताया गोली लगने के बाद वह पौंटी को अस्पताल ले गये थे, जहां उनकी मौत हो गई। बाद में सूचना मिली कि हरदीप सिंह की भी मौत हो गई है। घटना के बाद से वह घर पर ही हैं। वह किसी कारणवश पौंटी के अंतिम अरदास में नहीं जा सके। नामधारी ने कहा शुक्रवार सुबह उन्होंने दिल्ली पुलिस को बुलाया। पौंटी हत्याकांड मामले में पुलिस को उनका पूरा सहयोग मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


पौंटी चड्ढा से है 17 साल पुरानी दोस्ती
बाजपुर। नामधारी ने कहा पौंटी चड्ढा से उनकी 17 साल पुरानी मित्रता है। वर्ष 1995 में पौंटी चड्ढा से उनकी दोस्ती हुई थी। मित्रता के चलते उनका पौंटी के यहां आना-जाना रहता था। पौंटी की हत्या का उन्हें बेहद दु:ख है। पौंटी हत्याकांड में उनकी तरफ से दिल्ली पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पौंटी चड्ढा के किसी बिजनेस में उनकी न कोई हिस्सेदारी है और न ही कोई पार्टनरशिप।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed