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तीन लाख की रंगदारी मांगने वाला आरोपी सरेंडर
Udham singh nagar
Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
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काशीपुर। यूपी एवं उत्तराखंड में दर्जनभर संगीन वारदातों के आरोपी हितेंद्र पाल ने एक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट मुकेश चंद्र आर्य की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। वहीं अदालत ने उसके अधिवक्ता द्वारा दाखिल जमानत याचिका को खारिज कर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
मंगलवार को हितेंद्र पाल ने अपने अधिवक्ता संजीव आकाश द्वारा अदालत में काशीपुर थाने में वर्ष 2007 में तीन लाख की रंगदारी मांगने एवं जान से मारने की धमकी देकर एटीएम से 40 हजार रुपये निकलवाने के आरोप में आत्मसमर्पण का प्रार्थना पत्र दिया, जिस पर हितेंद्र पाल ने आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। कोतवाल जेपी जुयाल ने बताया 19 अक्तूबर 2007 को जसपुर खुर्द निवासी सौरभ कुमार ने गिरीताल निवासी हितेंद्र पाल सहित तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें कहा कि हितेंद्र पाल एवं उसके दो अन्य साथियों ने उससे तीन लाख की रंगदारी मांगी, जब वह रुपये नहीं दे पाया तो उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी, फिर उसे कार में डाल कर ले गए और उससे एटीएम से 40 हजार रुपया निकलवा कर ले लिया। कोतवाल ने बताया हितेंद्र पुलिस पकड़ में नहीं आया और तब अदालत ने स्थाई वारंट जारी किया। दो अन्य आरोपियों में एक की मौत हो गई, जबकि दूसरे ने जमानत करा ली। सरेंडर से पहले हितेंद्र अंडर ग्राउंड हो गया था।
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मंगलवार को हितेंद्र पाल ने अपने अधिवक्ता संजीव आकाश द्वारा अदालत में काशीपुर थाने में वर्ष 2007 में तीन लाख की रंगदारी मांगने एवं जान से मारने की धमकी देकर एटीएम से 40 हजार रुपये निकलवाने के आरोप में आत्मसमर्पण का प्रार्थना पत्र दिया, जिस पर हितेंद्र पाल ने आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। कोतवाल जेपी जुयाल ने बताया 19 अक्तूबर 2007 को जसपुर खुर्द निवासी सौरभ कुमार ने गिरीताल निवासी हितेंद्र पाल सहित तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें कहा कि हितेंद्र पाल एवं उसके दो अन्य साथियों ने उससे तीन लाख की रंगदारी मांगी, जब वह रुपये नहीं दे पाया तो उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी, फिर उसे कार में डाल कर ले गए और उससे एटीएम से 40 हजार रुपया निकलवा कर ले लिया। कोतवाल ने बताया हितेंद्र पुलिस पकड़ में नहीं आया और तब अदालत ने स्थाई वारंट जारी किया। दो अन्य आरोपियों में एक की मौत हो गई, जबकि दूसरे ने जमानत करा ली। सरेंडर से पहले हितेंद्र अंडर ग्राउंड हो गया था।
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